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त्रिपुरा: बिप्‍लब देब की भाजपा सरकार लाई ऐसी योजना कि राज्‍य छोड़ भागने लगे किसान

लगभग 80 युवा दूसरी नौकरी की तलाश में चेन्नई और बेंगलुरू जा चुके हैं। एक स्थानीय निवासी का कहना है कि पूर्ववर्ती लेफ्ट सरकार ने कभी भी भांग के उत्पादन के खिलाफ एक्शन नहीं लिया था और इसलिए कई गांव में यह समझा जाता था कि इसका उत्पादन वैध है।

Author August 25, 2018 8:23 AM
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

देबराज देब
त्रिपुरा में बहुत से किसान और युवा अपना राज्य छोड़कर काम की तलाश में दूसरे राज्य जाने के लिए मजबूर हो चुके हैं। त्रिपुरा में मुख्यमंत्री बिप्लब देब के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार द्वारा भांग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। राज्य सरकार लगातार ही भांग और गांजे को लेकर कठोर होती जा रही है, जिसके कारण इसकी खेती करने वाले किसानों के ऊपर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में किसान रोजगार की तलाश में त्रिपुरा छोड़कर जाने पर मजबूर हो गए हैं।

त्रिपुरा को नॉर्थईस्ट का भांग कॉरिडोर भी कहा जाता है। यहीं से बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और यहां तक कि बांग्लादेश में भी भांग पहुंचाई जाती है। चुनाव से पहले बीजेपी के विजन डॉक्यूमेंट में यह वादा किया गया था कि ड्रग के व्यापार के खिलाफ सरकार कड़े कदम उठाएगी। 9 मार्च को त्रिपुरा में बीजेपी और आईपीएफटी की सरकार बनने के साथ ही गांजे के व्यापार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई। सीएम बिप्लब देब ने कहा था कि त्रिपुरा में पिछले 25 सालों से हर साल एक लाख किलोग्राम भांग का उत्पादन होता है।

उन्होंने पूर्ववर्ती लेफ्ट की सरकार पर आरोप लगाया था कि यहां सरकार द्वारा भांग की खेती को बढ़ावा दिया जाता रहा था, जिसके कारण से यहां के युवा अवैध ड्रग व्यापार की तरफ बढ़ते चले गए। आपको बता दें कि मार्च के बाद से करीब पांच महीने के अंदर पुलिस द्वारा लगभग 20,000 किलो गांजा सीज किया जा चुका है।

राज्य सरकार द्वारा लगातार कड़े कदम उठाए जाने के कारण गांजे पर निर्भर रहने वाले बहुत से परिवारों के ऊपर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कमलनगर और कमलचौरा के लगभग 80 युवा दूसरी नौकरी की तलाश में चेन्नई और बेंगलुरू जा चुके हैं। एक स्थानीय निवासी का कहना है कि पूर्ववर्ती लेफ्ट सरकार ने कभी भी भांग के उत्पादन के खिलाफ एक्शन नहीं लिया था और इसलिए कई गांव में यह समझा जाता था कि इसका उत्पादन वैध है। बता दें कि त्रिपुरा के कई स्थानों में लोगों द्वारा भांग के उत्पादन को कानूनी मान्यता देने की मांग की जा रही है।

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