बिकरू कांड में शामिल अमर दुबे की पत्नी ने थानेदार से पूछा ऐसा सवाल, सिर झुका खड़े रहे दारोगा

जब बोर्ड ने पुलिस से खुशी दुबे के साथ नाबालिग होने के बाद भी बालिग जैसा व्यवहार करने का सवाल किया तो पुलिस से जवाब देते नहीं बना। जिसके बाद पुलिस की ओर से अजीब तर्क दिए जाने लगे।

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बिकरू कांड में यूपी पुलिस के 8 कर्मियों की हत्या कर दी गयी थी। (एक्सप्रेस फोटो)।

फर्जी दस्तावेज की मदद से सिम कार्ड लेने के मामले में बिकरू कांड आरोपी अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे को पुलिस द्वारा किशोर न्याय बोर्ड में पेश किया गया। कोर्ट में बचाव पक्ष ने कहा कि मामले में एसआईटी रिपोर्ट नहीं दी गयी है। जिसके बाद बोर्ड ने खुशी दुबे का बयान दर्ज किया और अगली सुनवाई के लिए तारीख दे दी।

पुलिस ने अमर दुबे की पत्नी पर फर्जी दस्तावेज की मदद से सिम लेने का मुकदमा दर्ज किया था। जब बोर्ड ने पुलिस से खुशी दुबे के साथ नाबालिग होने के बाद भी बालिग जैसा व्यवहार करने का सवाल किया तो पुलिस से जवाब देते नहीं बना। जिसके बाद पुलिस की ओर से अजीब तर्क दिए जाने लगे।

बोर्ड के सामने खुशी दुबे ने पुलिस से पूछा, ‘मुझे छोड़ने की बात कही गयी थी लेकिन मेरी जिंदगी बर्बाद की जा रही है। पुलिस चुप क्यों है?’ इस बात का जवाब पुलिस से देते नहीं बना और दारोगा सिर झुकाए सब सुनते रहे। बता दें कि मामले में खुशी दुबे का दावा है कि वह निर्दोष है और पुलिस की ओर से उसे फंसाया जा रहा है।

मालूम हो कि पिछले साल 2 जुलाई की आधी रात को बिकरू गांव में गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने डीएसपी और एसओ समेत 8 पुलिसकर्मियों को शहीद कर दिया था। एक-एक पुलिसकर्मी को दर्जनों गोलियां मारी गयी थीं। जिसके बाद पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर आठ दिन के भीतर विकास दुबे समेत छह बदमाशों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।

इस समय मामले में 45 आरोपी जेल में बंद हैं। केस का ट्रायल जारी है। दो जुलाई 2020 की रात को चौबेपुर के जादेपुरधस्सा गांव निवासी राहुल तिवारी ने विकास दुबे व उसके साथियों पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। एफआईआर दर्ज करने के बाद उसी रात करीब साढ़े बारह बजे तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र कुमार मिश्रा के नेतृत्व में बिकरू गांव में दबिश दी गई।

यहां पर पहले से ही विकास दुबे और उसके गुर्गे घात लगाए बैठे थे। घर पर पुलिस को रोकने के लिए जेसीबी लगाई थी। पुलिस के पहुंचते ही बदमाशों ने उनपर छतों से गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं। चंद मिनटों में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर बदमाश फरार हो गए थे।

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