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BJP ने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए बनाई रणनीति, राज्यसभा सदस्य को 2014 में हारी हुई सीटों को गोद लेने को कहा

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा सदस्यों से मुलाकात में कहा कि हर सदस्य ऐसी एक-एक लोकसभा सीट गोद लें जहां पिछले चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
Author नई दिल्ली | August 31, 2016 22:12 pm
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह।

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अभी से तैयारियों शुरू कर दी है। बीजेपी ने हारी हुई सीटों को लेकर नई रणनीति बनाई है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा सदस्यों से मुलाकात में कहा कि हर सदस्य ऐसी एक-एक लोकसभा सीट गोद लें जहां पिछले चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि संसद में इसके प्रतिनिधि की तरह क्षेत्र की देखभाल करें शाह ने भाजपा के सभी 52 राज्यसभा सांसदों के साथ बैठकर निर्देश जारी किया।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘अमित शाह ने राज्यसभा सदस्यों से एक-एक लोकसभा क्षेत्र अपनाने और उसकी देखभाल वहां से लोकसभा सदस्य की तरह करने को कहा जहां पार्टी 2014 में हार गई थी। इससे पार्टी को वहां जीतने में मदद मिलेगी। उन्होंने सांसदों से कहा कि अपने एमपीलैड (MPLAD funds) का धन वहां भी खर्च करें और संगठन के विस्तार के लिए काम करें।’ बता दें कि संसद के दोनों सदनों के सदस्य को MPLAD funds के रूप में 5 करोड़ रुपए मिलता है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्यों को पार्टी के आधार और विचार को बढ़ाने के लिए भी काम करना चाहिए।’’पार्टी ने जहां लगातार इसके लोकसभा सदस्यों द्वारा उसके विकास और संगठन के एजेंडा पर काम करने पर जोर दिया है वहीं इस तरह की धारणा है कि राज्यसभा सदस्यों की इस कवायद में अधिक हिस्सेदारी नहीं रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के मुख्यमंत्रियों और राज्यों के वरिष्ठ पार्टी नेताओं से मुलाकात की थी। मुलाकात के दौरान उनसे सरकार की गरीब हितैषी नीतियों को सफल बनाने के लिए, संगठन और इसके वैचारिक प्रभाव का विस्तार करने के लिए अतिरिक्त समय तक काम करने को कहा था। वहीं पार्टी अध्यक्ष शाह ने कहा था, ‘भाजपा ने देश में काम काज की राजनीति का अध्याय शुरू किया है। भाजपा की प्रदेश सरकारें सिर्फ अपने काम काज के आधार पर बार-बार चुनी गयीं हैं। यह केन्द्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि हम साथ मिलकर गरीबों के लिए कल्याणकारी राज्य बनाएं और आम जनता के जीवन को बदलें।’

 

 

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