भाजपा के नए राष्ट्रीय पदाधिकारी पिछले सप्ताह दिल्ली स्थित पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में बंद कमरे में हुई बैठक के लिए जुटे, लेकिन कमरे का माहौल उत्साहजनक बिल्कुल नहीं था। नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुलाकात कर नई कार्ययोजना पर चर्चा की। पीएम मोदी ने नरम लेकिन दृढ़ लहजे में पदाधिकारियों को सलाह दी कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार मिली चुनावी जीत के आधार पर वे आत्मसंतुष्ट न हों। नवीन ने भी चेताया कि सत्ता ने पार्टी के नेताओं और जनता के बीच दूरी पैदा कर दी है।

बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नई टीम को लेकर आत्मविश्वास से भरे हुए थे। एक नेता ने कहा, “उन्होंने घंटों बैठकर हर नए पदाधिकारी की बात सुनी। उन्होंने उनसे अपने बारे में और यह बताने के लिए कहा कि वे पार्टी में कैसे आगे बढ़े।”

नेता ने कहा, “पीएम साहब हमेशा से स्पष्ट रहे हैं। उन्होंने हमें पहले बताया था कि यूपीए के खिलाफ नाराजगी हमें 2014 में सत्ता में लेकर आई थी, लेकिन 2019 में हमें दोबारा सत्ता में गरीबों और देश की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों ने वापस पहुंचाया। 2023 में उन्होंने हमें बताया था कि भाजपा को लोकसभा चुनाव संगठन की ताकत के आधार पर लड़ना होगा। उनका संदेश था कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को फिर से अग्रिम मोर्चे पर आना होगा और हम अपनी जीत को निश्चित मानकर नहीं चल सकते।”

जेन-ज़ी से दूरी?

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब विभिन्न राज्यों में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के कुछ वर्गों के बीच बढ़ती बेचैनी महसूस की जा रही है। भाजपा के कुछ अंदरूनी नेताओं का कहना है कि नई संगठनात्मक टीम बनने में कई महीने लगने और लंबे समय से चर्चा में रहे संभावित सरकारी फेरबदल की वजह से पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच असमंजस बढ़ गया है।

राज्य के एक भाजपा नेता के मुताबिक, अपनी स्थिति को लेकर बेचैनी के कारण कई वरिष्ठ नेता खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश में लगे हैं। बदलाव का डर उनके मन में बना हुआ है और इसका असर राज्यों तक भी पहुंच रहा है। नेता ने कहा कि जब पार्टी और सरकार के वरिष्ठ नेता अपनी स्थिति को लेकर चिंतित रहते हैं, तो वे फैसले लेने में हिचकिचाते हैं। इसका असर शासन-व्यवस्था पर पड़ता है और आम पार्टी कार्यकर्ताओं में भी निराशा बढ़ती है। भाजपा की चिंताओं को और बढ़ाते हुए, पता चला है कि संघ ने भी राज्य के नेताओं के बीच “बढ़ती दूरी” और “थकान की वजह” की ओर इशारा किया है।

संघ के साथ गहरे संबंध रखने वाले भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जेन-ज़ी के विरोध प्रदर्शनों और उनके मुद्दों पर कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के सार्वजनिक बयानों का उलटा असर होता दिखाई दिया है। उन्होंने कहा, “जब मंत्री कहते हैं कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और उसके नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे सही हैं, लेकिन उनके पीछे गलत मंशा थी, तो ऐसा तर्क कैसे टिकता है? अगर मुद्दा सही है, तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि उसे कौन उठाता है? इस तरह की प्रतिक्रियाओं से यह धारणा बन सकती है कि पार्टी या सरकार के पास इससे बेहतर तर्क नहीं हैं और मंत्री की टिप्पणी विपक्षी नेताओं तथा आलोचकों को ही सुर्खियों में बनाए रखेगी।”

कई नेता इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि केंद्रीय मंत्रियों को विश्वविद्यालयों में भेजने का क्या असर होगा। एक नेता ने कहा, “अगर कोई मंत्री किसी विश्वविद्यालय में जाता है, जो मूल रूप से छात्रों और लोकतांत्रिक माहौल का क्षेत्र है, तो एकतरफा संवाद विनाशकारी होगा। अगर वह संवाद में शामिल होता है, तो मंत्री की हर प्रतिक्रिया, यदि उसे सावधानी या अत्यधिक परिपक्वता के साथ संभाला नहीं गया, एक बड़ा तमाशा बन सकती है। इससे सीजेपी और अन्य विपक्षी दलों को पार्टी और सरकार को निशाना बनाने के लिए मुद्दे मिल सकते हैं।”

भाजपा नेताओं ने कहा कि पार्टी को विभिन्न राज्यों से युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को लेकर इसी तरह की प्रतिक्रिया मिल रही थी। ये विरोध प्रदर्शन दिल्ली में सीजेपी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों और उसके बाद रांची में हुए प्रदर्शनों के बाद अब पटना में भी हो चुके हैं। पार्टी नेताओं ने बताया कि चर्चा का केंद्र अब शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों की ओर खिसक गया है।

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं, जेन-ज़ी से दूरी को लेकर यह चिंता आंतरिक गुटबाजी और जातिगत आधार पर चल रहे टकराव को लेकर बड़ी चिंता से जुड़ गई है। राज्य के भाजपा नेताओं ने कहा कि 18-29 वर्ष आयु वर्ग के जेन-जेड मतदाताओं की संख्या कुल मतदाताओं की 20% से अधिक होने का अनुमान है और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने उन्हें अस्थिर बना दिया है।

यह भी पढ़ें: नितिन नवीन की नई टीम से पहली मुलाकात में पीएम मोदी ने दी ‘चेतावनी’

भारतीय जनता पार्टी के नव नियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ अपनी पहली मुलाकात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पार्टी की चुनावी जीत से संतुष्ट ना होने की चेतावनी दी। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम से बार-बार आग्रह किया कि वे जमीनी स्तर पर जनता से जुड़े रहें और उनकी नब्ज को समझें। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक