बीजेपी का कांग्रेसीकरण, पांच-पांच राज्यपालों ने वही किया जो कांग्रेसी करते रहे हैं: राजदीप सरदेसाई

सरदेसाई ने हालिया घटनाओं का विवरण देते हुए बताया है कि कैसे राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कांग्रेसी राज्यपालों की तरह काम किया?

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई। (twitter)

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा है कि नई कलेवर और सत्ता के रंग में रंगी बीजेपी का अब कांग्रेसीकरण हो चुका है। उन्होंने एक कॉलम में लिखा है कि बीजेपी के नेता वही कर रहे हैं जो कांग्रेस के नेता दशकों से करते आ रहे थे। उन्होंने हालिया घटनाओं का विवरण देते हुए बताया है कि कैसे राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कांग्रेसी राज्यपालों की तरह काम किया?

सरदेसाई ने साल 1998 की उस घटना की भी याद दिलाई, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी के खिलाफ खुद कलराज मिश्र धरने पर बैठे थे। तब रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त कर दिया था। इसके विरोध में बीजेपी का प्रतिनिधिमंडल लखनऊ में धरने पर बैठा था। कलराज मिश्र उसके हिस्सा थे। अब कांग्रेस के विधायकों ने उनके खिलाफ जयपुर राजभवन में धरना दिया है। हालांकि, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की मांग पर कलराज मिश्र विधानसभा का सत्र बुलाने को तैयार हो गए हैं लेकिन उन्होंने 21 दिनों के नोटिस पीरियड की शर्त रख दी है।

सरदेसाई ने लिखा है कि 21 दिन विधायकों की खरीद-फरोख्त या कांग्रेस की सरकार गिराने के लिए पर्याप्त समय है। उन्होंने लिखा है कि मिश्रा का निष्ठा संविधान में नहीं बल्कि केंद्र में है। सरदेसाई ने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए बीजेपी शासन में कई अन्य राज्यपालों का भी उदाहरण दिया है जिन्होंने बहुमत की परवाह किए बिना बीजेपी सरकारों को शपथ दिलवाई है।

साल 2017 में गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा और मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने बिना बहुमत के बीजेपी सरकारों को जल्दबाजी में शपथ दिलाई थी। साल 2018 में भी कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला जो पहले गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं, ने बीएस येदुरप्पा को बिना बहुमत के ही सरकार बनाने का न्योता दिया था। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 48 घंटे में ही यह सरकार गिर गई थी।

पिछले साल 2019 में महाराष्ट्र के गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी ने भी अहले सुबह देवेंद्र फडणवीस को सीएम पद की शपथ दिलवाई थी, जबकि उनके पास भी बहुमत नहीं था। दो दिन बाद ही फडणवीस की भी सरकार गिर गई थी।

वरिष्ठ पत्रकार ने लिखा है कि वाजपेयी-आडवाणी के दौर में मूल्य आधारित राजनीति करने वाली बीजेपी में अब ऊंचे मोल की राजनीति हो रही है। यहां राजनीतिक साजिशों के साथ कीमत जुड़ी है। उन्होंने लिखा है कि बाजेपी के नेता और उनके गवर्नर वही कृत्य कर रहे हैं जो कांग्रेस द्वारा स्थापित पुरानी परंपराएं हैं। कांग्रेस राज में भी राजभवनों का दुरुपयोग हुआ था। अब भी वही हो रहा है। यानी बीजेपी का कांग्रेसीकरण हो गया है।

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