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देवघर एम्‍स को लेकर केंद्रीय मंंत्री और भाजपा सांसद में ठनी

देवघर में एम्स किसकी कोशिश से केंद्र सरकार ने मंजूर किया? इसको लेकर भाजपा के गोड्डा लोकसभा सीट से सांसद निशिकांत दुबे और केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे के बीच आपस में भिड़ंत हो रही है।

निशिकांत दुबे और अश्विनी कुमार चौबे दोनों ही भागलपुर के लाल हैं।

देवघर में एम्स किसकी कोशिश से केंद्र सरकार ने मंजूर किया? इसको लेकर जमकर सियासत हो रही है। यह और कोई नहीं भाजपा के ही गोड्डा लोकसभा सीट से सांसद निशिकांत दुबे और हाल फिलहाल केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण राज्यमंत्री बने और बक्सर के सांसद अश्विनी कुमार चौबे के बीच आपस में भिड़ंत हो रही है। चौबे के सोमवार और मंगलवार को देवघर दौरे के बाद बयानबाजी के जरिए तू-तू – मैं – मैं और तेज हो गई है।

दरअसल केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने भागलपुर और देवघर दौरे के क्रम में देवघर एम्स की केंद्र सरकार की मंजूरी कराने का श्रेय मधुपुर विधान सभा के विधायक और झारखंड के मंत्री राज पालिवार और अर्जुन मुंडा व रघुवर दास सरकार को दिया। और प्रस्तावित एम्स स्थल का मुआयना भी किया। यह यहां के सांसद निशिकांत दुबे को नागवार गुजरा। और इन्होंने फटाफट सोशल मीडिया फेसबुक की अपनी वाल पर चार पोस्ट किए। और जमकर विरोध ही नहीं किया बल्कि खरीखोटी भी लिखकर सुनाई।

असल में गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे और बक्सर सांसद अश्विनी कुमार चौबे दोनों ही भागलपुर के लाल हैं। शुरू से विद्यार्थी परिषद व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के रास्ते ये दोनों ही भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में आए हैं। भाजपा के विजय कुमार मित्रा की मौत के बाद पांच दफा चौबे ही भागलपुर विधान सभा सीट से चुने गए और 2014 से बक्सर से सांसद है। निशिकांत दुबे बीते दो दफा से झारखंड के गोड्डा लोकसभा सीट से सांसद है। भागलपुर का भोलानाथ पुल सालों से नाक कटवा रहा है। थोड़ी सी बारिश में भी उफान खा जाता है। सोमवार की बारिश के बाद पुल के हालात की फोटो फेसबुक पर लगा निशिकांत दुबे ने करारा तंज कसा। उन्होंने लिखा कि विधायक जी व सांसद पिछले 37 वर्षों से इस पुल को बना रहे हैं। एक तरफ गोड्डा लोकसभा है जिसमें पिछले 8 साल में 10 रेलवे पुल बन रहे हैं।

उन्होंने अपनी दूसरी पोस्ट में रहिमन का दोहा लिखा- “रहिमन वहां न जाइए , जहां कपट को हेत। हम तो ढारत ढेकुली , सींचत अपनो खेत।।”  “रहिमन ओछे नरन सों , बैर भली न प्रीत। काटे चाटे श्वान के, दोऊ भांति विपरीत।।” उन्होंने आगे लिखा बाबा के दरबार में भी असत्य? मोदीजी ने बिहार झारखंड को चौबेजी के तौर पर बड़ी सौगात दी है, यह उनका सामर्थ्य तब तय करेगा यदि वे बिहार का प्रस्तावित दूसरा एम्स भागलपुर या अपने संसदीय क्षेत्र बक्सर में खुलवा दें। अन्यथा दूसरे के काम का फीता काटना आसान है।

देवघर में हवाई अड्डा भी मंजूर हुआ और बन रहा है। इस पर भी तंज कसते हुए निशिकांत दुबे ने अपनी तीसरी पोस्ट पर लिखा है कि यह एयरपोर्ट भी चौबे जी ने मंत्री राज पालिवार जी से मिलकर कराया, बधाई। और साथ ही ऊपर लिखे रहिमन के दोहे को फिर उद्धरित किया। मालूम रहे कि राज पालिवार से भी निशिकांत दुबे का छत्तीस का आंकड़ा है।

दिलचस्प बात है कि बीते 40 सालों से बन रही बटेश्वर स्थान गंगा पंप नहर परियोजना का बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भागलपुर के कहलगाँव आकर उदघाट्न करने वाले हैं। निशिकांत दुबे ने अपनी चौथी पोस्ट में इस बाबत प्रकाशित इश्तहार की फोटो भी लगाई है और ताना कसते हुए लिखा है कि गंगा गोड्डा आने की तैयारी तो अश्विनी चौबे जी की कृपा से ही हो रहा है। लेकिन भूलवश शिलापट्ट पर उनका नाम छूट गया है। बिहार सरकार को भूल सुधार करना चाहिए।

प्रकाशित विज्ञापन में भागलपुर जिले से जुड़े सांसद , राज्यसभा सदस्य, विधायक, विधान पार्षद बिहार के जल संसाधन मंत्री और मुख्यमंत्री का नाम है। इससे यह जाहिर होता है कि सोशल मीडिया पर या अखबारों के जरिए भारतीय जनता पार्टी के छुटभय्यै कार्यकर्ता ही नहीं केंद्र और राज्य में बैठे संसद और विधायक तक आपसी सिरफूडब्बल में लगे हैं। जिसका आम नागरिकों में अच्छा संदेश नहीं जा रहा है। और भाजपा के मिशन 2019 को धक्का लग रहा है। अपना नाम न छापने की शर्त पर कई भजपाईयों ने ऐसी परंपरा को गलत बताया।

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