जेपी के विचार सिलेबस से हटे तो बोले बिहार के शिक्षा मंत्री- रह गया था चकित, CM का भी फोन आया, जो थे नाखुश

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके चिर प्रतिद्वंद्वी लालू प्रसाद यादव ने 1974 के ‘‘जेपी आंदोलन’’ से ही राजनीति में प्रवेश किया था। पूर्व मुख्यमंत्री यादव ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर अखबार की एक खबर साझा करते हुए इसे बिहार में शिक्षा के ‘‘भगवाकरण’’ की कोशिश बताया था।

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिवंगत जयप्रकाश नारायण। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने राज्य के एक विश्वविद्यालय द्वारा राजनीति विज्ञान के अपने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम से समाजवादी विचारक राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के विचारों को हटाने पर नाखुशी जतायी है। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सारण जिले में जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय के प्राधिकारियों को बृहस्पतिवार को सरकार की नाखुशी से अवगत कराया।

चौधरी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘जब बुधवार को सुबह मैंने खबर पढ़ी तो मैं चकित रह गया। मैंने विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और उच्चतर माध्यमिक निदेशालय के अधिकारियों को फोन किया जिन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। तब तक मुझे मुख्यमंत्री का भी फोन आया जो इससे नाखुश थे।’’

मंत्री ने बताया कि उन्हें विश्वविद्यालय के अधिकारियों से मालूम हुआ कि 2018 में एक विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं के अनुसार पाठ्यक्रम में यह बदलाव किए गए। नयी शिक्षा नीति आने के बाद इस समिति का गठन किया गया था।

चौधरी ने कहा, ‘‘हालांकि, सरकार ने कहा कि प्रशासन को जानकारी दिए बिना इस तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। भारतीय राजनीति में समाजवाद एक अनूठी विचारधारा रही है और बिहार इसकी मुख्य प्रयोगशालाओं में से एक रहा है। इसके अलावा राज्य में माटी पुत्र जेपी के लिए मजबूत भावनाएं रही हैं।’’

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके चिर प्रतिद्वंद्वी लालू प्रसाद यादव ने 1974 के ‘‘जेपी आंदोलन’’ से ही राजनीति में प्रवेश किया था। पूर्व मुख्यमंत्री यादव ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर अखबार की एक खबर साझा करते हुए इसे बिहार में शिक्षा के ‘‘भगवाकरण’’ की कोशिश बताया था।

चौधरी ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि राजनीतिक रूप से प्रासंगिक किसी भी विचारक को पाठ्यक्रम से बाहर नहीं करना चाहिए।’’ शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि वह राज्यपाल फागू चौहान के समक्ष इस मामले को उठाएंगे जो राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं।

चौधरी ने कहा, ‘‘मेरे विभाग में अधिकारियों को राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में भी जांच करने और अगर वहां पाठ्यक्रमों में ऐसे बदलाव किए गए हैं, तो उसमें उचित तरीके से हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए गए हैं।’’

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