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RJD से नाराज जीतन राम मांझी बोले- जो भी हूं नीतीश कुमार के चलते हूं, Congress से कहा- स्‍वतंत्र नेतृत्‍व कीजिए

Bihar Election 2020: बिहार में महागठबंधन के सदस्‍य, HAM नेता जीतन राम मांझी RJD से नाराज हैं। वह कांग्रेस के नेतृत्‍व में एक अलग गठबंधन खड़ा करने की सलाह भी दे रहे हैं तो जेडीयू खेमे में जाने की संभावना को भी खारिज नहीं कर रहे हैं। फिलहाल, उन्‍होंने अपने अल्‍टीमेटम की मियाद 20 जुलाई तक और बढ़ा दी है।

Jitan Ram Manjhi, Patna, Bihar, JDUबिहार के पूर्व CM और HAM नेता जीतन राम मांझी ने Jansatta से बातचीत में कहा कि वह आज जो कुछ हैं, वह नीतीश कुमार की वजह से हैं। हालांकि, उन्होंने इंटरव्यू के दौरान यह भी कहा कि JD(U) चीफ से उन्हें धोखा मिला है। (फोटोः जनसत्ता ऑनलाइन/नरेंद्र कुमार)

बिहार में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दोनों मुख्‍य गठबंधनों (एनडीए व महागठबंधन) के छोटे दल परेशान हैं। एनडीए के घटक दल एलजेपी की नाराजगी जहां मामूली बयानबाजी तक सीमित दिखाई दे रही है, वहीं महागठबंधन के साथी जीतन राम मांझी (हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा अध्‍यक्ष) ने खुल कर विद्रोही तेवर अपना रखा है। कांग्रेस मध्‍यस्‍थता की कोशिश में है और मांझी ने अपने ‘आखिरी निर्णय’ के लिए कुछ और दिनों की मोहलत दी है। हालांकि, वह इसे महागठबंधन को ‘ट्रैक पर लाने की कोशिश’ बताते हैं।

मांझी नेे विजय कुमार झा के साथ इंटरव्‍यू (जिसका वीडियो नीचे है) में कहा कि वह कांग्रेस को सलाह दे चुके हैं कि आप गठबंधन से निकलिए, अलग नेतृत्‍व करिए, हम सब साथ आएंगे। साथ ही, नीतीश खेमे में जाने की अटकलों के बीच उन्‍होंने कहा कि बिहार के मुख्‍यमंत्री के नाते नीतीश कुमार से उनकी मुलाकात हुई है और आगे भी होती रहेगी। पढ़िए मांझी से हुई बातचीत का अंश। वीडियो से इसकी कॉपी अभिषेक गुप्‍ता ने तैयार की है।

सवालः क्यों इस वक्त थोड़ा विद्रोही तेवर दिखा रहे हैं, अल्टीमेटम दे रहे हैं, क्या चाहते हैं?

जवाबः गठबंधन में एक पार्टी की सुपरमैसी हो सकती है, पर सब कुछ उन्हीं के कहने से हो जाए, वैसा नहीं होना चाहिए। ये लोकतांत्रिक सेटअप नहीं है। इसलिए हम 2019 से ही मांग कर रहे हैं कि महागठबंधन में सबको मिला कर कोऑर्डिनेशन कमेटी बननी चाहिए। उसी के विचारोपरांत ही निर्णय (राजनीतिक या अन्य) लिए जाने चाहिए। लेकिन RJD के लोग कहते हैं कि वे जो तय करते हैं वही गठबंधन को मानना चाहिए। अगर लोग उनकी नहीं मानते हैं, तो जहां मन है जाएं।

हमारा कहना है कि गठबंधन है तो मिलकर फैसला लेना चाहिए। इसलिए ये कहना कि हमारी गतिविधि अन्यथा है, सही नहीं है। हम सही ट्रैक पर लाना चाहते हैं कि लोग लोकतांत्रिक ढर्रे पर चलें। हम राइट ट्रैक पर गठबंधन को लेकर जाना चाहते हैं।

सवालः आपसे किसने कहा कि जो RJD कहा रहा है वही सब साथियों को मानना पड़ेगा। जो नहीं मानेगा, वह जहां जाना चाहें जाएं?

जवाबः अखबारों में बात आई है। एक-एक आदमी से आप पूछिएगा। सबने कहा कि अमुक आदमी ने कहा कि यहीं पर सब कुछ है। एक आदमी सर्वेसर्वा है। उन्होंने जो कहा, जो निर्णय लिया, दैट इज़ ऑल (वही सब कुछ है)। इसी चीज को अगर गठबंधन के लोगों को मानना है तो मानें, नहीं तो बाहर जाएं। रास्ता लें। यही कारण है कि उपेंद्र कुशवाहा जी हों या साहनी साहब हों या कांग्रेस हों या फिर हम (HAM) हों, सब लोग एक ही बात कर रहे हैं कि आपस में तालमेल बैठे। कॉर्डिनेशन कमेटी बने और उसके बाद कोई निर्णय हो।

किस आदमी ने कहा है? हम अभी आपसे नहीं बोलेंगे। बिहार की राजनीति में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति को मालूम है कि किसने ऐसा कहा है।

सवालः आपको जब संकेत मिल गया है कि आपकी बात नहीं सुनी जाएगी, तब आप अगला कदम क्या लेने जा रहे हैं?

जवाबः 25 जून तक हमारा टारगेट था, लेकिन इस बीच कांग्रेस के लोगों ने दखल दी। दिल्ली में हमारी उनसे बात हुई। उन्होंने एक सप्ताह का वक्त मांगा। 1 जुलाई को वह समय समाप्त हो गया। दूसरी जुलाई को हमारी बात हुई, तो शक्ति सिंह गोहिल का कहना था कि वह आएंगे और बात करेंगे।

इधर आपने सुना होगा कि दो दिन पहले आए हैं और वार्ता का दौर चल रहा था। लेकिन इसी बीच, आज (10 जुलाई) से पटना में पुनः लॉकडाउन हो गया, इस पर उनका कहना था कि 16 जुलाई के बाद सब बात करेंगे। 15 से 20 (जुलाई) तक हम पुनः कांग्रेस की मध्यस्थता की आस लगाकर बैठे हैं।

हम ये चाहते हैं- कोई आदमी ये न कहे कि महागठबंधन अमुक आदमी के चलते टूटा है। वो कहे कि लाचारी अगर हुई है या अमुक दल के आदमी बाहर गए हैं। इसी क्रम में जब कांग्रेसी सामने आए हैं, तब उन्हें भी मौका दे रहे हैं। दो मौके तो हो गए, तीसरा मौका 15-20 तक है। ये भी देते हैं। इसके बाद अगर नहीं होगा तो फिर 21 तारीख के बाद नई रणनीति के तहत काम करेंगे।

Bihar election result graph, Grand Alliance Strike Rate, Bihar Election 2015 में जीतन राम मांझी की पार्टी केवल एक सीट जीत पाई थी, 21 पर लड़ी थी।

सवालः आप ने सोचा नहीं कि नहीं हुआ तो क्या करेंगे, मन तो बना लिया होगा, सिर्फ घोषणा करनी बाकी है?

जवाबः मीडिया और आप से हम ये सब साझा नहीं कर पाएंगे, क्योंकि ये रणनीति का हिस्सा है। रणनीति का खुलासा समय पर किया जाएगा।

सवालः कल (9 जुलाई) शायद कांग्रेसी नेताओं ने आपके साथ चाय पी। परसों उन्होंने तेजस्वी यादव के साथ डिनर किया था। डिनर पर क्या बात हुई, आपको चाय पर उसके बारे में क्या बताया गया, कुछ बताना चाहेंगे?

जवाबः हमने बात की, वे प्रयास कर रहे हैं। वार्ता का दौर चल रहा है। न सिर्फ तेजस्वी जी और राबड़ी जी से उनकी बात हुई, बल्कि उपेंद्र कुशवाहा जी से आज (10 जुलाई) बात हो रही होगी। साहनी जी (वीआईपी पार्टी के) से भी बात हो चुकी होगी। और तो और, हमसे बात करने के बाद वे लोग कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के दफ्तर में भी गए थे और वहां भी बात चल रही है। जो हमारे गठबंधन का नया साथी होगा- अगर आ जाते हैं तो। कवायद चल रही है कि महागठबंधन में किसी तरह की कोई टूट न हो। और क्या किसने कहा और उस पर क्या रिस्पॉन्स आया? हम इस पर कुछ नहीं कहेंगे।

सवालः सुनने में आ रहा है कि आरजेडी का रुख ये है कि उन्होंने दोनों ही चुनाव (लोकसभा और पिछले विस) में आपको दोनों गठबंधन के साथ देख लिया। उनका ये मानना है कि दोनों ही चुनाव में आपका जो वोट बैंक है, वह आप वोट में ट्रांसफर नहीं करा पाए। इस वजह से वे आपको तवज्जो नहीं देना चाहते हैं। क्या आपको लगता है कि ये आपके लिए कमजोर कड़ी बन रही है?

जवाबः ऐसा नहीं है। अगर हम ट्रांसफर नहीं करा पाते, तो हमें बुलाया क्यों गया था गठबंधन में। हम तो एनडीए में थे। आज भी वही स्थिति है। हमारा वोट ट्रांसफर होगा।

असल में उन लोगों को दूसरा टारगेट मिला है। वे हिडन एजेंडा के तहत काम कर रहे हैं। इसमें ये है कि हमारा जो वोट है, वह अगर कट/बिखर जाता है, तो उससे फायदा किसी अन्य को होना है। जिसको फायदा कराना चाहते हैं। हम नाम नहीं लेना चाहते हैं। इसे समझने की जरूरत है। हिडन एजेंडा, अपने स्वार्थ के लिए। अपने मुकदमे और अपने पिता जी की बेल कराने के नाम पर वह अपना काम कर रहे हैं। और, अब वह अस्पष्ट नहीं रही है बात। बहुत स्पष्ट हो गई है। बिहार में भी सुनेंगे और दिल्ली में भी उसकी भनक हो गई है। तो वह अपने एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

वोट ट्रांसफर न होने का सवाल ही नहीं है। जहां तक वोट का सवाल है, संसद में जिस परिवार या संगठन के आधार पर वे कहते हैं कि वोट मिलेगा, उनका भी वोट फीसद 40 प्रतिशत कटा था। आज भी स्थिति ऐसी है कि विधानसभा में उनका वोट प्रतिशत कटेगा। तो यह कहना उचित नहीं है कि किसने ट्रांसफर कराया, किसने नहीं कराया। ये उचित बात नहीं होगी।

सवालः पांच साल में आपने दो चुनाव लड़े। दोनों में ही आपकी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। आपको क्या लगता है कि इस बीच आपने ऐसी क्या तैयारी की, जिससे इस चुनाव में आपका महत्व पहले के मुकाबले आपके गठबंधन साथियों की नजर में ज्यादा बढ़ जाए? इन पांच सालों में तैयारी क्या रही, चुनाव की?

जवाबः ये बात समझने की है। 21 सीट हम लड़े थे। जितना वोट पोल हुआ था, उसका 3.7 फीसदी वोट हमको आया था। 21 सीट लड़ने पर ही। लोकसभा में भी हम 19 प्रतिशत वोट ले आए। हमारा वोट का प्रतिशत कम नहीं है। आगे भी बढ़ेगा।

bihar election result-min बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में तमाम पार्टियों का प्रदर्शन (सोर्स: वीकिपीडिया)

तैयारी का जहां तक सवाल है, हम लोग जाति, धर्म, बल और पैसे के आधार पर नहीं लड़ रहे हैं। हम व्यवस्था बदलने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उस दिन का मौका मिला था, हमें सीएम बनने का या उससे पहले जब पार्टी का गठन किया था। हमारी पार्टी की प्रस्तावना है कि हम गरीब की बात करते हैं। जाति-धर्म की बात नहीं करते। इसलिए व्यवस्था की बात करते हैं। सत्ता परिवर्तन की बात नहीं करते हैं।

मान लीजिए कि हमारे यहां युवा हैं। वे गलत रास्ते पर भी जा रहे हैं, उन्हें ठेकेदारी में आरक्षण देकर हमने उन्हें सही रास्ते पर लौटाने का काम किया था। अगर नीतीश कुमार आज उसे आगे बढ़ाते तो वे लोग बहुत हद तक ठीक रहते।

महिला सशक्तीकरण का मामला आता है। हमने फैसला लिया था कि केंद्रीय विद्यालय से लेकर पीजी तक किसी भी समाज या आर्थिक स्तर की बच्ची होगी, उसे मुफ्त शिक्षा मुहैया कराएंगे। किसान आज 76 फीसदी तक बिहार में है। उनकी आज स्थिति ये है कि बहुत सारे उनमें से बिजली बिल के कारण तबाह हो रहे हैं। हमने वादा किया था कि पांच जमीनें रखने वालों की बिजली हम माफ करेंगे।

भूमि सुधार के संदर्भ में हमने कहा था कि 2015 के जून तक कोई भी आदमी बिना जमीन के – खेती करने लायक और रहने लायक जमीन को – उसे हम सेपरेट कर देंगे। चाहे कैसी भी जमीन हो। अगर खरीद कर भी देनी पड़ी तो मार्केट रेट से हम उन्हें खरीद कर मकान के लिए एक एकड़ जमीन देंगे। खेती के लिए।

हमारे इन मुद्दों को झारखंड और तमिलनाडु ने अपनाया। बदकिस्मती है कि बिहार में इसे अनसुना कर दिया गया। हम तो उस मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे और लड़ने जा रहे हैं। आज बेरोजगारों का मामला है। आरक्षण का मामला है कि न्यायपालिका में शिड्यूल कास्ट के लिए आरक्षण हो। निजी क्षेत्र और प्रमोशन में आरक्षण होना चाहिए। कॉमन स्कूलिंग सिस्टम होना चाहिए।

बाबा अंबेडकर ने 1932 में कहा था कि हमारी डबल मतदाता सूची होनी चाहिए। जैसे एमएलसी में ग्रैजुएट होते हैं और टीचर होते हैं। वे अलग-अलग वोट देते हैं। इसी प्रकार से SC में एससी वोटर होते हैं। उससे उनका विकास होता है। बदकिस्मती है कि इन मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। हमारा उन्हीं मुद्दों पर ध्यान है।

सवालः राजनीतिक रूप से RJD खेमे में आपके बारे में प्रचारित बात है कि आपने नीतीश कुमार से संपर्क साधा। वह कह रहे हैं कि आप अपनी पार्टी का विलय JD(U) में कर लीजिए। हम गठबंधन का हिस्सा आपको नहीं बनाएंगे। शायद इस वजह से आरजेडी खेमा आपको तवज्जो नहीं देमे की सोच रहा है कि इनका मन बदल रहा है। क्या, इसमें कितनी सच्चाई है?

जवाबः राजनीति संभावनाओं का खेल है। आज नीतीश उनके लिए बुरे हो गए। और, वही नीतीश जी के साथ सरकार बनाने और चुनाव लड़ने की बात की थी। आज भाजपा की बात वह कहते हैं। एक वक्त था जब बीजेपी के साथ मिलकर उन्होंने सरकार बनाई थी। राजनीति का हिसाब होता है। जनहित में बहुत से फैसले लिए जाते हैं। और अभी जब हम महागठबंधन की बात के लिए प्रयासरत हैं। कांग्रेस की बात को हम मानते हुए हम समय बढ़ाते जा रहे हैं। कहां-किसके साथ जाएंगे, आखिर चुनाव लड़ना है तो निश्चित तौर पर जन हित में जिन समस्याओं की बात हमने की, इस पर अगर किसी की सहानुभूति होगी तो अपना एजेंडा में शामिल करेंगे। निश्चित रूप से हम उनके साथ होंगे।

सवालः स्थितियों के मद्देनजर आपके सामने कितने विकल्प हैं। एक तो आपकी बात सुन ली जाए, उसके अलावा क्या विकल्प है?

जवाबः कोई विकल्प की बात हम नहीं सोचते हैं। पहले ही कहा कि सरकार परिवर्तन में, विधायक बनने में हमारी कोई रुचि नहीं है।

सवालः तो नीतीश कुमार के संपर्क में क्यों हैं?

जवाबः वह बिहार के सीएम हैं। अभी हाल में हमारे एमएलसी गए थे मिलने। हम भी गए थे मिलने। बहुत से काम हैं। अगर सीएम हमारे समय में लालू जी थे या और कोई हों तो क्या वे नहीं मिलते थे। उसी प्रकार से आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश हैं। अगर हम उनके नजदीक जाकर काम नहीं कराएंगे, तो हम जन रुचि को धोखा देते हैं। इसलिए हमको तो मिलना चाहिए, बल्कि हम उनसे कम मिलते हैं। यही जो आपका प्रश्न है, उससे डर कर। हमने अब तय किया है कि हम उनसे जल्दी-जल्दी मिलेंगे और क्षेत्र और समाज के काम कराएंगे।

ये है इंटरव्‍यू का पूरा वीडियो :

सवालः आपने कहा कि नीतीश कुमार ने आपको धोखा दिया। वह धोखा किसे कह रहे हैं, आपको सीएम पद से हटवाया था?

जवाबः भ्रम में वह हो गए थे। यह बात आपने अगर निकाली है तो वह कंफ्यूजन में हो गए थे। याद करिए, 2005 को। उन्होंने तब हमें कैबिनेट में रखा था। दो मिनट के अंदर ही आप लोगों ने कह दिया था कि दागी मंत्री है। उस वक्त डिग्री घोटाला का केस हम पर शुरू हुआ था। वैसी, परिस्थिति में उन्होंने कहा कि लोग दागी कहते हैं। हमने दो मिनट भी नहीं कहा और उन्हीं से कागज मांगकर के इस्तीफा लिख दिया था और फिर मंत्रिमंडल से हट गए थे।

आज भी हम कहते हैं कि जो कुछ भी हैं नीतीश जी के चलते हैं। अगर नीतीश कुमार चाहते तो कहते (हटने के समय) कि मांझी जी अब हो गया है। आप बहुत गलत काम कर रहे हैं…। हम एक मिनट भी नहीं रहते, इस्तीफा दे देते। लेकिन तब उन्होंने लालू और बाकी लोगों की मदद ली। किसी ने कहा कि मार देंगे। कोई बोला था कि जीतन राम मांझी पागल हो गए हैं। फिर भी हम मान कर चलते हैं कि गलतियां तकीनीकी तौर पर हो गई होंगी। पर हमको सीएम के पास जाना चाहिए और काम लेना चाहिए।

सवालः क्या बिहार में एनडीए और महागठबंधन के अलावा तीसरे विकल्प की संभावना है, अगर हां तो किस रूप में?

जवाबः हमारी कल कांग्रेसियों से इस बारे में बात हुई है। हमने कहा कि अगर राजद के लोग हिडन एडेंडा के तहत काम कर रहे हैं, जिससे भाजपा को फायदा होने वाला है। ऐसी हालत में बिहार को अगर चाहते हैं कि भाजपा मुक्त देखें, तब कांग्रेस को अपना इतिहास समझते हुए स्वतंत्र राजनीति करे। उसमें हम लोग बाकी दल के लोग हैं। चाहें रालोसपा, हम, सीपीआई और साहनी जी हों जाएंगे उनके साथ में…एक अच्छा विकल्प बन जाएगा। वैसी परिस्थिति में बिहार में नई राजनीति की संरचना होगी और बिहार में राजनीति भी बदल जाएगी। बशर्ते कांग्रेस इस बात पर आगे बढ़े।

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