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लखवी की रिहाई के खिलाफ लोकसभा एकजुट

मुंबई आतंकी हमले के षड्यंत्रकारी जकी उर रहमान लखवी को पाकिस्तान में जमानत पर रिहा करने के खिलाफ एकजुट लोकसभा में सरकार और विभिन्न दलों के सदस्यों ने प्रधानमंत्री के साथ बैठकर शुक्रवार को एक प्रस्ताव तैयार किया जिसे बाद में सर्वसम्मति से सदन ने स्वीकार कर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा […]

लोकसभा। (फ़ोटो-पीटीआई)

मुंबई आतंकी हमले के षड्यंत्रकारी जकी उर रहमान लखवी को पाकिस्तान में जमानत पर रिहा करने के खिलाफ एकजुट लोकसभा में सरकार और विभिन्न दलों के सदस्यों ने प्रधानमंत्री के साथ बैठकर शुक्रवार को एक प्रस्ताव तैयार किया जिसे बाद में सर्वसम्मति से सदन ने स्वीकार कर लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से लखवी की रिहाई की कड़ी निंदा किए जाने और इस फैसले को वापस लेने की मांग के बाद सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष के सदस्य आपस में मिलकर इस प्रस्ताव को बनाने में जुट गए। सदन में शून्यकाल चलते रहने के बीच ही कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इस बारे में अपनी पार्टी के शशि थरूर और केसी वेणुगोपाल से विचार विमर्श करते देखे गए। इस बीच खड़गे के साथ बैठे सदन के उपाध्यक्ष एम. थंबीदुरै उठ कर मोदी और उनके साथ बैठे संसदीय कार्यमंत्री एम वेंकैया नायडू के पास गए। उन्होंने उन दोनों से कुछ बात की।

इसके फौरन बाद नायडू ने थरूर को इशारे से बुलाया। थरूर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ सत्ता पक्ष की अग्रिम पंक्ति में आकर बैठ गए। उस पंक्ति में लालकृष्ण आडवाणी, प्रधानमंत्री और थंबी दुरै भी बैठे विचार विमर्श कर रहे थे। ये सब लोग आपस में विचार विमर्श करते और कागज पर कुछ लिखते देखे गए जो संभवत: प्रस्ताव का प्रारूप था। इस पूरी प्रक्रिया में मुश्किल से आधा घंटा लगा। थरूर ने विपक्ष की अपनी सीट पर लौटने से पहले फिर से प्रधानमंत्री से बात की। इसके कुछ ही देर बाद लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इस प्रस्ताव को पढ़ा जिसे सदन ने सर्वसम्मति से अंगीकार कर लिया।

लोकसभा में सर्वसम्मति से अंगीकार किए गए प्रस्ताव में कहा गया है- हम इस मामले में अभियोजन में बार बार देरी और पाकिस्तान सरकार के लापरवाहीपूर्ण रवैए से चिंतित हैं जिसके कारण आरोपी आतंकवादी को जमानत मिली। हम इस घटना पर भारत के लोगों की गहरी चिंता व्यक्त करते हैं जो पेशावर में एक स्कूल में सौ से अधिक निर्दोष बच्चों व अन्य लोगों की हत्या के एक दिन बाद सामने आई है जहां उसी देश (पाकिस्तान) में एक आरोपी आतंकवादी को जमानत दे दी गई।

यह प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने पढ़ा। इसमें कहा गया कि ऐसा लगता है कि यह सबक नहीं सीखा गया कि आतंकवादियों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। सदन ने पाकिस्तान सरकार का आह्वान किया कि वह जमानत के आदेश के खिलाफ अपील की अपने घोषित इरादे के अनुरूप कारगर ढंग से आगे बढ़े। प्रस्ताव में वहां की सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि किसी भी स्थिति में ऐसे व्यक्ति को रिहा करने की इजाजत नहीं दी जाए। प्रस्ताव में कहा गया है कि हम पाकिस्तान के अपने क्षेत्र में आतंकवाद के आधारभूत ढांचे को ध्वस्त करने की जरूरत को दोहराते हैं और यह सुनिश्चित करने को कहते हैं कि उस देश में आतंकवादियों को भारत और क्षेत्र के अन्य देशों के खिलाफ दुष्ट गतिविधियों को जारी रखने के लिए खुला छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाए।

प्रस्ताव में कहा गया है कि हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि वह पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए अन्य देशों के साथ अपने संबंधों समेत अपने अख्तियार में ऐसे सभी कदम उठाए ताकि इस मामले को संतोषजनक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सके। इसके अनुसार भारत के लोग 26/11 आतंकी हमले को अंजाम देने वालों और पाकिस्तान में उनके आकाओं व सहयोगियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने को अत्यधिक महत्त्व देते हैं। लोकसभा सर्वसम्मति से मुंबई आतंकी हमले में 166 लोगों की हत्या करने के षड्यंत्रकारी जकी उर रहमान लखवी को जमानत दिए जाने के निर्णय की निंदा करती है।

कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे, भाजपा के किरीट सोमैया, माकपा के मोहम्मद सलीम , तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी, शिवसेना के अरविंद सावंत और अन्य सदस्यों ने इस विषय को शुक्रवार को सदन में उठाया और सदन से इस बारे में एक प्रस्ताव पारित करने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकसभा ने लखवी को पाकिस्तान में जमानत पर रिहा करने के बारे में एक स्वर में जो चिंता जताई और निंदा की है, सरकार की भावना सदन की भावना के अनुरूप रहेगी।

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