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बिहार चुनाव: तीसरे दौर की वोटिंग की तीन अहम बातें- प्रतिष्‍ठा, संख्‍या और पिछड़ा वोटर्स

बिहार में बुधवार (28 अक्‍टूबर) को विधानसभा चुनाव के तीसरे दौर का मतदान है। इस दौर में ईबीसी (आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग) और दलित वोटर्स का रोल सबसे अहम होगा।

Author पटना | October 28, 2015 10:56 AM
तीसरे दौर के चुनाव में लालू प्रसाद के लिए वैशाली और नीतीश कुमार के लिए नालंदा नाक का सवाल बना हुआ है।

बिहार में बुधवार (28 अक्‍टूबर) को विधानसभा चुनाव के तीसरे दौर का मतदान है। इस दौर में ईबीसी (आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग) और दलित वोटर्स का रोल सबसे अहम होगा। तीसरे दौर के मतदान की तीन अहम बातें हैं- प्रतिष्‍ठा, संख्‍या और पिछड़ा वोटर्स। संभवत: तीसरे चरण के मतदान से ही विधानसभा का स्‍वरूप तय होगा।
प्रतिष्‍ठा

तीसरे दौर के चुनाव में लालू प्रसाद के लिए वैशाली और नीतीश कुमार के लिए नालंदा नाक का सवाल बना हुआ है। वैशाली में दलित चेहरे रामविलास पासवान की भी परीक्षा होगी, क्‍योंकि उनका हाजीपुर क्षेत्र वैशाली का ही हिस्‍सा है।

कैंडिडेट्स के लिहाज से बात करें तो लालू के बेटे तेज प्रताप महुआ और तेजस्‍वी राघोपुर से मैदान में हैं। बड़े बेटे तेज प्रताप के सामने रवींद्र राय हैं। राय जेडीयू में थे, लेकिन बगावत कर जीतन राम मांझी की पार्टी हम के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। मुहआ में ईबीसी और दलित वोटर्स निर्णायक हैं।

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लालू के दूसरे बेटे तेजस्‍वी का मुकाबला राघोपुर के मौजूदा विधायक सतीश कुमार से है। 2010 में जेडीयू के कुमार ने तेजस्‍वी की मां और पूर्व मुख्‍यमंत्री राबड़ी देवी को हराया था। अब वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। राघोपुर में यादवों की आबादी 1.25 लाख है।

वैशाली में भी प्रतिष्‍ठा की लड़ाई है। यहां जदयू के बागी वृषिण पटेल हम के उम्‍मीदवार हैं। उन्‍हें कुर्मी वोटर्स से उम्‍मीदें हैं।

phase

लालू के गृहक्षेत्र सारण में सभी विधानसभा सीटों पर कांटे का मुकाबला है। लोकसभा चुनाव में यहां से राबड़ी देवी भाजपा के राजीव प्रताप रूडी के हाथों हार गई थीं। यहां अगड़ी जाती के राजपूत और ओबीसी यादव मतदाताओं की संख्‍या ज्‍यादा है।

पटना में भाजपा का जोर शहरी क्षेत्रों में अपनी पैठ कायम रखने पर होगा। यहां विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पांच बार विधायक रहे नंद‍ किशोर यादव का मुकाबला आरजेडी के संतोष मेहता से है।

संख्‍या

तीसरे दौर के मतदान में संख्‍या अहम इसलिए है क्‍योंकि इसमें 50 सीटों पर वोटिंग है। यानी कुल (243) सीटों का करीब 20 फीसदी। 81 सीटों पर पहले दो चरण में वोट पड़ चुके हैं। इस तरह तीसरे चरण के बाद 131 सीटों की वोटिंग हो चुकी होगी।

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तीसरे चरण में वोटिंग वाली ज्‍यादातर सीटों पर मौजूदा विधानसभा में महागठबंधन (लालू-नीतीश-सोनिया खेमा) का कब्‍जा है। 50 में से 22 सीटें अकेले जेडीयू के कब्‍जे में हैं। 8 मौजूदा विधायक आरजेडी के हैं। लेकिन इस क्षेत्र की सात लोकसभा सीटों में से छह पिछले साल भाजपा ने जीती थीं। सातवीं सीट भी उसके सहयोगी के खाते में गई थी। इस विधानसभा चुनाव में भाजपा दो-तिहाई सीटों पर लड़ रही है। तीसरे दौर की 50 में से 34 सीटों पर भाजपा के उम्‍मीदवार हैं। उसे पटना, भोजपुर और बक्‍सर की सीटों से काफी उम्‍मीदें हैं।

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पिछड़ा वोटर्स

तीसरे दौर के चुनाव में पिछड़ा वोटर्स इसलिए अहम हो गया है, क्‍योंकि एक तो इनकी संख्‍या ज्‍यादा है और दूसरा, इस दौर के लिए हुए चुनाव प्रचार में आरक्षण के मुद्दे पर काफी गरमागरमी रही। नरेंद्र मोदी ने यहां तक कह दिया कि वे आरक्षण के लिए जान की बाजी लगा देंगे। उन्‍होंने अपनी जाति का भी मुद्दा उठाया। भाजपा के नेता सुशील मोदी ने मंगलवार को इस मुद्दे पर बयान तक जारी किया। लालू-नीतीश खेमे ने भी इस मुद्दे के बहाने एनडीए पर जोरदार हमला बोला था।

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