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भाजपा नेता ने महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संग्राम को बताया ‘ड्रामा’, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े बोले- देश में ऐसे लोगों को महात्मा कैसे कहा जा सकता है

भाजपा सांसद ने कहा, 'इन तथाकथित नेताओं में से किसी की पुलिस ने एक बार भी पिटाई नहीं की थी। उनका स्वतंत्रता आंदोलन एक नाटक था। अंग्रेजों की सहमति से स्वंत्रता आंदोलन किया गया। वो कोई वास्तविक लड़ाई नहीं थी। यह तो सामंजस्य वाला स्वतंत्रता आंदोलन था।'

anant kumar hegdeपूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद अनंतकुमार हेगड़े। (PTI)

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनंतकुमार हेगड़े अपने बयानों के चलते एक बार फिर सुर्खियों में बने हुए हैं। सांसद ने इस बार स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाले महत्मा गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि गांधी के नेतृत्व में किया गया स्वतंत्रता संग्राम एक ‘ड्रामा’ था। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उत्तर कन्नड़ से छह बार के सांसद ने यह सवाल भी उठाया कि भारत में ‘ऐसे लोगों’ को ‘महात्मा’ कैसे कहा जाता है। उन्होंने कहा कि पूरे स्वतंत्रता आंदोलन का ‘अंग्रेजों की सहमति और समर्थन के साथ’ मंचन किया गया था।

भाजपा सांसद ने कहा, ‘इन तथाकथित नेताओं में से किसी की पुलिस ने एक बार भी पिटाई नहीं की थी। उनका स्वतंत्रता आंदोलन एक नाटक था। अंग्रेजों की सहमति से स्वंत्रता आंदोलन किया गया। वो कोई वास्तविक लड़ाई नहीं थी। यह तो सामंजस्य वाला स्वतंत्रता आंदोलन था।’

वरिष्ठ भाजपा नेता आगे यह भी कहा कि महात्मा गांधी द्वारा भूख हड़ताल और सत्याग्रह महज एक ड्रामा था। कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का समर्थन करने वाले लोग कहते हैं कि भारत को आजादी आमरण अनशन और सत्याग्रह के कारण मिली। मगर यह सच नहीं है। सत्याग्रह के कारण अंग्रेजों ने देश नहीं छोड़ा था।’

इसी बीच कर्टनाक में भाजपा ने सांसद के बयानों से दूरी बना ली है। पार्टी का कहना है कि वो हेगड़े के बयान का समर्थन नहीं करती। कर्टनाक भाजपा प्रवक्ता जी मधुसुधन ने कहा कि आरएसएस महात्मा गांधी का सम्मान करता है और इस तरह की टिप्पणियों का समर्थन नहीं करता है।

वहीं पूर्व की कर्नाटक सरकार में मंत्री रहे और कांग्रेस विधायक प्रियांक खड़गे ने हेगड़े पर निशाना साधते हुए कहा वो इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी कर सुर्खियों में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो अब मंत्री नहीं है। वो अब चलन से बाहर हो गए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रभावित करने की कोशिश में हैं।

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