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बिहार में बाढ़ ने त्यौहार पर फेरा पानी! पटना के बाद सबसे प्रभावित क्षेत्र भागलपुर, राहत कैंप हैं खस्ता व पशु चारे का घोर अभाव

सीएम नीतीश कुमार ने भी खुद हवाई सर्वे किया था। जिलाधीश और दूसरे अधिकारी रोजाना इलाके व शिविर का निरीक्षण करने निकलते हैं। उन्हें फिक्र है कि बड़े बांध कटाव की वजह से टूटे तो ज़िले में बड़ी बर्बादी का सबब बन जाएगी, पर आयुक्त ने अभी तक केवल एक शिविर जाकर खानापूर्ति की है।

पटना के राजेंद्र नगर इलाके में रविवार को बाढ़ के पानी में तैरती बोतलों को बंटोरते हुए कूड़ा बीनने वाला बच्चा। (फोटोः पीटीआई)

बिहार में दो दिन से रुक-रुक कर हुई बारिश ने बाढ़ पीड़ितों के लिए आफत बनने के साथ दुर्गा पूजा मेले का मजा भी किरकिरा किया है। इसी बीच, मंत्री और आलाधिकारियों के दौरे शुरू हुए। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भागलपुर में बाढ़ राहत शिविरों का मुआयना किया। डाक्टरों की केंद्र से आई टीम और यहां के जेएलएन भागलपुर मेडिकल कालेज के अधीक्षक आरसी मंडल और डाक्टरों संग बैठक भी की, जिसमें बाढ़ के बाद महामारी फैलने के खतरे पर सचेत रहने की हिदायत दी, पर राहत शिविरों की हालत खास्ता है। पशु चारे का घोर अभाव है। चारे की थोड़ी सी व्यवस्था कर खानापूरी की गई है।

बाढ़ पीड़ित शंकरपुर दियारा के सुखदेव महतो ने बताया कि जरूरत के मुताबिक चारा नहीं मिल रहा है। ये टीएनबी कॉलेजिएट स्कूल के शिविर में करीब पंद्रह दिनों से है। छोटे बच्चों को समय पर दूध और बड़ों को भोजन भी कम मात्रा में देने की शिकायत शिविरों में मिली। गंगा नदी का पानी धीमी गति से नीचे सरक रहा है। जिले के 16 प्रखंड के 122 पंचायत के 419 ग़ांव की तकरीबन पांच लाख आबादी और एक लाख मवेशी बाढ़ से प्रभावित हैं। बिहार में पटना के बाद सबसे प्रभावित इलाका भागलपुर है। केंद्रीय जांच दल ने भी आकर शनिवार और इतवार को मुआयना किया है।

वहीं, सीएम नीतीश कुमार ने भी खुद हवाई सर्वे किया था। जिलाधीश और दूसरे अधिकारी रोजाना इलाके व शिविर का निरीक्षण करने निकलते हैं। उन्हें फिक्र है कि बड़े बांध कटाव की वजह से टूटे तो ज़िले में बड़ी बर्बादी का सबब बन जाएगी, पर आयुक्त ने अभी तक केवल एक शिविर जाकर खानापूर्ति की है। मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव व भागलपुर जिले के प्रभारी सचिव चंचल कुमार ने कटाव ग्रस्त और बाढ़ से घिरे इलाके का दौरा कर सभी महकमा के अधिकारियों के साथ सर्किट हाउस में बैठक की।

बिहार की राजधानी पटना में चार अक्टूबर को बाढ़ और जलजमाव प्रभावित इलाकों का चॉपर से मुआयना करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (फोटोः पीटीआई)

वह बोले कि पैसों की कमी नहीं है। बाढ़ पीड़ितों तक राहत हर हाल में पहुंचे। कोताही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पशु चारे की कमी नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य महकमा कैंप लगाकर जांच करे। जरूरी दवा का वितरण करे। बच्चों को समय पर दूध मुहैया कराया जाए। उन्होंने राहत शिविरों में जाकर वहां वितरित की जा रही सामग्री का मुआयना किया। ज़िले में इक्कीस सरकारी राहत शिविर चल रहे है और इतने ही स्वास्थ्य शिविर।

प्रभारी सचिव ने बाढ़ से पूरी तौर पर घिरे लोकमानपुर पंचायत का एनडीआरएफ के मोटरवोट से मुआयना किया। फलका गांव के नजदीक बांध के कटाव का निरीक्षण किया। साथ ही जिलाधीश प्रणब कुमार, नौगछिया की एसपी निधि रानी, जनसंपर्क अधिकारी बिंदुसार मंडल बगैरह अधिकारी थे। वे तीन दिनों से भागलपुर के दौरे पर है। मंगलवार को दोपहर कटिहार के लिए रवाना हुए हैं। वहां का इलाका भी बाढ़ से जूझ रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री चौबे मेडिकल कालेज अस्पताल के डेंगू वार्ड भी गए। अब तक सौ से ज्यादा लोग डेंगू के चपेट में आ चुके हैं। डाक्टरों की एक केंद्रीय टीम भागलपुर में दो हफ्ते कैंप करेगी। वह इस दौरान महामारी से बचाने के उपाय भी सुझाएगी।

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