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बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की कही इन 10 बातों में आपका जीवन बदलने की ताकत

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे पहले लोकप्रिय नेता कहे जाने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और अपने नाम भर से ही अंग्रेजों की बेचैनी बढ़ाते रहे अमर शहीद पंडित चंद्रशेखर 'आजाद' की जीवनी भारतीय जनमानस में हर स्वंत्रता दिवस की वर्षगांठ या उनके जन्मदिन पर पढ़ी जाती है, जन सभाएं होती हैं, कार्यक्रम होते हैं लेकिन देश की इन दो महान विभूतियों की कही बातें अगर आज की पीढ़ी 1 फीसदी भी जीवन में उतार पाए तो न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि, देश और दुनिया का भला होगा, क्योंकि किसी भी देश की सफलता उसमें रह रहे सफल व्यक्तित्वों में निहित होती है।

लोकमान्य बालगंगाधर तिलक और पंडित चंद्रशेखर ‘आजाद’। (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

23 जुलाई का मतलब महज अंग्रेजी कलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि यह दो महान स्वतंत्रता सेनानियों का जन्मदिन होता है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे पहले लोकप्रिय नेता कहे जाने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और अपने नाम भर से ही अंग्रेजों की बेचैनी बढ़ाते रहे अमर शहीद पंडित चंद्रशेखर ‘आजाद’ की जीवनी भारतीय जनमानस में हर स्वंत्रता दिवस की वर्षगांठ या उनके जन्मदिन पर पढ़ी जाती है, जन सभाएं होती हैं, कार्यक्रम होते हैं लेकिन देश की इन दो महान विभूतियों की कही बातें अगर आज की पीढ़ी 1 फीसदी भी जीवन में उतार पाए तो न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि, देश और दुनिया का भला होगा, क्योंकि किसी भी देश की सफलता उसमें रह रहे सफल व्यक्तित्वों में निहित होती है। महाराष्ट्र के रत्नीगिरी के चिखाली गांव में 23 जुलाई 1856 को जन्मे बाल गंगाधर तिलक का नारा “स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिळवणारच, जिसका हिंदी में अर्थ होता है- स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा”, देशवासियों की धमनियों में लहू बनकर ऐसा दौड़ा कि उसका नतीजा आजाद भारत के तौर पर सामने आया, वहीं मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाके भाबरा में जन्मे चंद्रशेखर को आजादी के संघर्ष के दौरान महज 15 वर्ष की उम्र में जज के सामने पेश होना पड़ा तो उनके बयान ने उन्हें नया नाम दिया- ”मेरा नाम आजाद, मेरे पिता का नाम स्वाधीन, और मेरा घर जेल है।” इन दोनों महापुरुषों की कुछ बातें हम यहां पेश कर रहे हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं और हमेशा रहेंगी।

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक (23 जुलाई 1856 – 1 अगस्त 1920)

”स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।”

”प्रगति स्वतंत्रता में निहित है। बिना स्वशासन के न औद्योगिक विकास संभव है, न ही राष्ट्र के लिए शैक्षिक योजनाओं की कोई उपयोगिता है। देश की स्वतंत्रता के लिए प्रयत्न करना सामाजिक सुधारों से अधिक महत्वपूर्ण है।”

”यदि भगवान छुआछूत को मानता है तो मैं उसे भगवान नहीं कहूंगा।”

”भूविज्ञानी पृथ्वी का इतिहास वहां से उठाते हैं जहां से पुरातत्वविद् इसे छोड़ देते हैं और उसे और भी पुरातनता में ले जाते हैं।”

”धर्म और व्यावहारिक जीवन अलग नहीं हैं। सन्यास लेना जीवन का परित्याग करना नहीं है। असली भावना सिर्फ अपने लिए काम करने की बजाये देश को अपना परिवार बना मिलजुल कर काम करना है। इसके बाद का कदम मानवता की सेवा करना है और अगला कदम ईश्वर की सेवा करना है।”

पंडित चन्द्रशेखर ‘आजाद’ (23 जुलाई 1906 – 27 फरवरी 1931)

”मेरा नाम आजाद, मेरे पिता का नाम स्वाधीन, और मेरा घर जेल है।”

”भले ही मेरा प्रारम्भिक जीवन आदिवासी इलाके में बीता है , लेकिन मेरे दिल में मातृभूमि ही बसती है।”

”एक विमान जब तक जमीन पर है वह सुरक्षित रहेगा, लेकिन विमान जमीन पर रखने के लिए नहीं बनाया जाता , बल्कि ये हमेशा महान ऊंचाइयों को हासिल करने के लिए जीवन में कुछ सार्थक जोखिम लेने के लिए बनाया जाता है।”

”ऐसी जवानी किसी काम की नहीं, जो अपनी मातृभूमि के काम न आ सके।”

”दूसरों को अपने आप से आगे बढ़ते हुए न देखो। हर दिन अपने आप के कीर्तिमान को तोड़ो, क्योंकि सफलता आपकी अपनी खुद की लड़ाई है।”

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