चुनाव आयोग के द्वारा बुधवार को देशभर के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के ऐलान के साथ ही बिहार में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बिहार में 5 सीटों पर चुनाव होना है। इन 5 सीटों के लिए बिहार में किस तरह के चुनावी समीकरण बन रहे हैं, आइए इन पर बात करते हैं।

बिहार की पांच में से तीन सीटें राज्य सरकार की अगुवाई कर रही एनडीए के पास हैं और जिस तरह का शानदार प्रदर्शन एनडीए ने कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में किया है, उससे माना जा रहा है कि वह बची हुई दो सीटों पर भी कब्जा कर सकता है। अभी यह दोनों सीटें मुख्य विपक्षी दल आरजेडी के पास हैं।

चुनाव आयोग के द्वारा जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक, नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होगी और 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होगा।

एनडीए के पास जो तीन सीटें हैं, उनमें से दो सीटें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पास हैं और इन सीटों से ‘भारत रत्न’ कर्पूरी ठाकुर के पुत्र और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर तथा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह सांसद हैं। दोनों ही नेताओं का राज्यसभा में लगातार दूसरा कार्यकाल चल रहा है।

आरसीपी सिंह को देना पड़ा था इस्तीफा

गौरतलब है कि जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कुछ साल पहले पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को लगातार तीसरा कार्यकाल देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद आरसीपी सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। जेडीयू ने उस समय तर्क दिया था कि पार्टी की यह नीति है कि किसी भी नेता को लगातार दो से अधिक कार्यकाल के लिए राज्यसभा नहीं भेजा जा सकता। हालांकि इस बार क्या होगा, इसे लेकर कुछ साफ नहीं है। अगर जेडीयू इसी नीति का पालन करती है तो दोनों मौजूदा सांसदों को अपने पदों से हटना पड़ेगा।

कुशवाहा को मिलेगा मौका?

एनडीए की तीसरी सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के पास है। उपेंद्र कुशवाहा बीजेपी के समर्थन से उपचुनाव जीतकर राज्यसभा पहुंचे थे। यह उपचुनाव विवेक ठाकुर के लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद हुआ था। हालांकि, कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा एनडीए की अहम सहयोगी है और कोइरी जैसे प्रभावशाली पिछड़े वर्ग के वोटों का उसके साथ होने का दावा करती है।

एनडीए के सूत्र मानते हैं कि उपेंद्र कुशवाहा को पर्याप्त राजनीतिक फायदा मिल चुका है। उनके पुत्र दीपक प्रकाश को विधायक या विधान परिषद सदस्य न होते हुए भी राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिल चुकी है। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में कुशवाहा की पार्टी के पास केवल चार विधायक हैं, जिनमें दीपक प्रकाश की मां स्नेहलता भी शामिल हैं। ऐसे में उन्हें जेडीयू और बीजेपी जैसे बड़े सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर रहना होगा।

बाकी दो सीटें आरजेडी के पास हैं, जिसके पास अब केवल 25 विधायक रह गए हैं। यह आंकड़ा राज्यसभा सीट जीतने के लिए जरूरी संख्या बल से काफी कम है। आरजेडी के एक राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता हैं जो पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के करीबी हैं। गुप्ता का यह लगातार पांचवा कार्यकाल है।

दूसरी सीट से सांसद पटना के कारोबारी अमरेंद्र धारी सिंह हैं, जिनकी भूमिहार जाति के मतदाताओं में मजबूत पकड़ मानी जाती है। राज्यसभा चुनाव के मौजूदा गणित के अनुसार, एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 40 वोटों की जरूरत होगी।

पिछले नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटें मिली थीं, जबकि आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन को कुल मिलाकर 35 सीटों पर ही सिमटना पड़ा था।

नितिन नवीन जा सकते हैं राज्यसभा

राज्यसभा की जिन पांच सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से कोई भी बीजेपी के पास नहीं है, जबकि 89 विधायकों के साथ वह विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है। अटकलें हैं कि बीजेपी के उम्मीदवारों में एक नाम नितिन नवीन का हो सकता है, जिन्हें पिछले महीने पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। नवीन ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद दिसंबर में नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था लेकिन वह अभी भी बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। माना जा रहा है कि नई जिम्मेदारियों को देखते हुए वह अपनी विधानसभा की सीट छोड़ सकते हैं।

चिराग पासवान को मिलेगी अहमियत

एनडीए में एक और दावेदार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) हो सकती है, जिसके प्रमुख केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान हैं। पार्टी ने पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में 28 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतीं, जिनमें से दो विधायकों को नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में जगह मिली है। चिराग पासवान अपनी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि एनडीए के बड़े सहयोगी उनके राजनीतिक महत्व को देखते हुए उन्हें समायोजित करेंगे।

चिराग का मानना है कि एनडीए में उनकी मौजूदगी से इस गठबंधन को दुसाध समुदाय के वोट मिलते हैं, जो दलितों में प्रभावशाली तबका है।

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा भी मांग सकती है सीट

इस बीच, एनडीए सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव से पहले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की ओर से भी असंतोष की आवाज उठ सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, मांझी का मानना है कि उनकी पार्टी को उचित हिस्सेदारी नहीं मिली है। हालांकि, मांझी के पुत्र संतोष नीतीश के मंत्रिमंडल में मंत्री हैं। संतोष बीजेपी के समर्थन से विधान परिषद सदस्य बने थे। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा का दावा है कि उसे दलित जाति के मुसहर समुदाय का समर्थन प्राप्त है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के पास विधानसभा में पांच विधायक हैं, जिनमें संतोष की पत्नी और सास भी शामिल हैं।

महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव में विपक्ष पर बढ़ा दबाव

महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात सीटों पर चुनाव होने हैं। विपक्षी महा विकास अघाड़ी के लिए यह मुकाबला कठिन हो सकता है क्योंकि विधानसभा में उसकी स्थिति कमजोर है। क्लिक कर पढ़िए पूरी खबर।