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नहीं रहे बिहार के पूर्व CM जगन्नाथ मिश्र, ‘मौलाना’ नाम से थे मशहूर; इंदिरा सरकार को दे डाली थी चुनौती

जगन्नाथ मिश्र, भाई एल.एन मिश्र की हत्या के बाद बिहार के सीएम बने थे। उर्दू को बिहार की दूसरे नंबर की भाषा घोषित कर उ्होंने मुस्लिम तबके को साधा था, जबकि कांग्रेसी मुख्यमंत्री के नाते उन्होंने खनन संबंधी नीति पर इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार को चुनौती दे डाली थी।

Author नई दिल्ली | Updated: August 19, 2019 2:27 PM
मिश्र तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः प्रशांत रवि)

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र नहीं रहे। सोमवार (19 अगस्त, 2019) को लंबी बीमारी के बाद उनका देहांत हो गया। वह 82 साल के थे। पारिवारिक सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा को बताया कि मिश्र कैंसर से जूझ रहे थे और राजधानी दिल्ली में उनका इलाज चल रहा था, जहां सोमवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। मिश्र के निधन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीन दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया है।

सीएम नीतीश ने कहा है कि जगन्नाथ मिश्र जाने-माने राजनीतिज्ञ और शिक्षाविद थे। उनका निधन न केवल बिहार के लिए, बल्कि पूरे देश को अपूरणीय क्षति है।

वहीं, राज्यपाल फागू चौहान ने भी मिश्र के निधन पर शोक प्रकट किया है और तीन बार सीएम के रूप में और बाद में केंद्रीय मंत्री के तौर पर विकास की खातिर दिए गए मिश्र के योगदान को याद किया।

मिश्र, साल 1970 से 80 के दशक के बड़े नेताओं में में से एक थे। बिहार वि.वि. में लेक्चरर रहे जगन्नाथ मिश्र का राजनीतिक उदय बिल्कुल आकस्मिक था। बड़े भाई ललित नारायण मिश्र कांग्रेस में तब बड़े कद वाले नेता हुआ करते थे और वह तत्कालीन इंदिरा सरकार में रेल मंत्री (1975 में) थे। उन्हीं दिनों एलएन मिश्र की हत्या कर दी गई थी।

भाई एल.एन मिश्र की हत्या के बाद वह बिहार के सीएम बने थे। सूबे के बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में भी वह दोषी करार दिए गए थे, जिसके बाद कुछ दिन उन्हें जेल में भी रहना पड़ा था।

बिहार की राजनीति को राष्ट्रीय चर्चा में लालू प्रसाद यादव के लाने से पहले जगन्नाथ मिश्र ने ही सूबे के नेताओं को सिखाया था कि कैसे जाति और समुदाय को वोटबैंक की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

1977 में चुनावी झटके के बाद उन्होंने उर्दू को बिहार की दूसरी भाषा घोषित कर दिया था, जिसके बाद मुस्लिम उनके और कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ा वोट बैंक बन गए थे। मुस्लिमों में बढ़ती उनकी लोकप्रियता के चलते कई लोग मौलाना जगन्नाथ कहकर भी पुकारते थे।

वहीं, कांग्रेसी मुख्यमंत्री के नाते उन्होंने खनन संबंधी नीति पर इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार को चुनौती दे डाली थी।

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