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राजग को फायदा पहुंचाने में नाकाम रहे पासवान व मांझी

रामविलास पासवान, जीतनराम मांझी बिहार विधानसभा चुनाव में राजग को फायदा पहुंचाने में नाकाम रहे। भाजपा दोनों दलित नेताओं पर अनुसूचित जातियों के करीब 16 फीसद.

Author पटना | November 10, 2015 11:44 PM

रामविलास पासवान, जीतनराम मांझी बिहार विधानसभा चुनाव में राजग को फायदा पहुंचाने में नाकाम रहे। भाजपा दोनों दलित नेताओं पर अनुसूचित जातियों के करीब 16 फीसद वोट दिलाने के लिए निर्भर थी। राजद-जद (एकी)-कांग्रेस महागठबंधन को राजग की तुलना में अनुसूचित जाति समुदायों के मतदाताओं का ज्यादा समर्थन मिला। जबकि राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 26 रैलियों के दौरान पासवान और मांझी हमेशा उनके साथ रहते थे।

चुनाव परिणाम के विश्लेषण से पता चलता है कि जद (एकी)-राजद-कांग्रेस के शिविर से नौ पासवान उम्मीदवार जीते जबकि राजग की तरफ से ऐसे उम्मीदवारों की संख्या दो थी। उन दोनों में से भी एक भाजपा जबकि दूसरा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का था। लोजपा ऐसी कोई भी सीट जीतने में नाकाम रही। इसी तरह भाजपा महादलितों के वोट के लिए जीतनराम मांझी पर निर्भर थी। महागठबंधन के ऐसे 15 उम्मीदवारों को जीत मिली जबकि मांझी अपनी पार्टी की तरफ से अकेले विजेता रहे। महादलित समुदाय से भाजपा के तीन उम्मीदवारों को जीत मिली।

राजद ने 10 महादलितों को टिकट दिया था जिनमें से नौ विजयी रहे। जद (एकी) ने छह महादलितों को टिकट दिया था जिनमें से पांच जीते। कांग्रेस ने तीन उम्मीदवारों को उतारा था जिनमें से एक को जीत मिली। राजग शिविर में भाजपा ने 11 महादलित उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से तीन को जीत मिली। लोजपा और रालोसपा ने क्रम से तीन और एक उम्मीदवार उतारे थे, सभी हार गए।

बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से 38 अनुसूचित जाति और दो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पार्टी ने कुल 41 उम्मीदवार खड़े किए थे जिनमें से मात्र दो को जीत मिली और दोनों ही अति पिछड़ा वर्ग से हैं। रालोसपा को दो सीटें मिलीं जिनमें से एक पर कुशवाहा जाति और दूसरे पर पासवान जाति का उम्मीदवार विजयी रहा।

नतीजों पर ध्यान देने से पता चलता है कि लालू प्रसाद की पार्टी राजद की तरफ से यादव और मुसलिम बड़े विजेता रहे। लालू ने यादव जाति के 49 उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से 42 को जीत मिली। इसी तरह 16 मुसलिम उम्मीदवारों में 12 को जीत मिली। इससे पता चलता है कि मुसलिम व यादव समुदाय अब भी लालू का समर्थन करते हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जद (एकी) की तरफ से उनकी खुद की कुर्मी जाति के 13 और कुशवाहा व यादव जाति के 11-11 उम्मीदवार विजयी रहे। जद (एकी) की तरफ से कुर्मी और कुशवाह जाति के विजयी उम्मीदवारों की बहुतायत से साबित होता है कि कुर्मी और कुशवाहा पर नीतीश की पकड़ अब भी मजबूत है। कांग्रेस के 27 विजेता उम्मीदवारों में 12 सवर्ण हैं। कांग्रेस की तरफ से चार ब्राह्मण, तीन राजपूत, तीन भूमिहार और दो कायस्थ जाति के उम्मीदवार विजयी रहे।

भाजपा ने इन चारों सवर्ण जातियों के सबसे अधिक उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से 22 विजयी रहे। कुल वोट फीसद में इन जातियों की हिस्सेदारी 15 फीसद है। वहीं मतदाताओं की आबादी में 30 फीसद हिस्सा रखने वाले अति पिछड़ा वर्ग के 12 उम्मीदवार महागठबंधन की तरफ से विजयी रहे जबकि राजग के ऐसे सात उम्मीदवारों को जीत मिली, जिनसें से सभी भाजपा के हैं।

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