बिहारः बच्चों को CAA, NRC के खिलाफ पढ़ाया पाठ, 2 स्वयंसेवी समूहों पर राजद्रोह का केस

बाल अधिकार पैनल ने 15 और 25 फरवरी को दानापुर आवासीय विद्यालय में निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान संस्थान में रखे कागजात देखे तो पाया कि वहां नाबालिग बच्‍चों को सीएए और एनआरसी के खिलाफ बताया जा रहा है।

Author Translated By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: April 10, 2021 8:23 AM
Sedition charge, CAA, NRC lessons, anti national, Patna groups, NCPCR, jansattaदो स्वयंसेवी समूहों के खिलाफ शिक्षण संस्‍थान में सीएए और एनआरसी के खिलाफ पाठ पढ़ाने के लिए राजद्रोह का मामला दर्ज किया है। (express file photo)

बिहार के पटना स्थित दानापुर में पुलिस ने दो स्वयंसेवी समूहों के खिलाफ शिक्षण संस्‍थान में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) एवं राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के खिलाफ “उत्तेजक और राष्ट्र-विरोधी” पाठ पढ़ाने के लिए राजद्रोह का मामला दर्ज किया है। मामला राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) द्वारा स्‍वत: संज्ञान लेते हुए देशद्रोह की एफआइआर दर्ज किए जाने के बाद सामने आया है।

बाल अधिकार पैनल ने 15 और 25 फरवरी को दानापुर आवासीय विद्यालय में निरीक्षण किया था। यहां दो स्वयंसेवी समूहों को 6 से 18 वर्ष की आयु के बीच लगभग 60 स्ट्रीट गर्ल्स को पढ़ाने की अनुमति दी गई थी। यह बिहार सरकार की शिक्षा के अधिकार अधिनियम योजना के तहत किया गया था। निरीक्षण के दौरान संस्थान में रखे कागजात देखे तो पाया कि वहां नाबालिग बच्‍चों को सीएए और एनआरसी के खिलाफ बताया जा रहा है। इसके बाद उन्‍होंने कार्रवाई की है।

बिहार के पुलिस महानिदेशक एसके सिंघल को एनसीपीसीआर द्वारा भेजे गए पत्र के बाद पिछले हफ्ते दानापुर पुलिस स्टेशन में अम्ब्रेला फाउंडेशन और केडीडीसी के खिलाफ आईपीसी धारा 124ए (राजद्रोह) और 153ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से ‘सार्वजनिक शांति’ को भंग करने) के तहत मामला दर्ज़ किया गया है।

दानापुर पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मामले की जांच की जा रही है। “हालांकि, किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है।” दानापुर स्कूल में आयोजित कक्षाओं से जुड़े संतोष महतो ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें अम्ब्रेला फाउंडेशन और केडीडीसी के बारे में बहुत कम जानकारी थी। उन्होंने कहा “हम यह नहीं तय करते हैं कि कौन सी संस्थाएं गली की लड़कियों को प्रशिक्षण प्रदान करती हैं।”

बिहार सरकार बाल देखभाल संस्थान को भवन के रूप में अवसंरचनात्मक सहायता प्रदान करती है, नागरिक समाज स्कूल चलाने के लिए धनराशि देता है। पुलिस ने कहा कि वे दोनों समूहों के बारे में और जानने की कोशिश कर रहे हैं और अभी तक उनसे बात नहीं की है।

एनसीपीसीआर ने कहा कि अपनी जांच के दौरान उन्होने कुछ छात्रों के होमवर्क रजिस्टर भी चैक किए और पाया कि उन्होंने “सीएए / एनआरसी की व्याख्या गलत तरीके से की थी। एक छात्र ने कथित तौर पर लिखा था, “मैं एनआरसी के खिलाफ हूं। अगर मेरे पास कोई घर ही नहीं है, तो मैं दस्तावेज़ कहां रखूंगा।”

राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग की अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो अपने पत्र में बताया है कि शिक्षण संस्‍थान में किस तरह छात्र-छात्राओं को भड़काते हुए पढ़ाया जा रहा था कि यदि कानून नागरिकों के हित में नहीं है तो सबको मिलकर विरोध करना चाहिए। सीएए व एनआरसी की बाबत छात्र-छात्राओं को यह भी बताया जा रहा था कि उन्‍हें जरूरी दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए, ताकि समय पर काम आ सकें। इनके नहिीं रहने पर उन्‍हें बेघर कर दिया जा सकता है।

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