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बगावत से जूझ रही बीजेपी ने करीब 100 नेताओं को पार्टी से निकाला, विधायक को भी थमाया नोटिस

ऐसा पहली बार हुआ है, जब बीजेपी अपने ही इतने नेताओं के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर ऐक्शन लिया है।

Author देहरादून | Published on: October 10, 2019 7:45 AM
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत। (Express photo: Praveen Khanna/File)

उत्तराखंड में सत्ताधारी बीजेपी ने बीते 10 दिन में कम से कम 96 नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया है। पार्टी ने अनुशासनात्मक आधार पर यह कार्रवाई की है। पार्टी को जानकारी मिली थी कि ये नेता आगामी पंचायत चुनावों में बीजेपी समर्थित प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे। ऐसा पहली बार हुआ है, जब बीजेपी अपने ही इतने नेताओं के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर ऐक्शन लिया है।

वहीं, पार्टी के शीर्ष नेता 14 अक्टूबर को देहरादून में मुलाकात करके पंचायत चुनावों और पार्टी से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा करने वाले हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू के अलावा सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत इस मीटिंग में मौजूद होंगे। बैठक में सभी के सभी सांसदों, विधायकों के अलावा पंचायत चुनावों के लिए गठित जिला कमेटियों के पदाधिकारी मौजूद होंगे।

पार्टी ने अनुशासनहीनता के खिलाफ कड़ा मैसेज देने की कोशिश की है। बीजेपी के स्टेट जनरल सेक्रेटरी राजेंद्र भंडारी ने रविवार को रायपुर के विधायक उमेश शर्मा को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया। इससे पहले, एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें शर्मा कथित तौर पर किसी शख्स को पार्टी समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ वोट देने के लिए कह रहे थे। शर्मा ने मंगलवार को नोटिस का जवाब दिया।

जिन 96 नेताओं को पार्टी से निकाला गया है, उनमें से 21 उधमपुर सिंह नगर, 14 टिहरी, 13 चमोली, 12 अलमोड़ा, 9 नैनीताल, 6 बागेश्वर, 5 पौड़ी और चंपावत, पिथौरागढ़ और देहरादून से 4-4 नेता शामिल हैं। इसके अलावा, रूद्रप्रयाग और उत्तराकाशी से भी 2-2 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। इनमें जिला, मंडल व बूथ स्तर के नेता शामिल थे, जिनके पास अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव जैसे पद भी थे।

उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि अगर यह साबित हो गया कि नेता पंचायत चुनावों में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे तो ऐसा ही कड़ा ऐक्शन कुछ और के खिलाफ भी लिया जाएगा। प्रदेश के मीडिया इनचार्ज देवेंद्र भसीन ने कहा, ‘उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अब नामांकन वापस लेने की तारीख निकल चुकी है। उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है।’

बता दें कि पंचायत चुनावों के लिए पहले चरण के मतदान 6 अक्टूबर को हुए जबकि बाकी दो चरणों के लिए वोटिंग 11 और 16 अक्टूबर को होगी। ये चुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते। हर पार्टी अपने द्वारा समर्थित प्रत्याशियों की घोषणा करती है जो चुनाव आयोग द्वारा दिए गए चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरते हैं।

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