पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों का चुनाव प्रचार जारी है। बीजेपी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुनाव आयोग से शिकायत की है। बीजेपी ने सोमवार को चुनाव आयोग से अपील की कि वह टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव प्रचार करने से रोक दे। BJP ने उन पर पश्चिम बंगाल में लागू आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
बीजेपी ने ममता बनर्जी की शिकायत की
चुनाव आयोग को सौंपे गए एक ज्ञापन में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और किरण रिजिजू सहित बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने पश्चिम बंगाल में आदर्श आचार संहिता, चुनावी कानूनों और आपराधिक कानूनों का दुर्भावनापूर्ण और बार-बार उल्लंघन होने का हवाला दिया।
बीजेपी ने चुनाव आयोग से अपील की कि वह अपनी पूरी संवैधानिक और वैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करे और पश्चिम बंगाल में आचार संहिता का तत्काल पालन सुनिश्चित करने, मतदाता सूचियों की पवित्रता और चुनावों की गरिमा की रक्षा करने के लिए कड़े, लागू करने योग्य और उपाय अपनाए। बीजेपी ने ममता बनर्जी को चुनाव प्रचार से प्रतिबंधित करने की मांग की।
बीजेपी की ओर से चुनाव आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया, “ममता बनर्जी को चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित किया जाए। चूंकि स्थानीय पुलिस भी इस मिलीभगत में शामिल है और इसलिए अप्रभावी साबित हो रही है, ऐसे में संवेदनशील और अतिसंवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाई जाए।”
बीजेपी ने ममता के बयानों का दिया हवाला
बीजेपी ने ममता बनर्जी और टीएमसी नेताओं द्वारा कथित तौर पर किए गए उल्लंघन के उदाहरण भी पेश किए। बीजेपी ने कहा, “25 मार्च 2026 को, उत्तरी बंगाल के मैनागुड़ी में एक जनसभा के दौरान, मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर यह बयान दिया कि चुनाव के बाद नागरिकों को अपने घरों के बाहर ऐसे पोस्टर लगाने के लिए मजबूर किया जाएगा, जिन पर लिखा होगा, ‘मैं BJP का समर्थन नहीं करता।’ इस तरह की टिप्पणियां राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मतदाताओं की स्वायत्तता के लिए एक सीधा खतरा हैं। उसी दिन उन्होंने नक्सलबाड़ी में महिलाओं से आग्रह किया कि वे घर में जो कुछ भी है, उसे लेकर बाहर आएं। उनके इस बयान में एक छिपा हुआ और खतरनाक संकेत है, जो घरेलू चीज़ों को शारीरिक टकराव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए उकसाता है।”
बीजेपी ने कहा कि इन बार-बार दोहराए गए उकसावों के बाद बसंती में एक हिंसक घटना हुई, जहां बीजेपी के कार्यकर्ताओं पर (जो कानूनी और शांतिपूर्ण प्रचार में लगे थे) टीएमसी के गुंडों की भीड़ ने ममता बनर्जी के इशारे और उकसावे पर हमला कर दिया।
महुआ मोइत्रा पर भी लगाया आरोप
बीजेपी ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर भी आरोप लगाया कि 28 मार्च को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने एक भाषाई समूह या समुदाय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश की। पार्टी ने इसे भारत के नागरिकों का क्षेत्र, भाषा और समुदाय के आधार पर स्पष्ट रूप से अपमान और अवहेलना बताया। बीजेपी ने कहा कि इसका एकमात्र और दुर्भावनापूर्ण इरादा पहले से ही तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल में फूट डालना था।
बीजेपी ने कहा कि टीएमसी ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े हर एक संवैधानिक और कानूनी प्रावधान का खुलेआम और बेशर्मी से उल्लंघन किया है। बीजेपी ने यह भी कहा कि ऐसा दूषित माहौल पश्चिम बंगाल राज्य, उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उसके शांतिप्रिय लोगों के सर्वोत्तम हित में नहीं है।” बीजेपी ने राज्य में पिछले चुनावों के दौरान डर और क्रूर हिंसा का हवाला देते हुए ममता बनर्जी और टीएमसी नेताओं दोनों के खिलाफ ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (Representation of People Act) के साथ-साथ ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने ECI पर्यवेक्षकों के तौर पर और अधिक IAS और IPS अधिकारियों की तैनाती की भी मांग की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य प्रशासन और पुलिस, हिंसा या डराने-धमकाने की सभी घटनाओं के खिलाफ निष्पक्ष और निर्णायक कार्रवाई करे।
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