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बिहार: नीतीश सरकार ने लालू और उनके बेटों के खिलाफ वापस लिया दंगे का केस, भाजपा भड़की

7 जुलाई 2015 को आरजेडी ने केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना के आंकड़े न जारी करने के विरोध मे बिहार बंद का आयोजन किया था। लालू और बाकी लोगों पर पटना के तत्‍कालीन एसएसपी के आदेश पर कोतवाली पुलिस थाने में केस दर्ज हुआ था।

rjd band case, Bihar bandh 2015, RJD chief Lalu Prasad, Tej Pratap Yadav, Tejashwi Prasad Yadav, Sushil Kumar Modi, Nitish Kumar governmentपटना की एक जिला अदालत ने बुधवार को लालू, डिप्‍टी सीएम तेजस्‍वी, रोड ट्रांसपोर्ट मिनिट तेज प्रताप और 263 आरजेडी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला वापस लेने की अर्जी को मंजूरी दे दी।

आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके मंत्री बेटों तेजस्‍वी और तेज प्रताप के खिलाफ बिहार पुलिस ने आरजेडी बंद मामले में एफआईआर वापस लेने का फैसला किया है। पटना की जिला अदालत ने बुधवार को लालू, डिप्‍टी सीएम तेजस्‍वी, रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍टर तेज प्रताप और 263 आरजेडी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला वापस लेने की अर्जी को मंजूरी दे दी। बीजेपी ने इसे लेकर सत्‍ताधारी आरजेडी और जेडीयू गठबंधन पर हमला बोला है। बीजेपी नेता और राज्‍य के पूर्व डिप्‍टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को आरेाप लगाया कि राज्‍य सरकार गठबंधन सहयोगी आरजेडी के प्रमुख के दबाव में आकर ‘बड़े परिवार’ को विशेष वरीयता दे रही है।

क्‍या है मामला
बता दें कि 27 जुलाई 2015 को आरजेडी ने केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना के आंकड़े न जारी करने के विरोध मे बिहार बंद का आयोजन किया था। लालू और बाकी लोगों पर पटना के तत्‍कालीन एसएसपी के आदेश पर कोतवाली पुलिस थाने में केस दर्ज हुआ था। ये केस आईपीसी की धारा 147 यानी दंगे, 148 (गैरकानूनी ढंग से इकट्ठा होना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 353 (सरकारी कर्मचारी को काम करने से रोकना) और अन्‍य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। कोतवाली पुलिस ने इस मामले में सभी 265 लोगों के खिलाफ 13 अक्‍टूबर 2015 को चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद, कोर्ट ने आरोपियों को पेश होने के लिए तलब किया था।

क्‍या कहना है बीजेपी का 

बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने द इंडियन एक्‍सप्रेस से बातचीत में कहा, ”जेपी आंदोलन में शामिल लोगों को छोड़कर मुझे ऐसा कोई मामला याद नहीं पड़ता जब राज्‍य सरकार ने राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामले वापस लिए हों। नीतीश कुमार की सरकार सुपर सीएम लालू प्रसाद के अभूतपूर्व दबाव में काम कर रहे हैं। उन्‍होंने उस एकमात्र एफआईआर को वापस लेने का फैसला किया है, जिसमें लालू और उनके बेटों का नाम है। कोर्ट ने उन्‍हें पेशी के लिए बुलाया था। अगर वे वहां जाते तो राज्‍य सरकार के लिए शर्मिंदगी की वजह बनते। लेकिन इसी तरह के आरोपों में दर्ज किए गए अन्‍य 23 मामलों का क्‍या? हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज ऐसे हजारों मामलों का क्‍या?” मोदी के मुताबिक, 27 जुलाई 2015 के बंद को लेकर पटना हाई कोर्ट ने भी नाराजगी जताई थी। उस दिन हाई कोर्ट के तीन जज भी आरजेडी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की वजह से जाम में फंस गए थे। हाई कोर्ट ने राज्‍य के मुख्‍य सचिव से इस बंद पर राज्‍य सरकार के रुख की जानकारी मांगी थी।

 

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