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नीतीश ने मोदी के आरक्षण पर षड्यंत्र के आरोप को बताया ‘बकवास’

नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महागठबंधन के नेताओं सोनिया गांधी, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद पर यह आरोप लगाये जाने कि वे वोट बैंक की राजनीति के तहत..

Author पटना | October 26, 2015 10:48 PM
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (पीटीआई फोटो)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महागठबंधन के नेताओं सोनिया गांधी, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद पर यह आरोप लगाये जाने कि वे वोट बैंक की राजनीति के तहत दलितों, महादलितों और पिछड़े वर्गो के आरक्षण कोटे में से पांच प्रतिशत की कटौती करके किसी सम्प्रदाय विशेष को देने का षड्यंत्र रच रहे हैं को ‘बकवास’ बताते हुए कहा कि यह उनकी सांप्रदायिक स्तर पर वोट के ध्रुवीकरण की आखिरी कोशिश है।

यहां जदयू के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को संवाददाताओं से नीतीश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से आरक्षण परिभाषित है जिसका हम दृढतापूर्वक पालन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के आरोप में कोई सच्चाई नहीं है हम दलितों, महादलितों और पिछड़े वर्गो के आरक्षण कोटे में से पांच प्रतिशत की कटौती करके किसी सम्प्रदाय विशेष को देने का षड्यंत्र रच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इससे पूर्व कुछ राज्यों में धर्म के आधार पर आरक्षण दिए जाने की कोशिश की गयी जिसकी अदालत ने अनुमति नहीं दी। नीतीश ने प्रधानमंत्री के आरोप को ‘बेबुनियाद’ बताते हुए आरोप लगाया कि राजग जो कि पहले ही हार चुकी है उसका यह बिहार विधानसभा चुनाव जीतने के लिए संप्रदायिक स्तर पर वोट के ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा है।

उन्होंने मोदी द्वारा रविवार और सोमवार के अपने चुनावी भाषणों के दौरान लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए एक तांत्रिक से अपनी मुलाकात, बिहार में बिजली को लेकर किए गए वादे और स्वयं को अत्यंत पिछडी जाति का बताने पर उन पर प्रहार करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि उन्होंने विकास से अब अपनी दूरी बना ली है।

नरेंद्र मोदी को विकास के मुद्दे पर बहस की खुली चुनौती देते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि चूंकि राजग ने बिहार में अपना नेता (मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार) घोषित नहीं किया है और वह प्रधानमंत्री के नाम पर विधानसभा चुनाव लड़ रही है।

उन्होंने कहा कि न्याय के साथ विकास के बिहार मॉडल और गुजरात मॉडल जहां अधिकांश महिलाएं कुपोषण और खून की कमी की शिकार हैं पर बहस कर लें। जदयू-राजद-कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नीतीश ने प्रधानमंत्री पर बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपना प्रोफाइल बदलने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में उन्हें ‘विकासशील प्रधानमंत्री’ बताया जाता था और उसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाला पहला प्रधानमंत्री बताया और अब वे अपने को अत्यंत पिछड़ा वर्ग से आने वाला प्रधानमंत्री बता रहे हैं।

नीतीश ने कटाक्ष करते कहा कि पता नहीं वे जिस राज्य (गुजरात) से आते हैं वहां अत्यंत पिछडा वर्ग है या नहीं। कोई व्यक्ति धर्म भी बदल लेता है तो उसकी जाति नहीं बदलती।

एक तांत्रिक से अपनी मुलाकात को लेकर जारी वीडियो के बारे में प्रधानमंत्री के सवाल पर नीतीश ने उसे हल्के अंदाज में लेते हुए कहा कि वे अपनी पार्टी के पार्षद नीरज कुमार के अनुरोध पर उनके पटना स्थित आवास गए थे जहां उक्त ‘अघौरी’ से मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा कि उक्त वीडियो क्लीप वर्ष 2014 का है जो कि नीरज जी के एक कर्मचारी ने रिकॉर्ड किया था पर उसे हाल का होने का दावा किया जा रहा है।

नीतीश ने कहा कि उनका राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन उक्त मुलाकात के काफी बाद हुआ और उसमें उन्हें कुछ कहते हुए तथा तांत्रिक की बात से सहमति जताते नहीं दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि वे ‘आस्तिक’ हैं और मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर जाते हैं पर जो यह कहते हैं कि ‘कसम राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे पर तारीख नहीं बताएंगे’ के बारे में क्या कहा जाए।

नीतीश ने शायराना अंदाज में कुछ पंक्तियां जिसका सार यह था कि गुजरात से बह रही हवा पहुंच गयी है और कालाधन वापस लाने और अन्य चीजें कहीं नहीं दिखायी पड़ रही हैं और उन्हें तलाशे जाने की जरूरत है को दोहराया।

जदयू के एक मंत्री और एक विधायक के स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिश्वत लेते हुए दिखाए जाने के प्रधानमंत्री के आरोप के बारे में नीतीश ने कहा कि उनकी पार्टी ने इन मामलों में तुरंत कार्रवाई की पर भाजपा नेताओं जिनके घर से करीब दो करोड़ रुपये जब्त किए गए उनके बारे में बताएं। नीतीश का निशाना केंद्रीय राज्य मंत्री गिरीराज सिंह के घर से दो करोड़ रुपये की बरामदगी की ओर था।

नीतीश ने भाजपा नीत राजग के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी पर तथ्यों को तोड़मड़ोरकर पेश करने तथा बिहार में बिजली उपलब्धता को लेकर गलत तस्वीर पेश करने का आरोप लगाते हुए उनपर उनके बयान को गलत ढंग से पेश करने का आरोप लगाते हुए उन्हें चुनौती दी कि वे उसका ऑडियो क्लीप जारी करें।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने भाषण में यह कभी नहीं कहा कि हर घर को बिजली नहीं उपलब्ध करा सकने पर वे 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनता के बीच वोट नहीं मांगने जाएंगे बल्कि यह कहा था कि बिजली की स्थिति में सुधार नहीं होने पर वे जनता के बीच वोट मांगने नहीं जाएंगे।

प्रधानमंत्री के लद्दाख परिषद में भाजपा के जीत के दावे के साथ अपनी पार्टी के पक्ष में हवा बहने की बात किए जाने पर नीतीश ने उनसे पूछा कि गुजरात में विधि व्यवस्था की समस्या के कारण क्यों स्थानीय निकाय का चुनाव संपन्न नहीं हो सका।

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