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मसरत आलम रिहाई: भाजपा ने की निंदा, पीडीपी ने नहीं दी तवज्जो

जम्मू कश्मीर की मुफ्ती मोहम्मद सईद सरकार में गठबंधन साझेदार भाजपा ने आज कट्टरपंथी अलगाववादी नेता मसरत आलम को रिहा करने के विवादास्पद फैसले की निंदा करते हुए कहा कि पार्टी के मंत्री और विधायक मिलकर इस एकपक्षीय कदम पर पार्टी के रुख के बारे में विचार विमर्श करेंगे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद जुगल […]

Author March 8, 2015 4:39 PM

जम्मू कश्मीर की मुफ्ती मोहम्मद सईद सरकार में गठबंधन साझेदार भाजपा ने आज कट्टरपंथी अलगाववादी नेता मसरत आलम को रिहा करने के विवादास्पद फैसले की निंदा करते हुए कहा कि पार्टी के मंत्री और विधायक मिलकर इस एकपक्षीय कदम पर पार्टी के रुख के बारे में विचार विमर्श करेंगे।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी से फैसला लेने से पहले सलाह भी नहीं ली गयी। उन्होंने साल 2010 में कश्मीर में समस्या खड़ी करने के जिम्मेदार माने गये अलगाववादी नेता की रिहाई के फैसले की चारों ओर आलोचना के बीच संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस कदम में भाजपा की सहमति नहीं है। इस तरह का फैसला लेने से पहले भाजपा से सलाह नहीं ली गयी।’’

साल 2010 में कश्मीर में अशांति के दौरान 100 से अधिक लोग मारे गये थे। शर्मा ने कहा, ‘‘हमें मसरत आलम को रिहा करने से पहले पूछा नहीं गया। अगर वे हमसे पूछते, तो हम अपनी तरफ से इसकी मंजूरी नहीं देते और आज भी इस फैसले के साथ हमारी सहमति नहीं है।’’

उन्होंने फैसले की निंदा करते हुए कहा, ‘‘इस तरह के लोगों को रिहा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वे केवल भारत विरोधी जहर फैलाते हैं। अगर आप इस तरह के लोगों को बिना शर्त इस तरह छोड़ेंगे तो वे हमेशा ऐसे ही बयान देंगे।’’
अलगाववादी नेता की रिहाई पर भाजपा की आलोचना को पीडीपी ने नहीं दी तवज्जो:

अलगाववादी नेता मसर्रत आलम को रिहा करने के फैसले पर गठबंधन सरकार में सहयोगी भाजपा की आलोचना को तवज्जो नहीं देते हुए पीडीपी ने आज कहा कि जम्मू कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों को शामिल करना दोनों दलों के न्यूनतम साझा कार्यक्रम का हिस्सा है।

पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘इस रिहाई को उचित परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। राज्य में सुलह और शांति के लिए राज्य के तथा नियंत्रण रेखा के पार के सभी पक्षों को शामिल करने के हमारे न्यूनतम साझा कार्यक्रम का यह महत्वपूर्ण हिस्सा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप सभी पक्षों के साथ बातचीत करना चाहते हैं, जिनमें ये नेता भी शामिल हों, तो आप उनके खिलाफ कुछ पुख्ता नहीं होने के बाद भी जेल में रखते हुए उन्हें शामिल नहीं कर सकते।’’

अख्तर ने कहा कि कुछ नेताओं की हिरासत पर अदालतों ने हस्तक्षेप किया था और उन्हें रिहा किया था। आलम की रिहाई पर भाजपा के विरोध के बारे में पूछे जाने पर अख्तर ने कहा कि वह इस मामले में सार्वजनिक बहस में नहीं पड़ना चाहते।

उन्होंने कहा, ‘‘उनके अपने विचार हैं लेकिन मैं इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस में नहीं पड़ना चाहता। यह हमारे न्यूनतम साझा कार्यक्रम का हिस्सा है।’’

मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मर्सरत आलम को साढ़े चार साल की हिरासत के बाद कल रिहा किया गया था।

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