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गैंगरेप पर कविता में 2 शब्दों को यहां BJP सरकार ने बताया- ‘अश्लील’, अकादमी पुरस्कार विजेता की किताब की बिक्री, प्रसार पर रोक

19 जनवरी, 2019 को किताब की खरीदारी का ऑर्डर भी जारी किया गया था। लेकिन अचानक अब कोंकणी अकादमी की एग्जीक्यूटिव कमेटी ने सारे ऑर्डर कैंसिल कर दिये हैं।

Neelba Khandekar भारतीय नेवी में भी अपनी सेवा दे चुके हैं। फोटो सोर्स – Indian Express

गैंगरेप पर लिखी गई एक कविता के 2 शब्दों को गोवा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने अश्लील बताते हुए उसकी बिक्री और प्रसार पर रोक लगा दी है। कोंकणी भाषा के कवि और साहित्य अकादमी अवार्ड, 2019 के विजेता Neelba Khandekar ने ‘The Words’ के नाम से एक किताब लिखी है। खास बात यह है कि साल 2018 में गोवा कोंकणी अकादमी की तीन सदस्यीय कमेटी ने जब 64 किताबों को मान्यता दी थी तब उस वक्त उसमें ‘The Words’ भी शामिल थी। इसके बाद 19 जनवरी, 2019 को किताब की खरीदारी का ऑर्डर भी जारी किया गया था। लेकिन अचानक अब कोंकणी अकादमी की एग्जीक्यूटिव कमेटी ने सारे ऑर्डर कैंसिल कर दिये हैं।

Neelba Khandekar ने The Indian Express से बातचीत करते हुए बताया कि उन्हें अकादमी के अधिकारियों ने बताया कि अध्यक्ष ने उनकी ‘The Words’ किताब में ‘गैंगरेप’ नाम से लिखी गई कविता में 2 शब्दों को अश्लील बताया है। उन्हें बताया गया है कि इस कविता में ‘Yoni’ और ‘Thann’ शब्द पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। इंडियन नेवी में अपनी सेवा दे चुके Neelba Khandekar ने अब इस मामले में आरटीआई दायर करने की बात कही है। उनका कहना है कि वो जानना चाहते हैं कि जिन 2 शब्दों पर आपत्ति दर्ज कराई गई है वो अश्लील कैसे हैं?

तीन सदस्यों की वो कमेटी जिसने 64 किताबों को मान्यता दी थी उसके एक सदस्य प्रकाश पारिएंकर ने कहा कि ‘उस वक्त अकादमी की कार्यवाहक अध्यक्ष स्नेहा मोराजकर ने कमेटी के सदस्यों को बताया कि कई बाहरी लोगों ने अकादमी को खत लिखकर कविता पर आपत्ति जताई है और इसी वजह से एक नीतिगत फैसला लेने की जरुरत है।’ प्रकाश पारिएंकर ने कहा कि हममें से किसी को भी इस कविता में ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया जिससे की उसपर ऊंगलियां उठाई जाएं लेकिन स्नेहा मोराजकर ने कविता में आपत्तिजनक शब्दों को ढूंढा और कहा कि अगर यह किताब बच्चों के हाथ में जाती है तो उसका गलत असर पड़ेगा।

हालांकि अब स्नेहा मोरजकर का कहना है कि ‘किताब की खरीदारी पर रोक लगाने का फैसला उनका अकेला नहीं बल्कि एग्जीक्यूटिव कमेटी का था। मैंने उन शब्दों को देखा था और मुझे इसमें कोई समस्या नहीं नजर आई। लेकिन मैंने सलेक्शन कमेटी के तीनों सदस्यों से इस बारे में पूछा था लेकिन अगर वो लोग इससे सहमत नहीं थे तो उन्हें यह मामला एग्जीक्यूटिव कमेटी के पास भेजे जाने के लिए राजी नहीं होना चाहिए था। इतना ही नहं एग्जीक्यूटिव कमेटी को किताबों की खरीदारों पर रोक लगाने के लिए भी राजी नहीं होना चाहिए था।’

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