बिहार में स्टेट हाइवे पर टोल को लेकर बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को साफ किया कि राज्य की सड़कों और पुलों पर निजी वाहनों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित शुल्क केवल कमर्शियल वाहनों पर लागू होगा।
अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड में आयोजित सहयोग शिविर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर नई नीति को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ”टोल टैक्स को लेकर कोई भ्रम नहीं है। बिहार सरकार ने तय किया है कि निजी वाहनों पर कोई टोल नहीं लगेगा। केवल व्यावसायिक (कमर्शियल) वाहनों से शुल्क लिया जाएगा।”
यह बयान उस अधिसूचना के एक दिन बाद आया है जिसमें बिहार रोड यूजर फी (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2026 जारी किए गए थे। इन नियमों को राज्य मंत्रिमंडल ने 1 जुलाई को मंजूरी दी थी।
अधिसूचना में क्या कहा गया है?
जारी नियमों में विभिन्न वाहनों के लिए प्रति किलोमीटर शुल्क तय किया गया था। अधिसूचना के अनुसार, कार, जीप और वैन के लिए 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर, हल्के व्यावसायिक वाहनों के लिए 2 रुपये प्रति किलोमीटर, बस और ट्रक के लिए 4.25 रुपये प्रति किलोमीटर तथा भारी मल्टी-एक्सल वाहनों के लिए एक्सल (धुरी) की संख्या के आधार पर 6.65 रुपये से 8.10 रुपये प्रति किलोमीटर तक उपयोग शुल्क निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा, अधिसूचित पुलों, बाइपास और अन्य सड़क स्ट्रक्चर पर अलग से शुल्क वसूलने का भी प्रावधान किया गया है।
नियमों में क्या प्रावधान हैं?
नए नियम बिहार सरकार के स्वामित्व वाली सड़कों, पुलों, सुरंगों और बाइपास पर उपयोग शुल्क वसूलने का कानूनी ढांचा तैयार करते हैं। इनमें निम्न प्रावधान हैं:
-थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर हर साल दरों में संशोधन
-FASTag और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से टोल वसूली
-ओवरलोड और बिना FASTag वाहनों पर अधिक शुल्क
-रियायती पास और कुछ श्रेणियों को छूट
-ऑडिट और प्रवर्तन संबंधी प्रावधान शामिल हैं
क्यों हुआ विवाद?
अधिसूचना में कार जैसे निजी वाहनों के लिए भी शुल्क दरें शामिल थीं। इसी वजह से विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों पर टोल का नया बोझ डाल रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी वाहन पूरी तरह से इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इस छूट को नियमों में शामिल करने के लिए अधिसूचना में संशोधन करेगी या नहीं।
वित्तीय दबाव के बीच फैसला
यह नीति ऐसे समय आई है जब बिहार सरकार वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। हाल ही में सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन भुगतान के लिए 3662 करोड़ रुपये इमरजेंसी फंड से निकाले थे और चालू वित्त वर्ष में 64000 करोड़ रुपये से ज्यादा बाजार से उधार लेने की योजना बनाई है।
बिहार में सड़क नेटवर्क
बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार:
-2005-06 से अब तक सड़क ढांचे पर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
-राज्य में 3600 किमी से ज्यादा राज्य राजमार्ग हैं।
-16700 किमी से अधिक प्रमुख जिला सड़कें हैं।
-6389 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग हैं जिन पर टोल वसूली केंद्र सरकार के नियमों के तहत होती है।
2024 में बिहार में 13.95 लाख वाहन रजिस्टर्ड हुए जिनमें 12.25 लाख निजी (नॉन-ट्रांसपोर्ट) और 1.70 लाख व्यावसायिक वाहन शामिल थे।
