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भाजपा और कांग्रेस की नजर दलित वोटों पर

दलितों के मसीहा डॉ. भीमराव आंबेडकर की विरासत पर भाजपा और कांग्रेस में छिड़ी जंग के बीच केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को भारतीय संविधान के शिल्पकार की 125वीं जयंती को बड़े स्तर पर मनाने का फैसला...

केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय संविधान के शिल्पकार की 125वीं जयंती को बड़े स्तर पर मनाने का फैसला किया। वहीं कांग्रेस भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है।

दलितों के मसीहा डॉ. भीमराव आंबेडकर की विरासत पर भाजपा और कांग्रेस में छिड़ी जंग के बीच केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को भारतीय संविधान के शिल्पकार की 125वीं जयंती को बड़े स्तर पर मनाने का फैसला किया। कैबिनेट को अवगत कराया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है जो विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आंबेडकर की जयंती मनाने और उनके विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां चलाने के सुझाव देगी।

कमेटी में राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, एम वेंकैया नायडू, स्मृति ईरानी, सदानंद गौड़ा, रामविलास पासवान और सुरेश प्रभु हैं। कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आंबेडकर की विचारधारा और सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से की जा रही 16 बड़ी गतिविधियों के बारे में कैबिनेट को अवगत कराया गया। इन गतिविधियों में 197 करोड़ रुपए की लागत से 15, जनपथ में आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र की स्थापना किया जाना भी शामिल है।

प्रसाद और सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने इनकार किया कि सरकार की इस व्यापक योजना के पीछे कोई राजनीतिक लक्ष्य है। लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा जो मंगलवार को मध्य प्रदेश के महू में दलितों के मसीहा के जन्मस्थान पर आंबेडकर की जयंती से कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का आगाज करेंगे। कांग्रेस के नेता भी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने के लिए बैठक कर रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी ने कभी भी आंबेडकर का सम्मान नहीं किया। लंबे समय तक कांग्रेस के सत्ता में रहने के बावजूद न तो उन्हें भारत रत्न मिला और न संसद के भीतर उनका तैलचित्र लगाया गया। अगर आज कोई वहां (महू) जा रहा है तो मैं पूछता हूं कि उन्होंने इतने साल तक ऐसा क्यों नहीं किया? आज वे (कांग्रेस) ऐसा कर रहे हैं क्योंकि उनके पांव के नीचे की जमीन खिसक चुकी है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों दलित समुदाय तक अपनी-अपनी पहुंच बनाने के प्रयासों के तहत इस साल बड़े स्तर पर आंबेडकर की जयंती मनाने की योजना बना रही हैं। इस साल बिहार में विधानसभा चुनाव होना है और भाजपा महत्त्वपूर्ण हिंदी भाषी राज्य में अपनी बदौलत सत्ता पर कब्जा करने के लिए दलित और महादलित समुदायों को लुभाने का प्रयास कर रही है। पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तर भारत के अहम राज्यों में जातियों की बेड़ियां टूटती नजर आईं जहां दलितों के एक बड़े तबके ने भाजपा को वोट दिया।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रसाद ने कहा कि यह तथ्य पूरे राष्ट्र के सामने है कि आजादी के बाद 67 सालों में आंबडेकर को क्या सम्मान दिया गया जबकि इन 67 सालोंं में 57 साल कांग्रेस सत्ता में थी।

उन्होंने पहले अटल बिहारी वाजपेयी और बाद में नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली भाजपा नीत सरकारों की ओर से इस दलित हस्ती के सम्मान में उठाए गए कदमों को गिनाते हुए कहा कि देश की आजादी के लिए सभी ने योगदान दिया। सभी को सम्मान मिलना चाहिए। उनमें आंबेडकर ने बड़ा योगदान दिया। आंबेडकर आधुनिक भारत के प्रमाणित शिल्पी हैं। अगले साल गणतंत्र दिवस परेड में आंबेडकर पर झांकी पेश की जाएगी।

सरकार ने आंबडेकर की 125वीं जयंती मनाने के लिए जो 16 बड़े काम शुरू किए हैं उनमें उनके जन्मदिन 14 अप्रैल को राष्ट्रीय बंधुत्व भाव समरसता दिवस के रूप में मनाना, उन पर डाक टिकट और सिक्के जारी करना, 26 अलीपुर दिल्ली में 99 करोड़ रुपए की लागत से आंबडेकर स्मारक की स्थापना करना शामिल है। इस जगह आंबेडकर एक नवंबर, 1951 से छह दिसंबर, 1956 तक रहे थे। छह दिसंबर, 1956 को ही उनका निधन हो गया था।

सरकार ने जानी-मानी हस्तियों के आलेखों वाली एक पत्रिका निकालने, आंबेडकर फाउंडेशन की ओर से गठित वर्तमान आंबेडकर पीठों के 12 व्याख्यानों की शृंखला आयोजित करने, आंबेडकर से जुड़े दो महत्त्वपूर्ण स्थलों के विकास, उनके योगदान पर संगोष्ठियां आयोजित करने व सौ छात्रों को (सरकारी खर्च पर) यूनिवर्सिटी आॅफ कोलंबिया और लंदन स्कूल आॅफ इकॉनामिक्स में पढ़ने भेजने की भी योजना बनाई है। इन शिक्षा संस्थानों में आंबेडकर ने अध्ययन किया था।

प्रसाद के मुताबिक अब तक जिन गतिविधियों की योजना बनाई गई है, वे प्राथमिक योजना का हिस्सा हैं और उसे प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति के निर्देश पर विस्तारित या संशोधित किया जा सकता है। जबकि गहलोत ने इस बात पर जोर दिया कि आंबेडकर को सम्मानित करने के कार्यक्रम भाजपा के लिए कोई नई बात नहीं। जनसंघ ने 1953 में ही ऐसा किया था।

उन्होंने स्मरण किया कि जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब संविधान और उसके रचियता के सम्मान में एक बड़ी यात्रा निकाली गई थी। यह दावा करते हुए कि महू में एक स्मारक के निर्माण की पहल उसी समय की गई थी जब भाजपा राज्य में सत्तारूढ़ थी, गहलोत ने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस सत्ता में आई तब उसने इस पहल को दस साल तक रोके रखा और भाजपा के सत्ता में लौटने के बाद ही उसका निर्माण पूरा हो पाया।

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