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मनुहार में लगे लालू और शरद मगर मुलायम नहीं पसीजे

बिहार में बने भाजपा-विरोधी महागठबंधन से समाजवादी पार्टी के यकायक बाहर निकलने से झटका लगने के बाद राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और जद (एकी) प्रमुख शरद यादव ने शुक्रवार मुलायम सिंह यादव ...

Author नई दिल्ली | September 5, 2015 9:26 AM

बिहार में बने भाजपा-विरोधी महागठबंधन से समाजवादी पार्टी के यकायक बाहर निकलने से झटका लगने के बाद राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और जद (एकी) प्रमुख शरद यादव ने शुक्रवार मुलायम सिंह यादव से यहां मिलकर स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन गठबंधन को सपा मुखिया की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला।

सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने गुरुवार को लखनऊ में पार्टी के गठबंधन से अलग होने की घोषणा की थी। इसके बाद सकते में आए राजद और जद (एकी) ‘महागठबंधन’ को बचाने की जुगत में जुट गए हैं। यादव ने कहा था कि राज्य में सीटों के बंटवारे को लेकर बिहार के बड़े दलों ने सपा से सलाह-मशविरा नहीं किया, जिससे पार्टी  ‘अपमानित’ महसूस कर रही है।
गठबंधन को बचाने की कोशिश में पटना से दिल्ली आए लालू प्रसाद ने मुलायम के साथ दो घंटे चली बैठक के बाद कहा, बातचीत चल रही है। बातचीत जारी रहेगी। सभी 200 सीटें (राजद और जद-एकी, दोनों की सौ-सौ) नेताजी और समाजवादी पार्टी की हैं। जब साथ आए तो देश में संदेश गया कि हम भाजपा को हरा देंगे। उन्होंने कहा, मुलायम हमारे अभिभावक हैं। उन पर सबसे ज्यादा जिम्मेदारी है। सांप्रदायिकता देश के लिए खतरा है।
चाहते हैं। हमने नेताजी से इस पर फिर से विचार करने को कहा है,  ताकि बिहार में एक समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष सरकार बन सके। लालू और मुलायम सिंह के बीच हुई इस बैठक में शरद यादव भी मौजूद थे। मुलायम के समधी लालू ने सपा प्रमुख के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी हवाला देते हुए कहा कि उनके पास सारे अधिकार हैं।
गौरतलब है कि लालू की बेटी का विवाह मुलायम के भाई के पोते के साथ हुआ है। बहरहाल  बैठक के बाद अभी तक सपा ने कुछ नहीं कहा है। शरद यादव ने यह जरूर कहा कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। शरद ने कहा, बातचीत चल रही है। आपको एक-दो दिन में कुछ अच्छी खबर मिलेगी। इसका सीटों से कोई लेना-देना नहीं है। कुछ आंतरिक मामले हैं, जिन पर मीडिया में चर्चा नहीं होनी है। बिहार में भाजपा-विरोधी गठबंधन बनाए रखने के लिए मुलायम को मनाने के प्रयास में शरद यादव गुरुवार को भी उनसे मिले थे।
इधर पहचान गुप्त रखने की शर्त पर सपा नेताओं ने बताया कि मुलायम कांग्रेस के साथ होने से खुश नहीं हैं। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सपा की विरोधी पार्टी है और प्रदेश में जद (एकी) और राजद का कोई जनाधार नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ रैलियों में देखा जाना, सपा समर्थकों को पसंद नहीं आएगा। अभी हाल ही में सोनिया ने संसद का कामकाज आसानी से चलने देने में सहयोग करने के लिए सपा प्रमुख की आलोचना भी की थी। उस दौरान कांग्रेस लगातार ललित मोदी विवाद, भूमि विधेयक और व्यापमं घोटाले को लेकर संसद का कामकाज बाधित कर रही थी।
  मुलायम को मनाने में लगे लालू प्रसाद ने कहा, देश सांप्रदायिकता के कारण संकट का सामना कर रहा है। इस लड़ाई में प्रत्येक की भूमिका है। हमने नेताजी से कहा कि अगर इस वर्ष बिहार में चुनाव हो रहे हैं, तो उसके बाद उत्तर प्रदेश में भी होंगे। हमें उन्हें साथ मिलकर लड़ना होगा। उधर पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी विश्वास जताया कि मामला सुलझ जाएगा और सपा इस धर्मनिरपेक्ष गठबंधन में लौट आएगी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, हम पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ कि सपा ने धर्मनिरपेक्ष महागठबंधन से बाहर जाने का फैसला किया।
 उधर शरद यादव ने कहा कि मुलायम के साथ आज हुई बैठक में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई बात नहीं हुई। उन्होंने कहा, हमने गठबंधन को मजबूत बनाने के बारे में बातचीत की। हमने आज सीटों के बंटवारे को लेकर कोई बात नहीं की। मुलायम सिंह जी के साथ यह कोई मसला नहीं है। गठबंधन पहले मौजूद था, अभी भी है और भविष्य में भी रहेगा।
 गौरतलब है कि सपा ने गुरुवार को बिहार में भाजपा-विरोधी गठबंधन से हटने की घोषणा करते हुए कहा था कि सीट बंटवारे के मुद्दे पर उससे सलाह नहीं लेने के कारण वह अपमानित महसूस कर रही है। बिगड़े हुए मामले को संभालने की कोशिश में लालू पटना से यहां राजधानी पहुंचे और सपा प्रमुख से उनके आवास पर भेंट की। जद (एकी) अध्यक्ष शरद यादव भी इस दौरान वहां मौजूद थे। शरद यादव ने गुरुवार को मुलायम से बात कर उन्हें मनाने की कोशिश की थी।
उन्होंने कहा कि वे इस मामले पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से चर्चा करेंगे।
 सपा प्रमुख पूर्ववर्ती जनता परिवार के छह धड़ों के संयुक्त दल के नेता भी हैं। शरद यादव ने इन अटकलों को खारिज किया कि सपा भाजपा के इशारों पर चल रही है। कुछ वक्त पहले मुलायम सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की थी और सोमवार को रामगोपाल यादव ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। इन दोनों मुलाकातों के बाद से ही कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

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