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बिहार चुनाव के भोजपुर क्षेत्र में कांटे का मुकाबला

जातिवाद के खूनी संघर्ष का गवाह रहे बिहार के भोजपुर क्षेत्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राजग और नीतीश कुमार नीत महागठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला दिख रहा है..

Author तरारी (भोजपुर) | October 28, 2015 1:39 AM
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद (पीटीआई फोटो)

जातिवाद के खूनी संघर्ष का गवाह रहे बिहार के भोजपुर क्षेत्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राजग और नीतीश कुमार नीत महागठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला दिख रहा है और करो या मरो की स्थिति वाले संघर्ष में यहां के लोगों के सामने रोजगार और शिक्षा प्रमुख मुद्दा है। इस क्षेत्र से दलित गांवों के काफी संख्या में युवा आजीविका की तलाश में पलायन कर रहे हैं और पहचान की राजनीति प्रखर है।

इसी भोजपुर क्षेत्र में जगदीशपुर आता है जहां वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का झंडा बुलंद किया था और क्षेत्र में लोगों के बीच आदर्श बन गए। आज इसी क्षेत्र में चाय की दुकानों पर चुनाव से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा परिचर्चा जारी हैं।

तरारी विधानसभा क्षेत्र में सिकरहट्टा मुसहर टोली के रामजी मांझी का कहना है कि यहां युवाओं के लिए रोजगार नहीं है, इसलिए उन्हें आजीविका की तलाश में घर-बार छोड़ कर जाना पड़ता है। दलितों के कई परिवारों को शादी से पहले घर छोड़ कर कमाने बाहर जाना पड़ता है ताकि कुछ पैसा कमा कर वे अपना परिवार शुरू कर सकें।

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इस क्षेत्र में हालांकि काफी उपजाऊ जमीन है लेकिन संसाधनों पर कुछ लोगों का नियंत्रण है और बड़ी संख्या में लोगों को आजीविका के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। पलायन के इसी दौर में भोजपुरी साहित्य में कई उपमाएं दी गई हैं जिनमें ‘विदेसिया, परदेसिया और बटोहिया’ शामिल हैं। पलायन का दर्द इस क्षेत्र के सुविख्यात साहित्यकार भिखारी ठाकुर की कविताओं में भी नजर आता है जिन्हें ‘भोजपुर का शेक्सपीयर’ कहा जाता है। उनके नाटक ‘विदेसिया’ में एक पत्नी की मार्मिक कहानी को दर्शाया गया है जिसके पति को काम की तलाश में पलायन करना पड़ता है।

तरारी में हाई प्रोफाइल उम्मीदवारों के बीच मुकाबला देखने को मिल रहा है। इसमें डान से राजनीति के क्षेत्र में कदम रखने वाले उम्मीदवार हैं तो दूसरी तरफ एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और रणवीर सेना के प्रमुख के पुत्र हैं।

रणवीर सेना के प्रमुख रहे ब्रह्मेश्वर सिंह मुखिया के बेटे इंदु भूषण सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर मुकाबले को चौकोना बना रहे हैं। 90 के दशक में इस क्षेत्र में उच्च वर्ग के जमींदारों और वामपंथी चरमपंथियों के नेतृत्व में वंचित तबके के बीच खूनी संघर्ष देखने को मिला था। सिंह ने किसानों के लिए संघर्ष करने का वादा किया है।

राजग की उम्मीदवार गीता पांडे हैं जो सुनील पांडे की पत्नी हैं। महागठबंधन की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश प्रसाद सिंह कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे हैं जबकि माले ने स्थानीय सुदामा प्रसाद को उतारा है।

इस क्षेत्र में भाजपा ने अपने सभी वर्तमान विधायकों को टिकट दिया है जो आरा, शाहपुर, संदेश और अंगिया से हैं। लेकिन यह देखना होगा कि भाजपा और जद (एकी) के अलग होने के बाद क्या वे अपना प्रदर्शन दोहरा पाते हैं। तरारी से लोजपा चुनाव लड़ रही है जबकि जगदीशपुर सीट उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को मिली है।

महागठबंधन की ओर से लालू प्रसाद की राजद ने पांच सीटों आरा, बाढ़रा, जगदीशपुर, शाहपुर और संदेश सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। जद (एकी) अंगिया से चुनाव लड़ रही है जबकि तरारी सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

भाजपा नीत राजग भोजपुर क्षेत्र पर परचम लहराने का प्रयास कर रही है जो कभी राजद का गढ़ माना जाता था। हालांकि भाजपा और जद (एकी) के साथ आने के बाद इस क्षेत्र पर लालू प्रसाद का दबदबा समाप्त हो गया था। इस बार लालू प्रसाद और नीतीश कुमार एक साथ है और उनके सामने भाजपा नीत राजग है।

2010 के चुनाव में भाकपा माले इस क्षेत्र के सात सीटों में से एक सीट भी नहीं जीत पाई थी और इस बार वह तरारी, अंगिया और जगदीशपुर सीट पर उम्मीद लगाए हुए हैं। सिकरहट्टा गांव के जितेंद्र सिंह का कहना है कि नीतीश ने भाजपा के साथ गठबंधन क्यों तोड़ा। लालू के साथ हाथ क्यों मिलाया। भूमिहार भाजपा के साथ है। एक ब्राह्मण विदेश्वरी गिरि ने भी स्पष्ट किया कि उनका समर्थन राजग उम्मीदवार गीता के लिए है।

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