Arvind Kejriwal News: आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए शराब नीति मामले में बरी किए जाने के बाद बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हमें यह सोचना चाहिए कि अगर आरोप निराधार थे, तो फिर आरोप कैसे लगाए गए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “देखिए निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में उनको बरी किया है। यह तकनीकी विषय है। यह बात भी सही है कि सैकड़ों की संख्या में सिम कार्ड और फोन सबूत के तौर पर नष्ट किए गए थे। अब वो किस भाव से सबूत नष्ट किए गए थे, उस कारण से सबूतों का अभाव उत्पन्न हुआ है। इस विषय को लेकर जो भी होगा सीबीआई अगला स्टेप उठाएगी, वो हाई कोर्ट में जाएगी या क्या होता है। जहां तक पार्टी का संदर्भ है इस पूरी डिटेल के आने के बाद इस पर रिप्लाई दिया जाएगा। यह बात भी विचारणीय है कि यदि सबूत बिल्कुल नहीं थे तो कोर्ट ने आरोप लगाने की परमिशन कैसे दे दी।”

रिश्वतखोरी कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है- अमित मालवीय

बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने भी अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बरी होने पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “दिल्ली आबकारी नीति मामले में फैसला निचली अदालत ने सुनाया है। अतीत में, दिल्ली हाई कोर्ट और भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी संबंधित मामलों में कड़ी और निंदनीय टिप्पणियां की हैं। यह देखना बाकी है कि हाई कोर्ट में यह फैसला कितना खरा उतरता है। कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।”

अमित मालवीय ने आगे लिखा, “अगर अरविंद केजरीवाल इतने ईमानदार थे, तो अनियमितताओं के सामने आने के बाद दिल्ली सरकार ने नीति को क्यों वापस लिया और उसमें बदलाव क्यों किए? कई फोन और सिम कार्ड क्यों नष्ट किए गए? कमीशन 6% से बढ़ाकर 12% करते हुए विक्रेताओं की संख्या में इतनी तेजी से कमी क्यों की गई? ये फैसले गंभीर और जायज सवाल खड़े करते हैं। रिश्वतखोरी कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है, ये मुद्दे अदालतों और जनता के सामने हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि केजरीवाल की “एक पर एक मुफ्त” योजना ने दिल्ली भर के परिवारों को नुकसान पहुंचाया। उनकी नीतियों ने शराब की कीमतें बढ़ाईं और परिवारों को झकझोर दिया। नैतिक रूप से दिवालिया सरकार चलाने के लिए उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। दिल्ली की जनता ने पहले ही मतपत्र के माध्यम से अपना फैसला सुना दिया है। अब न्यायपालिका अपनी जांच जारी रखेगी। न्यायिक जांच के और भी चरण लंबित होने के कारण, अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।”

कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के कविता सहित सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। स्पेशल जज (पीसी एक्ट) जितेंद्र सिंह ने सीबीआई द्वारा आरोपियों के खिलाफ शुरू किए गए मामले को बंद करने का आदेश पारित किया।

अदालत ने फैसला सुनाया, “आबकारी नीति में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक इरादा नहीं था।” न्यायालय ने आगे कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक जांच में खरा नहीं उतरता क्योंकि सीबीआई ने केवल अनुमानों के आधार पर साजिश की कहानी गढ़ने की कोशिश की थी। आखिरकार यह नतीजा निकलाया गया कि 23 आरोपियों में से किसी के भी खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है।

अदालत ने सीबीआई को गवाहों के बयानों के आधार पर अपना मामला बनाने के लिए भी फटकार लगाई। न्यायाधीश ने कहा, “अगर इस तरह के आचरण की अनुमति दी जाती है, तो यह संवैधानिक सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन होगा। किसी आरोपी को क्षमादान देकर उसे गवाह बनाना, उसके बयानों का इस्तेमाल जांच में मौजूद कमियों को भरने और अन्य लोगों को आरोपी बनाने के लिए करना गलत है।” कोर्ट ने आगे कहा कि वह सीबीआई के उन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश करेगी जिन्होंने एक लोक सेवक (कुलदीप सिंह) को इस मामले में मुख्य आरोपी बनाया था।

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हम आपको बता रहे हैं दिल्ली की आबकारी नीति में कब-कब क्या-क्या हुआ। देखें इस मामले की पूरी टाइमलाइन…