बीजेपी मणिपुर में सरकार बनाने की तैयारियों में जुट गई है। पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को विधायक दल का नेता चुनने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन 12 फरवरी को खत्म होने जा रहा है।
बीजेपी ने अपने 20 से ज्यादा विधायकों और सहयोगी दलों के विधायकों को भी रविवार को दिल्ली बुलाया था। इन विधायकों में बीजेपी के अलावा नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के नेता शामिल थे। पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही कोई बेहतर नतीजा सामने आएगा।
इन कदमों से पता चलता है कि बीजेपी राज्य में फिर से अपनी अगुवाई वाली एनडीए की सरकार का गठन करना चाहती है।
फरवरी, 2025 में लगा था राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में फरवरी, 2025 में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था और विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था। राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अगस्त 2025 में राष्ट्रपति शासन को और छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया था।
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले चार महीनों में पार्टी के और सहयोगी दलों एनपीपी और एनपीएफ के विधायकों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं ताकि इस बात का आकलन किया जा सके कि सरकार गठन के लिए हालात अनुकूल हैं या नहीं।
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जातीय हिंसा से जूझ रहा मणिपुर
मणिपुर की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मार्च, 2027 तक है। मई, 2023 से ही मणिपुर मैतेई और कुकी-जो समूहों के बीच जारी जातीय हिंसा से जूझ रहा है। इस हिंसा में अब तक 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोगों को अपने घरों से बेदखल होना पड़ा है।
एनडीए के पास है स्पष्ट बहुमत
60 सदस्यों वाली मणिपुर की विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 31 विधायक चाहिए। बीजेपी के पास 37 विधायक हैं जबकि उसके सहयोगी दलों एनपीपी और एनपीएफ के पास क्रमशः 6 और 5 विधायक हैं। इस तरह एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है। माना जा रहा है कि मणिपुर में जल्द ही सरकार का गठन हो सकता है।
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