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बंगाल हिंसाः भाजपा कार्यकर्ता के घर पहुंचे जेपी नड्डा, बोले- घसीटकर पीटा, पत्नी के तोड़ दिए दांत

धनकड़ ने ट्वीट के जरिए बताया कि प्रधानमंत्री हालात को लेकर गंभीर हैं और उन्होंने कहा है कि जिम्मदार अथारिटीज़ को कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर जुट जाना चाहिए।

west bengal, TMC, BJPगृहमंत्रालय ने एक पत्र लिखकर राज्य प्रशासन से हिंसक वारदातों पर रिपोर्ट तलब की है। (फोटो – एएनआई)

पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद भड़की हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने राज्यपाल धनकड़ को फोन किया। वहीं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा पश्चिम बंगाल आ पहुंचे। जे पी नड्डा ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और कहा कि तृणमूल के लोगों ने भाजपा कार्यकर्ताओं को घसीट कर पीटा। इतना ही नहीं इन लोगों ने तो भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार वालों को भी नहीं बख्शा और एक कार्यकर्ता की पत्नी के दांत भी तोड़ दिए।

हिंसा में छह भाजपाइयों की मौत के आरोप लगाते हुए पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा पार्टी मंगलवार को कोलकाता आ पहुंचे। वे सीधे 24 परगना गए जहां भाजपा वर्कर हरन अधिकारी की कथित टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पिछली शाम हत्या कर दी थी। उन्होंने परिवार से मुलाकात की और मीडिया से सच्चाई उजागर करने की मांग की। उल्लेखनीय है कि भाजपा ने हिंसा के विरोध में बंगाल और पूरे देश में पांच अप्रैल को धरना देने की घोषणा भी कर रखी है।

इससे पहले दोपहर पूर्व राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने बताया कि प्रधानमंत्री ने हालात पर चिंतित होकर उन्हें फोन किया है। धनकड़ ने ट्वीट के जरिए बताया कि प्रधानमंत्री हालात को लेकर गंभीर हैं और उन्होंने कहा है कि जिम्मदार अथारिटीज़ को कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर जुट जाना चाहिए।

इस बीच गृहमंत्रालय ने एक पत्र लिखकर राज्य प्रशासन से हिंसक वारदातों पर रिपोर्ट तलब की है, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट में एक पीआइएल लगा कर मांग की है कि हिंसा की जांच की जाए।

एक अन्य घटनाक्रम के तहत इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट नाम के एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट जाकर राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग की है। उसने पिटीशन में कोर्ट से अपील की है कि घोषणा करे अदालत राज्य में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई है अतएव संविधान की धारा 356 के तहत पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए। सुप्रीम कोर्ट से यह अपील भी की गई है कि एक टीम गठित कर हिंसा में नेताओं के शामिल होने की जांच भी की जाए।

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