Falta Repoll Results: तृणमूल कांग्रेस के गढ़ के रूप में मशहूर फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के पुनर्निर्वाचन में अभूतपूर्व राजनीतिक इतिहास रचा गया है। डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने जीत दर्ज की है। देबांग्शु पांडा ने लगभग 1,09,000 से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की है। BJP कैंडिडेट को रिपोलिंग में लगभग डेढ़ लाख वोट मिले।

वहीं दूसरे नंबर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उम्मीदवार शंभू नाथ कुर्मी रहे हैं। उन्हें कुल चालीस हजार छह सौ पैंतालीस (40,645) वोट मिले हैं। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक मोल्ला रहे हैं। उन्हें कुल 10084 वोट मिले हैं। टीएमसी कांग्रेस के जहांगीर खान उर्फ पुष्पा को 7783 वोट ही मिले हैं। हालांकि, वह इन चुनाव में पीछे हट गए थे।

बंगाल में बीजेपी की सीट 208

फाल्टा सीट पर भारतीय जनता पार्टी की जीत के साथ बंगाल में उसकी सीटों की संख्या 207 से बढ़कर 208 हो गई है, हालांकि भवानीपुर सीट बरकरार रखने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा नंदीग्राम सीट खाली करने से उसकी प्रभावी विधानसभा संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा।

अभिषेक बनर्जी का आया रिएक्शन

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि फाल्टा के पुर्नमतदान में कई विसंगतियां सामने आई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “आज दोपहर 3:30 बजे तक सभी 21 राउंड पूरे हो चुके थे। 4 मई को, इसी समय तक, केवल 2-4 राउंड ही पूरे हुए थे। देश चुनाव आयोग से इस बारे में स्पष्टीकरण का हकदार है। हालांकि पिछले 10 दिनों में फाल्टा के 1000 से ज़्यादा कार्यकर्ताओं को अपने घर छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा है, फिर भी चुनाव आयोग ने इस पर आंखें मूंदे रखीं। जब आदर्श आचार संहिता लागू थी, तब भी दिन-दहाड़े पार्टी दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई।”

अभिषेक बनर्जी ने आगे लिखा, “चुनाव आयोग ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बजाय, सीईओ जिन पर आरोप है कि ईसीआई ने एसआईआर की आड़ में नामों को हटाने और चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने के लिए उनका इस्तेमाल किया था को नई बंगाल सरकार का मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया गया और यह उस समय किया गया जब फाल्टा में आदर्श आचार संहिता अभी भी लागू थी और मतदान की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी।”

टीएमसी सांसद ने लिखा, “इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि 4 मई को, चुनाव आयोग के तहत तैनात अधिकारियों और केंद्रीय बलों ने कथित तौर पर तृणमूल और बीजेपी को छोड़कर अन्य राजनीतिक दलों के काउंटिंग एजेंटों को मतगणना स्थल से बाहर निकाल दिया था। यह बेहद चिंताजनक है और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की मूल भावना पर सीधा प्रहार है। जब तक इन संदिग्ध अधिकारियों को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता और मतगणना प्रक्रिया का एक स्वतंत्र सीसीटीवी ऑडिट नहीं कराया जाता, तब तक जनादेश की विश्वसनीयता पर उठने वाले सवाल और भी मजबूत होते जाएंगे। सच को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता।”

फाल्टा में दोबारा चुनाव क्यों कराना पड़ा?

पश्चिम बंगाल में 2011 में सत्ता में आने के बाद से फाल्टा परंपरागत रूप से टीएमसी का गढ़ रहा है। हालांकि, 2026 के पश्चिम बंगाल चुनावों के दौरान, चुनावी अनियमितताओं के आरोपों के बाद इस निर्वाचन क्षेत्र के कई बूथ जांच के दायरे में आ गए। भाजपा ने सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं पर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चुनावी कदाचार का आरोप लगाया था।

मतदाताओं को डराने-धमकाने, ईवीएम में संदिग्ध अनियमितताओं और कई बूथों से मिली प्रक्रियात्मक उल्लंघनों की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने पहले की मतदान प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। पार्टी को चुनाव में मिली हार के बाद, ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि टीएमसी फाल्टा में अपने कैडर बेस को पुनर्जीवित करने के लिए आक्रामक प्रयास करेगी।

हालांकि, मतदान से पहले, टीएमसी के किसी भी वरिष्ठ नेता ने उम्मीदवार जहांगीर खान के लिए प्रचार नहीं किया। न तो टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और न ही पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने निर्वाचन क्षेत्र में रैलियों को संबोधित किया। यह आश्चर्यजनक था क्योंकि फाल्टा डायमंड हार्बर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जिसका प्रतिनिधित्व अभिषेक बनर्जी करते हैं।

जहांगीर खान ने इससे पहले पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश से चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में लाए गए आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को खुलेआम चुनौती देकर सुर्खियां बटोरी थीं । एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में अपनी इमेज के लिए मशहूर शर्मा को अक्सर ‘सिंघम’ कहा जाता है। इस तुलना का जवाब देते हुए खान ने खुद को ‘पुष्पा’ नाम दिया।

“अगर वह सिंघम है, तो मैं पुष्पा हूं,” खान ने तब टिप्पणी की थी जब शर्मा ने कथित तौर पर मतदान से पहले उनके आवास का दौरा किया था और चुनाव के दिन मतदाताओं को डराने-धमकाने के खिलाफ उनके परिवार के सदस्यों को चेतावनी दी थी। लेकिन यह आत्मविश्वास चुनावी सफलता में तब्दील नहीं हुआ।

फाल्टा में ‘कमल’ खिलते ही आया शुभेंदु अधिकारी का रिएक्शन

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “कुख्यात ‘डायमंड हार्बर’ मॉडल अब ‘तृणमूल के घाटे’ मॉडल में तब्दील हो चुका है। सर्वप्रथम, मैं फाल्टा की जनता को नमन करता हूं। उन परम पूज्यों को जिन्होंने फाल्टा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार देबांशु पांड्या को विधानसभा में भेजने के लिए भारी बहुमत दिया। मैं फाल्टा के मतदाताओं का विशेष रूप से आभारी हूं, मैंने उनसे भाजपा के उम्मीदवार को एक लाख वोटों के अंतर से जीत दिलाने की अपील की थी और जीत का अंतर एक लाख आठ हजार से अधिक हो गया है।” यहां क्लिक कर पढे़ं पूरी खबर…