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BJP को मिला एक साल में 800 करोड़ रुपए का चंदा, TATA ने दिए 356 करोड़; कांग्रेस ने जुटाए 146 करोड़

BJP को इस साल यानी कि 2018-19 में 700 करोड़ रुपए से अधिक चंदे (डोनेशन) से जुटाए हैं। बीजेपी को सबसे बड़ा डोनेशन (356 करोड़ रुपए) टाटा समूह (Tata Group) द्वारा नियंत्रित संस्था प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट से आया है।

Author दिल्ली | Updated: November 14, 2019 12:18 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप में किया गया है। (फाइल फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने साल 2018-19 में 700 करोड़ रुपए से अधिक चंदे (डोनेशन) से जुटाए हैं। बीजेपी को सबसे बड़ा डोनेशन (356 करोड़ रुपए) टाटा समूह (Tata Group) द्वारा नियंत्रित संस्था प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिला है। बता दें कि यह जानकारी बीजेपी ने चुनाव आयोग (Election Commission of India) में जमा किए गए दस्तावेजों में दी गई है। राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी ट्रस्टों के योगदान को आमतौर पर कॉर्पोरेट चंदे के रूप में पहचाना जाता है।

बता दें कि 2018-19 में बीजेपी ने सभी चुनावी ट्रस्टों से लगभग 470 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जबकि 2017-18 में उसे 167.80 करोड़ मिले थे। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट, जिसने बीजेपी को 67.3 करोड़ रुपये का भुगतान किया, चुनावी ट्रस्टों में टाटा के बाद दूसरा सबसे बड़ा डोनेशन देना वाला ग्रुप है। भारती एयरटेल समूह इस ट्रस्ट का सबसे बड़ा योगदानकर्ता है, जो हीरो मोटोकॉर्प, जुबिलेंट फूडवर्क्स, ओरिएंट सीमेंट, डीएलएफ और जेके टायर्स द्वारा समर्थित है। जबकि प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने कांग्रेस को 39 करोड़ रुपए चंदा दिया।

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बता दें कि कांग्रेस को 146 करोड़ रुपए चंदे में से 98 करोड़ रुपए इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिले हैं। जबकि बीजेपी को 800 करोड़ में से करीब 470 करोड़ रुपए इलेक्टोरल ट्रस्ट से आए हैं। वहीं आदित्य बिड़ला समूह के जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट ने बीजेपी को 28 और कांग्रेस को 2 करोड़ रुपए बतौर चंदा दिया। इसके साथ ही ट्रिम्फ इलेक्टोरल ट्रस्ट ने भगवा पार्टी को 5 करोड़, हार्मोनी ग्रुप ने 10 करोड़ और जनहित इलेक्टोरल ट्रस्ट व न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 2.5-2.5 करोड़ रुपए चंदे में दिए हैं।

गौरतलब है कि देश के राजनीतिक दल चुनाव आयोग को उस चंदे की सूचना देते हैं जिसमें उसे 20,000 रुपए या इससे अधिक की रकम मिली हो। या फिर जिसका पेमेंट चेक या ऑनलाइन किया गया हो। चुनाव नियमों के मुताबिक, राजनीतिक दलों के लिए वित्त वर्ष के दौरान मिलने वाले कुल चंदे की जानकारी देना जरुरी है।

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