पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आएंगे। थोड़ी ही देर में वोटों की गिनती शुरू होगी। भवानीपुर विधानसभा सीट पूरे चुनाव के दौरान चर्चा में बनी रही। यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही है तो वहीं उनके सामने बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी मैदान में हैं। भवानीपुर में वोटों की गिनती के लिए सखावत मेमोरियल स्कूल को काउंटिंग सेंटर बनाया गया और यहीं पर वोटों की गिनती होगी। आज सुबह ही काउंटिंग सेंटर पर टीएमसी और बीजेपी के काउंटिंग एजेंट भिड़ गए।

टीएमसी एजेंट ने लगाए आरोप

कहासुनी पर टीएमसी कार्यकर्ता ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “बीजेपी के लोग हमें फाइलें या कलम अंदर ले जाने नहीं दे रहे हैं, लेकिन भाजपा के चुनाव एजेंटों को अंदर ले जाने की अनुमति है। नियम सबके लिए समान होने चाहिए। हम ममता बनर्जी के लोग हैं। इससे बड़ी कोई पहचान नहीं है।”

भाजपा बंगाल और भवानीपुर में जीत रही- भाजपा काउंटिंग एजेंट

वहीं भाजपा के एक काउंटिंग एजेंट ने कहा, “इनके (टीएमसी) पास पहचान पत्र नहीं हैं। हमारे पास पहचान पत्र हैं। ये लोग बेवजह हंगामा कर रहे हैं। भाजपा पश्चिम बंगाल और यहां तक ​​कि भवानीपुर में भी बहुमत से जीत रही है।”

टीएमसी का गढ़ है भवानीपुर

भवानीपुर टीएमसी का गढ़ है। 2011 से यहां टीएमसी हारी नहीं है। 2011 और 2016 में ममता बनर्जी खुद यहां से चुनाव जीत गईं। 2021 में जब नंदीग्राम से उन्हें हार नसीब हुई, उसके बाद उपचुनाव में उन्होंने 58 हजार वोटों से जीत हासिल की। वहीं 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने भवानीपुर को 28 हजार से अधिक वोटों से जीता था। 

क्या है जातीय समीकरण?

भवानीपुर के अगर हम जातीय समीकरण की बात करें तो यहां पर 42 फ़ीसदी मतदाता बंगाली हिंदू जबकि 34 फ़ीसदी गैर बंगाली हिंदू और 24 फ़ीसदी मुस्लिम हैं। भवानीपुर में 10 फीसदी मारवाड़ी, 8 फीसदी ब्राह्मण और करीब 26 फीसदी कायस्थ मतदाता रहते हैं। भवानीपुर विधानसभा में करीब 15 से 17 हजार गुजराती वोटर हैं, जो इस बार के विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वहीं क्षेत्र में गैर बंगाली वोटरों में बिहारी, मराठी, ओड़िया, मारवाड़ी और उत्तर भारतीय वोटर भी शामिल हैं।