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YouTube चैनल, सोशल मीडिया मैनेजर, राजनीतिक बयानबाजी… काफी पहले शुरू हो चुकी थी गुप्तेश्वर पांडेय की चुनावी तैयारी, नीतीश ने भी लगातार दिया साथ

गुप्तेश्वर पांडेय ने कई माह पहले ही अपना खुद का यूट्यूब चैनल शुरू कर दिया था और प्रोफेशनल लोगों द्वारा उनका फेसबुक और ट्विटर अकाउंट मैनेज किया जा रहा था।

Author Edited By नितिन गौतम पटना | Updated: September 28, 2020 11:33 AM
gupteshwar pandey bihar election 2020 jdu nitish kumarसीएम नीतीश कुमार ने हाल ही में गुप्तेश्वर पांडेय को जदयू की सदस्यता दिलाई थी। (पीटीआई फोटो)

बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने रविवार को जदयू की सदस्यता ग्रहण की। खुद सीएम नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलायी। बता दें कि गुप्तेश्वर पांडेय इसी माह की 22 तारीख को भारतीय पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। उसके बाद से ही उनके राजनीति में शामिल होने की अटकलें लगायी जा रहीं थी। हालांकि पूर्व डीजीपी ने काफी पहले से ही राजनीति में आने की तैयारी शुरू कर दी थी।

बता दें कि गुप्तेश्वर पांडेय ने कई माह पहले ही अपना खुद का यूट्यूब चैनल शुरू कर दिया था और प्रोफेशनल लोगों द्वारा उनका फेसबुक और ट्विटर अकाउंट मैनेज किया जा रहा था। गोपालगंज में हुए तिहरे मर्डर केस में जिस तरह से उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाए और सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के मामले में गुप्तेश्वर पांडेय ने जैसी सक्रियता दिखाई, उसके बाद से ही वह लगातार चर्चाओं में बने हुए हैं।

गौरतलब है कि गुप्तेश्वर पांडेय को स्वैच्छिक रिटायरमेंट के लिए तीन महीने के नोटिस पीरियड में भी छूट दी गई है। जिसके चलते रिटायरमेंट के सिर्फ पांच दिन बाद ही जदयू में शामिल हो गए। पार्टी में शामिल होने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि वह पार्टी के दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे लेकिन जदयू सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी को पार्टी बक्सर या शाहपुर से आगामी विधानसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बना सकती है।

ऐसी भी चर्चाएं हैं कि अगर गुप्तेश्वर पांडेय विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते हैं तो पार्टी उन्हें आगामी लोकसभा उप-चुनाव में वाल्मिकी नगर से अपना उम्मीदवार बना सकती है। राजनीति पर अपनी नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि गुप्तेश्वर पांडेय का जदयू में शामिल होना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। इससे पहले भी वह कई बार सत्ताधारी सरकार का समर्थन कर चुके हैं।

गौरतलब है कि गुप्तेश्वर पांडेय ने इससे पहले साल 2009 में भी वीआरएस लिया था और उनके 2009 के लोकसभा चुनाव में बक्सर से चुनाव लड़ने की चर्चाएं थीं। हालांकि जब भाजपा के लालमणि चौबे ने सीट खाली करने से इंकार कर दिया तो पांडेय को नीतीश सरकार की सिफारिश पर आईजीपी के पद पर तैनाती दी गई थी।

सुशांत सिंह राजपूत मामले में भी वह टीवी चैनल्स और सोशल मीडिया पर सरकार के समर्थन में ही बोले हैं। मामले की जांच के लिए मुंबई गए बिहार पुलिस के अधिकारी को क्वारंटीन करने पर भी गुप्तेश्वर पांडेय ने सवाल खड़े किए थे। जब रिया चक्रवर्ती ने पटना में उनके खिलाफ एफआईआर करने पर सीएम नीतीश कुमार से सवाल किया था तो तब भी पांडेय ने कहा था कि “रिया चक्रवर्ती की औकात नहीं है मुख्यमंत्री से सवाल करने की।”

मई माह में जब तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार पर गोपालगंज तिहरे मर्डर केस  को लेकर सवाल खड़े किए थे। दरअसल जदयू विधायक अमरेंद्र पांडेय पर इस हत्याकांड की साजिश रचने का आरोप लगा था। तब भी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा था कि “बिना पूरी जांच किए किसी को भी हत्या की साजिश रचने के लिए गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।” विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर भी परोक्ष रूप से हमला बोलते हुए पांडेय ने कहा था कि “संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को आरोप लगाने से पहले तथ्यों को जांच लेना चाहिए।”

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