ताज़ा खबर
 

चुनावी रैली में लालू व नीतीश का जिक्र करना भूले राहुल

अपनी पहली चुनावी जनसभा में राहुल गांधी ने सूट-बूट की सरकार के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तो निशाने पर लिया लेकिन अपने लालू यादव व नीतीश कुमार..

Author रामनगर (पश्चिम चंपारण) | Updated: September 20, 2015 9:28 AM
अपने 23 मिनट के भाषण में राहुल ने एक बार भी लालू यादव और नीतीश कुमार का नाम नहीं लिया और खुद को बस सूट-बूट वाली मोदी सरकार पर हमलों तक सीमित रखा। (पीटीआई फोटो)

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान की शुरुआत की। अपनी पहली चुनावी जनसभा में उन्होंने सूट-बूट की सरकार के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तो निशाने पर लिया लेकिन अपने महागठबंधन सहयोगियों लालू यादव व नीतीश कुमार का नाम लेना भी भूल गए। लालू व नीतीश, दोनों ही इस रैली में नहीं पहुंचे। लालू ने अपने पुत्र तेजस्वी यादव और नीतीश ने केसी त्यागी को रैली में शामिल होने के लिए भेजा।

अपने 23 मिनट के भाषण में राहुल ने एक बार भी इन दोनों का नाम नहीं लिया और खुद को बस सूट-बूट वाली मोदी सरकार पर हमलों तक सीमित रखा। रैली जानबूझ कर चंपारण में रखी गई थी ताकि इसे गांधी जी के सत्याग्रह से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जहां गरीबों की खातिर अपना सूट-बूट त्याग दिया था, वहीं खुद को ‘चाय बेचने वाला’ बताने वाले नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद सूट-बूट को अपना लिया।

हरिनगर चीनी मिल परिसर स्थित हजारी मैदान में दलित नेता बाबासाहेब आंबेडकर की 125वीं जयंती पर आयोजित एक सभा में राहुल ने कहा कि कांग्रेस की पहली लड़ाई शायद चंपारण में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने लड़ी थी। गांधी जी के यहां से जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी पूरी जिंदगी धोती पहनकर बिताई।

राहुल ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ हैदराबाद में मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपना नाम लिखा दस लाख रुपए का सूट पहनने पर उनकी सरकार के सूट-बूट वालों की सरकार होने के संसद में लगाए अपने आरोप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कपड़ों से बहुत कुछ मालूम हो जाता है। हमारी सोच सूट-बूट को त्यागकर धोती पहनने की है। गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में काला सूट पहनते थे और एक प्रतिष्ठित वकील थे। लेकिन बाद में उन्होंने सूट, शर्ट आदि त्यागकर धोती पहनना शुरू किया और आज उनके विचारों के अलावा उनके वही वस्त्र, चश्मा और एक घड़ी बची है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी जी जिनकी चर्चा आज चाय बेचने वाले के रूप में हो रही है, रोजगार या स्वच्छता अभियान के बारे में बातचीत करने युवाओं व सफाई कर्मचारियों के बीच नहीं जाते बल्कि इन विषयों पर चर्चा सूट-बूट पहनकर अपने नौकरशाहों के साथ करते हैं। राहुल ने कहा कि गांधी जी ने अपने सूट को त्यागकर किसानों की समस्या लेकर चंपारण में सत्याग्रह किया था। लेकिन दूसरी तरफ खुद को ‘चाय बेचने वाला’ बताने वाले मोदी जी गरीबों के बीच जाने से अपने कपड़े मैले हो जाने के डर से आज गरीबों और मजदूरों से नहीं केवल सूट-बूट वालों से मिलते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में सत्ता में आने के 15 महीने बाद भी मोदी जी ने कालेधन को वापस लाने और सभी के खाते में स्वत: 15 लाख रुपए पहुंचाने, मेक इन इंडिया के जरिए दो करोड़ रोजगार सृजित करने और महंगाई को कम करने के अपने वादों को पूरा नहीं किया। राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी जी ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान चंपारण में बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू करने का वादा किया था, पर वे बताएं कि क्या ऐसा हो सका।

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ चलाए गए अपने और अपनी पार्टी के अभियान की चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की मौजूदा सरकार विकास का झांसा देकर किसानों से उनकी जमीन छीनना चाहती थी। उन्होंने मोदी सरकार पर शिक्षा और स्वास्थ्य को सरकार की जिम्मेदारी नहीं समझने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा शासित छत्तीसगढ़ में जनवितरण प्रणाली के तहत चावल बांटने में हुए घोटाले, मध्य प्रदेश में व्यापमं घोटाले, ललित मोदी मामले में केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर लगे आरोपों के बाद भी मोदी जी भ्रष्टाचार को मिटाने और ‘न खुद खाऊंगा और न दूसरे को खाने दूंगा’ की बात कह रहे हैं।

राहुल ने महाराष्ट्र में स्थानीय भाषा नहीं बोलने वालों को टैक्सी आदि चलाने का परमिट नहीं दिए जाने की चर्चा करते हुए कहा कि यह है भाजपा और उसकी सरकार की विचारधारा। उन्होंने दावा किया कि बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस-जद (एकी)-राजद महागठबंधन का गठन गरीबों और कमजोरों की रक्षा करने के लिए किया गया है। यह गठबंधन मोदी जी के चुने हुए सूट-बूट वाले दोस्तों से बिहार को और इस प्रदेश की जनता को बचाना चाहता है।

राहुल ने बिहारवासियों को आगाह किया कि यहां भाजपा की सरकार बनने पर दिल्ली और गुजरात से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सूट-बूट वाले (औद्योगिक घरानों के लोग) दोस्त यहां आकर किसानों को उनकी जमीन से बेदखल कर खुद उस पर कब्जा कर लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी हार होते देखकर भाजपा और आरएसएस पिछले चुनावों की तरह इस बार भी एक धर्म के लोगों को दूसरे धर्म के लोगों के साथ लड़ाने की कोशिश करेंगे और आप उनके बहकावे में नहीं आएंगे।

राहुल ने बिहार में उनके महागठबंधन की सरकार बनने पर रोजगार का सृजन किए जाने और उसमें गरीबों, कमजोरों, महिलाओं और युवाओं के हितों की रक्षा का वादा किया। राहुल के साथ मंच पर राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, कांग्रेस महासचिव सीपी जोशी, राजद प्रमुख लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी यादव और उनके रिश्तेदार व हरियाणा कांग्रेस नेता अजय यादव व जद (एकी) नेता केसी त्यागी भी मौजूद थे।

लालू के पुत्र तेजस्वी यादव ने राहुल को ‘असली युवा नेता’ करार देते हुए उन्हें ‘युवाओं का युवा’ बताया। उन्होंने कहा कि लालू यादव ने गरीबों को सामाजिक न्याय दिलाने में महती भूमिका निभाई। अब हम गरीबों को इसके साथ आर्थिक न्याय दिलाने की भी लड़ाई लड़ेंगे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
ये पढ़ा क्या?
X
Testing git commit