राजनीति में सब जायज़! बीटीपी को हराने के लिए एक ख़ेमे में बीजेपी और कांग्रेस

डुंगरपुर जिला प्रमुख की सीट पर बीटीपी को रोकने के लिए साथ आईं भाजपा-कांग्रेस, बीटीपी के संस्थापक छोटूभाई वसावा ने ट्वीट में कहा, "बीटीपी नेक है, इसलिए कांग्रेस-भाजपा एक हैं।"

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र जयपुर | December 11, 2020 8:29 AM
Rajasthan, Zila Parishadराजस्थान में पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई है। (फोटो- PTI)

राजनीति में एक-दूसरे की कट्टर विरोधी मानी जाने वाली भाजपा और कांग्रेस ने राजस्थान जिला परिषद चुनाव में प्रमुख पद के लिए खड़े हुए एक तीसरी पार्टी के उम्मीदवार को रोकने के लिए हाथ मिला लिया। डुंगरपुर जिले में भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) द्वारा समर्थित प्रत्याशी को अपने अस्तित्व पर खतरा मानते हुए दोनों पार्टियों ने साथ आने का निर्णय लिया है।

इसकी एक वजह यह रही कि हालिया जिला परिषद चुनाव में बीटीपी ने 27 निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया था, इनमें से 13 ने जीत हासिल की थी। जबकि भाजपा को 8 और कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। ऐसे में जिला प्रमुख पद पर बीटीपी के जीतने के सबसे ज्यादा मौके थे। जहां, बीटीपी समर्थित सभी 13 जिला परिषद सदस्यों ने अपनी उम्मीदवार पार्वती डोडा का समर्थन किया, वहीं भाजपा-कांग्रेस के सदस्यों ने भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सूर्य अहरी के पक्ष में वोट किए, ताकि बीटीपी को जिला प्रमुख पद पर पहुंचने से रोका जा सके।

बताया गया है कि सूर्य अहरी खुद आदिवासी हैं और 12वीं तक पढ़ाई कर चुकी हैं। वे डुंगरपुर के गलियाकोट पंचायत समिति की पूर्व प्रधान रही हैं। जिला परिषद के प्रमुख पद के लिए उन्हें भाजपा और कांग्रेस की वजह से 14 वोटों के साथ बहुमत मिला, जबकि उनके खिलाफ खड़ीं बीटीपी समर्थित पार्वती डोडा एक वोट से पिछड़ गईं।

बीटीपी के संस्थापक छोटूभाई वसावा ने ट्वीट में कहा, “बीटीपी नेक है, इसलिए कांग्रेस-भाजपा एक हैं।” उन्होंने तंज कसते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नए गठबंधन के लिए बधाई दी। बता दें कि बीटीपी के राजस्थान के डुंगरपुर से ही दो विधायक हैं, जो कि राज्य में गहलोत सरकार का समर्थन करते हैं।

बता दें कि गुरुवार को घोषित हुए 21 जिलों के जिला परिषद चुनाव के नतीजों में भाजपा को 353 और कांग्रेस को 252 सीटों पर जीत मिली। इस बेहतरीन प्रदर्शन की दम पर भाजपा के 12 जिला प्रमुख बने थे, जबकि कांग्रेस को पांच जिला प्रमुख पदों से ही संतोष करना पड़ा है। अब तक सिर्फ एक झालावाड़ जिले में जिला प्रमुख पद का फैसला नहीं हुआ है। यहां भाजपा ने 27 में से 19 सीटें हासिल की हैं। हालांकि, एक बूथ पर दोबारा मतदान के चलते जिला प्रमुख का चुनाव शुक्रवार को रखा गया है।

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