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‘बिहार चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर राजग में टकराव नहीं’

भाजपा की सहयोगी आरएलएसपी ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजग सहयोगियों के लिए सीट बंटवारा कोई विवादपूर्ण मुद्दा नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री...

Author नई दिल्ली | September 6, 2015 15:14 pm
आरएलएसपी प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने यह भी दावा किया कि महागठबंधन से मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी और राकांपा के बाहर होने से भाजपा नीत राजग को लाभ होगा।(Source: Express photo by Prashant Nadkar)

भाजपा की सहयोगी आरएलएसपी ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजग सहयोगियों के लिए सीट बंटवारा कोई विवादपूर्ण मुद्दा नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में किसी को पेश न करने के गठबंधन के फैसले का समर्थन किया और जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने के लिए यह ‘‘सर्वश्रेष्ठ विकल्प’’ है।

आरएलएसपी प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने यह भी दावा किया कि महागठबंधन से मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी और राकांपा के बाहर होने से भाजपा नीत राजग को लाभ होगा। अपनी पार्टी के इस रुख पर कि भाजपा राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से केवल 102 पर चुनाव लड़े और शेष सीट सहयोगी दलों के लिए छोड़ देगी, कुशवाहा ने कहा, ‘‘ऐसी मांग थी, जो हमने विगत में उठाई थी। अब बात चल रही है। इसलिए इस विषय पर बाहर बात करना उचित नहीं होगा।’’

मानव संसाधन राज्य मंत्री कुशवाहा ने कहा, ‘‘सौदेबाजी करने का मेरा कोई इरादा नहीं है। हमारा एकमात्र उद्देश्य यह है कि बिहार में राजग की सरकार होनी चाहिए। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। हम किसी भी तरह की दबाव की राजनीति या सौदेबाजी करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।’’

उन्होंने सीट बंटवारे को लेकर राजग में टकराव होने की खबरों को खारिज किया और इसे विरोधियों का ‘‘दुष्प्रचार’’ करार दिया। यह पूछे जाने पर कि क्या प्रतिद्वंद्वी विपक्षी खेमे के पास नीतीश कुमार जैसा कद्दावर नेता होने के बावजूद मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए बिना चुनाव मैदान में उतरकर राजग ने सही काम किया, कुशवाहा ने कहा, ‘‘यह सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।’’

कुशवाहा ने कहा, ‘‘मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का फैसला सर्वश्रेष्ठ विकल्प है और हमने उसे अपनाया। वहां कोई चुनौती नहीं है…आज नीतीश राजग के लिए चुनौती नहीं हैं।’’

आरएलएसपी ने कुछ महीने पहले मांग की थी कि कुशवाहा को राजग के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए। हालांकि कुशवाहा मुद्दे पर सवालों को टाल गए। उनसे जब यह पूछा गया कि क्या वह उम्मीद करते हैं कि भाजपा किसी गैर भाजपा नेता को मुख्यमंत्री बना सकती है, कुशवाहा ने कहा, ‘‘चुनाव में अभी यह मुद्दा नहीं है। राजग ने फैसला किया है कि बिहार में चुनाव नरेंद्र मोदी के नेतृतव में लड़ा जाएगा। जब समय आएगा तब इस मुद्दे को देखा जाएगा।’’

कुशवाहा ने यह भी कहा कि भाजपा जब जद यू की गठबंधन सहयोगी थी तो सरकार चलाने में इसकी कोई ‘‘भूमिका नहीं’’ थी। उन्होंने कहा, ‘‘गठबंधन में रहना और सरकार चलाना दो अलग-अलग चीजें हैं। हर कोई जानता है कि सभी नीतिगत फैसले नीतीश कुमार द्वारा लिए जा रहे थे। केवल नीतीश का हुक्म चलता था। भाजपा सरकार में नाम मात्र को थी, न कि हकीकत में।’’

कुशवाहा कोइरी समुदाय के प्रमुख नेता हैं। इस समुदाय के पांच प्रतिशत मतदाता हैं। उन्होंने मीडिया में आई इन खबरों को खारिज किया कि बिहार में समाजवादी पार्टी भाजपा के कहने पर धर्मनिरपेक्ष गठबंधन से अलग हुई है। उन्होंने कहा कि यह नीतीश कुमार के ‘‘अहंकार’’ का नतीजा है।

कुशवाहा ने कहा कि शरद पवार की राकांपा के बाहर होने और वाम दलों के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले से राजग को फायदा होगा। उन्होंने कहा, ‘‘यदि मुलायम सिंह और राकांपा बाहर हो गए हैं और वाम उनके साथ नहीं गया तो स्वाभाविक है कि इससे हमें लाभ होगा। उन्होंने राजग विरोधी वोटों के बिखराव को रोकने की कोशिश की। वे विफल रहे। इसलिए, स्वाभाविक है कि इससे राजग को लाभ होगा।’’

कुशवाहा ने कहा कि सपा और राकांपा के बाहर होने के बाद धर्मनिरपेक्ष गठबंधन को अपने नाम से ‘महा’ शब्द हटा लेना चाहिए क्योंकि जद यू-राजद-कांग्रेस गठबंधन को ‘‘महागठबंधन’’ नहीं कहा जा सकता।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार में विधानसभा चुनाव विकास और सामाजिक न्याय पर केंद्रित होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘बिहार चुनाव में दोनों चीज मायने रखेंगी। लेकिन लोग, खासकर युवा इस बार विकास पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।’’

कुशवाहा ने कहा, ‘‘विकास एक बड़ा मुद्दा होगा, जो हम भी चाहते हैं। चुनाव में सामाजिक समीकरणों की भूमिका होगी और उस दृष्टिकोण से भी राजग काफी संतुलित है।’’

उन्होंने इन दावों को खारिज किया कि लालू और नीतीश जैसे मंडल दिग्गजों की व्यूह रचना से भाजपा नीत गठबंधन को ओबीसी पाले से अधिक वोट नहीं मिल पाएंगे।

यह पूछे जाने पर कि लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ने वाले नीतीश और लालू के एक साथ आने से उनके गठबंधन को फायदा नहीं होगा, कुशवाहा ने कहा, ‘‘राजनीति साधारण गणित की तरह नहीं है कि यदि दो लोगों को अलग-अलग 10 और 15 वोट मिलते हैं तो उनके एक साथ आने से उन्हें 25 वोट मिलेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नीतीश कुमार को तब जो वोट मिले थे, वे असल में लालू विरोधी वोट थे। आज वह लालू के साथ हैं। इसलिए जिन लोगों ने नीतीश को लालू विरोधी होने के लिए वोट दिया, वे अब उन्हें वोट नहीं देंगे।’’

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