अमित शाह को क्लीनचिट देने वाले जज साहब बन गए गवर्नर, बोले गौरव वल्लभ, भाजपा प्रवक्ता ने कहा- हिसाब करने इटली जाते हैं राहुल

गौरव वल्लभ ने राफेल सौदे को लेकर कहा कि आखिर जिस कंपनी को प्रधानमंत्री ने भ्रष्ट कंपनी कहा, अमित शाह ने बोगस कहा, मनोहर पर्रिकर ने करप्ट कहा, उसपर से बैन क्यों हटाया गया।

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भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह और कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ(फोटो सोर्स: यूट्यूब वीडियो ग्रैब)।

राफेल डील में कथित घूसखोरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी को लेकर एक निजी न्यूज चैनल पर डिबेट के दौरान भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह और कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। भाजपा द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर गौरव वल्लभ ने कहा कि अगर सबूत हैं तो तत्काल एफआईआर दर्ज करवाए भाजपा।

उन्होंने कहा, “आखिर सीबीआई को आप क्यों चुप करा के बैठे हो। आपके पास कोई प्रूफ है तो जाइए शिकायत दर्ज करवाइए।” गौरव ने कहा कि बार-बार भाजपा प्रवक्ता कोर्ट की बात कर रहे हैं, मैं कहना नहीं चाहता था लेकिन जिस व्यक्ति ने उन्हें कोर्ट से क्लीन चिट दी, वो जज साहब आज इन्हीं के टिकट से राज्यसभा में बैठे हैं।

गौरव वल्लभ ने कहा, “अमित शाह को जिन्होंने क्लीन चिट दी, वो जज साहब केरल के गवर्नर बना दिए गए।” वहीं उन्होंने राफेल सौदे को लेकर कहा कि आखिर जिस कंपनी को प्रधानमंत्री ने भ्रष्ट कंपनी कहा, अमित शाह ने बोगस कहा उसपर से बैन क्यों हटाया गया? मोदी जी इटली जाकर आए और अगस्ता वेस्टलैंड जैसी भ्रष्ट कंपनी के ऊपर से बैन हटा दिया। आखिर क्या रिश्ता है।

कांग्रेस प्रवक्ता के तमाम आरोपों पर आरपी सिंह ने कहा, “मोदी जी तो सरकारी तौर पर गए थे लेकिन राहुल गांधी निजी तौर पर इटली गए हैं। वो बताएं कि इन दिनों किस-किस से हिसाब किताब ठीक करने गए हैं।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस को न्यायपालिका पर विश्वास नहीं है। राम मंदिर से लेकर राफेल के मामले में ज्यूडिशरी पर सवाल खड़े करते हैं। जब अदालत इनके कान खींचती हैं तो माफी मांग लेते हैं।

बता दें कि राफेल डील को लेकर एक फ्रेंच मैगजीन ने दावा किया है कि सीबीआई और ईडी को बिचौलिये के घूस लेने की जानकारी थी। इस घूस में 65 करोड़ रुपये दिए गए थे। रविवार को एक फ्रांसीसी ऑनलाइन पत्रिका मीडियापार्ट ने फेक इनवॉयस जारी करते हुए दावा किया कि फ्रांसीसी विमान निर्माता डसॉल्ट एविएशन ने भारतीय बिचौलिए को लड़ाकू विमान की डील के लिए कम से कम 65 करोड़ रुपये दिए। जिससे कंपनी, भारत के साथ 36 राफेल का सौदा हासिल कर सके।

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