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फैसला सुनाने के दौरान जज ने कहा- पटना HC में भ्रष्टाचार ‘ओपन सीक्रेट’, पूरी बेंच ने सुनवाई करने पर लगा दी रोक

मुख्य न्यायाधीश ए.पी शाही ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 11 जजों वाली बेंच गठित की और उनकी अगुवाई वाली इस बेंच ने गुरुवार को सिंगल जज के आदेश की कड़ी निंदा के साथ कहा कि यह न्यायिक पदानुक्रम, सत्यनिष्ठा और अदालत के गौरव पर हमले के समान है।

पटना हाईकोर्ट के जज राकेश कुमार। (फाइल फोटोः patnahighcourt.gov.in)

बिहार में पटना हाईकोर्ट ने अपने सीनियर जज राकेश कुमार के खिलाफ फरमान जारी किया है। 11 जजों वाली पूरी बेंच ने उनके द्वारा मामलों की सुनवाई और उन पर फैसला सुनाने को लेकर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने ऐसा इसलिए किया है, क्योंकि उक्त जज का मानना है कि पटना हाईकोर्ट में भ्रष्टाचार ओपन सीक्रेट जैसा है। बुधवार (28 अगस्त, 2019) को उन्होंने पारित अपने एक आदेश में हाईकोर्ट और पूरी न्यायिक प्रणाली में कथित जातिवाद और भ्रष्टाचार पर चिंता जताते हुए यह तक कहा था, “सूबे की निचली अदालतों में भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारियों को बढ़ावा मिल रहा है।”

गुरुवार को हाईकोर्ट में 11 जजों वाली बेंच ने अभूतपूर्व कार्रवाई में जज के एक दिन पुराने पारित आदेश को गुरुवार को “निलंबित” कर दिया। बिहार के महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि जस्टिस राकेश कुमार ने बुधवार को पारित अपने आदेश में हाईकोर्ट और पूरी न्यायिक प्रणाली में कथित जातिवाद और भ्रष्टाचार पर चिंता व्यक्त की थी। आदेश में रिटायर या जिनका निधन हो गया है, ऐसे पूर्व जजों के खिलाफ भी कुछ प्रतिकूल टिप्पणी की गई थी।

उनके मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश ए.पी शाही ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 11 जजों वाली बेंच गठित की और उनकी अगुवाई वाली इस बेंच ने गुरुवार को सिंगल जज के आदेश की कड़ी निंदा के साथ कहा कि यह न्यायिक पदानुक्रम, सत्यनिष्ठा और अदालत के गौरव पर हमले के समान है। बेंच ने इसके बाद कुमार के आदेश को “निलंबित” कर दिया।

महाधिवक्ता के अनुसार, पूरी बेंच ने यह भी फैसला किया कि सिंगल जस्टिस के आदेश की सामग्री कहीं भी बांटी नहीं जाएगी और आदेश को आगे की कार्रवाई के लिए प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के पास रखा जाएगा। जस्टिस कुमार ने उक्त आदेश भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपी पूर्व आईएएस अधिकारी के.पी रमैया को एक सतर्कता अदालत द्वारा जमानत दिए जाने पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दिया था।

जस्टिस कुमार ने 23 मार्च 2018 को रमैया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी जिसके बाद सतर्कता अदालत में आत्मसमर्पण करने पर उनको जमानत मिली थी। इससे पहले, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा कोर्ट की रजिस्ट्री में छपे एक नोटिस में कहा गया था कि जस्टिस कुमार के समक्ष पेंडिंग सभी मामले तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाते हैं और कोर्ट मास्टर को यह निर्देश दिया जाता है कि वह बताएं कि किन हालात में निष्पादित किया जा चुका मामला अदालत के समक्ष सुनवाई के लिए लाया गया। (पीटीआई-भाषा इन्पुट्स के साथ)

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