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बिहार: भागलपुर की विशेष केंद्रीय जेल में कैदियों में घबराहट, चार बंदियों की मौत के बाद जांच में पॉजिटिव मिले हैं नमूने

बुधवार को बिहार की सभी जेलों के साथ जेल आईजी और दूसरे अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग होगी। इसमें वहां के ताजा हालात, संक्रमण के आंकड़े और इंतजाम की जानकारी ली जाएगी। यों जेल आईजी ने आदेश दिया है कि नए गिरफ्तार आरोपियों को सीधे जेल भेजने के बजाए कैदियों के लिए बने पृथकवास शिविरों में 14 दिनों रखा जाए। इसके बाद ही जेल भेजा जाए।

भागलपुर की विशेष केंद्रीय कारा जहां 13 जुलाई से19 जुलाई तक चार मौतें कोरोना संक्रमण से हुई है। फिर भी जेल प्रशासन बिहार की जेलों को संक्रमण से सुरक्षित बता रहा है।

बिहार के भागलपुर की विशेष केंद्रीय जेल में कोरोना संक्रमण से अब तक चार मौतें हो चुकी है। इससे जेल कर्मचारियों और कैदियों में घबराहट पैदा हो गई है। हालांकि भागलपुर के प्रभारी ज़िलाधीश ने कारा में बंद कैदियों की जांच कराने के लिए जेल में जांच सेंटर बनाकर उनके नमूने लेने का आदेश दिया है। मगर जेल अधीक्षक के मुताबिक अब तक जांच शुरू नहीं हो पाई है। चार मौतें होने की पुष्टि की है।

जेल आईजी मिथिलेश मिश्रा ने जनसत्ता संवाददाता को बताया कि जिन कैदियों की मौत हुई है, उनको दूसरी बीमारी के इलाज के लिए भागलपुर मेडिकल कालेज अस्पताल भेजा गया था। ये लोग क्रमश: 32, 72, 80 और 96 साल उम्र के थे। इनकी मौत के बाद नमूनों की जांच की गई तो इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। भागलपुर जेल में और कोई संक्रमण का मामला सामने आने से उन्होंने इंकार किया है। इन्होंने बताया कि अब तक बिहार में जेल कर्मचारी और कैदियों को मिलाकर कुल 96 संक्रमित है। जिनको अलग कर इलाज कराया जा रहा है।

सूत्र बताते है कि बुधवार को बिहार की सभी जेलों के साथ जेल आईजी और दूसरे अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग होगी। इसमें वहां के ताजा हालात, संक्रमण के आंकड़े और इंतजाम की जानकारी ली जाएगी। यों जेल आईजी ने आदेश दिया है कि नए गिरफ्तार आरोपियों को सीधे जेल भेजने के बजाए कैदियों के लिए बने पृथकवास शिविरों में 14 दिनों रखा जाए। इसके बाद ही जेल भेजा जाए।

इससे दूसरे बंदियों को संक्रमण की चपेट में आने से रोका जा सकेगा। ऐसे में अब भागलपुर के गिरफ्तार अभियुक्त 14 दिनों के लिए मुंगेर में बने पृथकवास शिविर में भेजे जा रहे है। जेल के संयुक्त सचिव सह निदेशक दीवान जफर हुसैन खां बताते है कि राज्य में ऐसे 16 शिविर बने है। जहां कैदियों को मुख्य जेल भेजने के पहले 14 दिन पृथकवास रखने का वहां इंतजाम है।

वैसे उन्होंने बिहार की जेलों को संक्रमण से अब तक सबसे सुरक्षित माना है। बाहरी लोगों को जेल के अंदर जाने से रोक दिया गया है। यहां तक कि निरीक्षण तक करने की अभी मनाही है। जो कर्मचारी या वार्डन घर से या कहीं बाहर जाकर लौटते है, उन्हें भी अंदर ड्यूटी लगाने पर पाबंदी है। वैसे कर्मचारी को बाहर गुम्बदों या में गेट पर ड्यूटी पर तैनात किया जा रहा है।

जेल आईजी मिश्रा बताते है कि सूबे की सभी जेलों को मिलाकर कुल 41600 के करीब कैदी बंद है। इनमें से केवल 40 ही संक्रमित होने की रिपोर्ट आई है। जिन्हें फौरन एकांतवास कर दिया गया। मगर भागलपुर की विशेष केंद्रीय कारा में संक्रमण से चार मौतें चिंता की बात है। इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे है। ताकि संक्रमण दूसरे कैदियों में न फैले।

बिहार में आठ केंद्रीय, 32 जिला व 18 सब-जेलें है। जिनकी क्षमता 44900 बंदियों की है। जिनमें 40 कैदी ही संक्रमित मिले हैं। इनमें ज्यादातर मधुबनी, पूर्णिया, बेगूसराय वगैरह जेलों के है। जेल आईजी बताते है कि कैदियों से ज्यादा कर्मचारी संक्रमित पाए गए है। बिहार की विभिन्न जेलों के 55 कर्मचारियों की रिपोर्ट सकारात्मक आई है। इन्हें वहां के ज़िले में बने कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया है। ये सभी कर्मचारी व कैदी एक दूसरे के संपर्क में आने से संक्रमित हुए है। जेलों में भी एकांतवास सेंटर बनाए गए है। जहां जेल के डाक्टर इनका इलाज करते है।

जेल में कर्मचारियों के संक्रमण का पहला मामला बेगूसराय जेल के कम्प्यूटर आपरेटर का सामने आया था। जेल ड्यूटी आने के दौरान गेट पर थर्मल स्क्रिनिग जांच में संक्रमण के लक्षण दिखाई दिए थे। इसे फौरन अस्पताल में भर्ती किया गया। दूसरा मामला औरंगाबाद जेल का था। यह दिल्ली से आया था।

बताया कि गृह मंत्रालय के मार्च महीने में मिले दिशानिर्देश का जेल प्रशासन पालन कर रहा है। स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मगर बिहार की जेलों से किसी भी कैदी को पेरोल पर रिहा नहीं किया गया है। दूसरे राज्यों में ऐसा हुआ है। बिहार सरकार ने कैदियों के रिहा न करने का फैसला किया है।

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