अब इन सेवाओं से जुड़े लोग नहीं कर पाएंगे हड़ताल, संसद में पास हुआ बिल, विपक्ष बोला- तानाशाही

विपक्ष ने विधेयक को “कठोर” बताया और कहा कि यह कर्मचारियों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ विरोध करने से वंचित करेगा।

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विपक्ष के विरोध के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, कर्मचारियों को विश्वास में लेकर विधेयक तैयार किया गया है। (फोटो- पीटीआई)

संसद के चालू मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे और विरोध के बीच लोकसभा ने मंगलवार को दो विधेयक, न्यायाधिकरण सुधार विधेयक 2021 और आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021 पारित कर दिए। इसके बाद दोनों सदनों को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया है।

आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक को बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से पारित कर दिया गया, हालांकि विपक्ष ने विधेयक को “कठोर” बताया और कहा कि यह कर्मचारियों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ विरोध करने से वंचित करेगा। सदन में मौजूद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने इसे पारित करने से पहले सभी कर्मचारी संघों को विश्वास में लिया था।

संसद ने मंगलवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2021 को राज्यसभा से पारित होने के साथ ही मंजूरी दे दी। इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र से मुकाबला करने के लिए विपक्षी एकता समय की जरूरत है। इससे पहले आज, संसद में मौजूदा गतिरोध को दूर करने के लिए रणनीति बनाने के लिए 17 विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक नाश्ते पर बुलाई गई थी। इस दौरान कुछ दलों ने संसद परिसर के बाहर मॉक सेशन आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा।

आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक का उद्देश्य सरकारी आयुध कारखानों के कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने से रोकना है। देश भर में 41 आयुध कारखानों में लगभग 70,000 लोग काम करते हैं।

इससे पहले गुरुवार को पेश किए गए विधेयक में उल्लेख किया गया है कि विधेयक का मतलब “आवश्यक रक्षा सेवाओं के रखरखाव को बनाए रखना है ताकि राष्ट्र की सुरक्षा और बड़े पैमाने पर जनता के जीवन और संपत्ति को सुरक्षित किया जा सके।”

भारतीय आयुध कारखाने सबसे पुराना और सबसे बड़ा औद्योगिक सेटअप है जो रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के तहत कार्य करता है। आयुध कारखाने रक्षा हार्डवेयर और उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन के लिए एक एकीकृत आधार बनाते हैं, जिसका प्राथमिक उद्देश्य सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक युद्धक्षेत्र उपकरणों से लैस करना है।

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