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बिहार चुनाव: पैकेज नरेंद्र मोदी का सबसे बड़ा जुमला, हमें छला- यह कहकर उपेन्द्र कुशवाहा ने छोड़ा था NDA; पढ़ें इस्तीफा पत्र

दो साल पहले उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने रालोसपा को दो सीटें देने का मन बनाया था। जिसके बाद कुशवाहा भाजपा से नाराज हो गए थे और उन्होने एनडीए का साथ छोड़ दिया था।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: September 28, 2020 12:05 PM
upendra kushwaha, bihar electionBihar election 2020: दो साल पहले इस्तीफा देते हुए कुशवाहा ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। (file)

बिहार विधानसभा चुनाव में अब मात्र एक महीने का समय बचा है। जैसे-जैसे चुनाव पास आ रहे हैं तेजी से राजनीतिक समीकरण बादल रहे हैं। महागठबंधन से नाराज़ रालोसपा से भाजपा की अंतिम दौर पर बात चल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए गठबंधन में 25 सीटों की मांग की है। परंतु अब 15 सीटों पर समझौता करने को भी तैयार हो रहे हैं।

दो साल पहले उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने रालोसपा को दो सीटें देने का मन बनाया था। जिसके बाद कुशवाहा भाजपा से नाराज हो गए थे और उन्होने एनडीए का साथ छोड़ दिया था। तब कुशवाहा ने पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा बिहार को दिये गए पैकेज को जुमला बताते हुए केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। तब उन्होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘मैंने आशा और उम्मीदों के साथ आपके नेतृत्व में एनडीए का साथ पकड़ा था। 2014 लोकसभा चुनाव में आपने बिहार के लोगों से जो भी वादे किए थे, उसी को देखते हुए मैंने अपना समर्थन भाजपा को दिया था। लेकिन यह जुमला ही साबित हुआ।’

कुशवाहा ने तब इस्तीफा पत्र में लिखा था “2014 के लोकसभा चुनाव में आपने बिहार और देश के लोगों से कई वादे किए थे। इसी आलोक में मैंने आपको बिना शर्त समर्थन दिया था। हमें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री रहते हुए आप बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए उन वादों को पूरा करेंगे जो आपने गरीबों और किसानों से किया था, ताकि भारत को पारदर्शी और जिम्मेदार सरकार दिया जा सके। बिहार की अवाम ने आप पर भरोसा और विश्वास करते हुए एनडीए को अपना समर्थन दिया और लोकसभा की 40 में से 31 सीटें भी दीं। लेकिन आपके मंत्रिपरिषद में करीब 55 महीने तक रहने के बाद आपके नेतृत्व से मैं खुद को ठगा हुआ और उपेक्षित महसूस कर रहा हूं। सत्ता में आने के बाद और चुनाव से पहले जो वादे आपने जनता से किए थे उसमें विरोधाभास दिखाई दे रहा है।”

कुशवाहा ने आगे लिखा था कि 2014 और 2015 के चुनाव प्रचार के दौरान आपने बिहार के चीनी मिलों को चालू करने, बिहार को विशेष पैकेज देने, युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के अलावा बिहार के गरीब किसानों को बेहतर सुविधा देने का वादा किया था। लेकिन बहुत ही पीड़ा और दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आपके नेतृत्व में बिहार के साथ हर स्तर पर न्याय नहीं किया गया।

इस्तीफा देते हुए कुशवाहा ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। इस्तीफा देते हुए कुशवाहा ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था।

उन्होने लिखा था कि बिहार को विशेष पैकेज देने का वादा भी आपका बड़ा जुमला ही साबित हुआ। भारत सरकार ने बिहार के किसानों को तब बड़ा धोखा दिया, जब किसानों की धान की खरीदारी से केंद्र की सरकार ने हाथ खींच लिए। इससे बिहार के किसानों की हालत और भी खस्ता हो गई। बिहार में जेडीयू-भाजपा की सरकार में कानून-व्यवस्था की स्थिति रोज ब रोज बदतर होती जा रही है और अब तो लगने लगा है कि बिहार में कानून का राज नहीं अपराधियों का राज है। कानून-व्यवस्था पहले से भी बदतर हो गई है।

कुशवाहा ने तब मोदी सरकार के मंत्रिमंडल को रबर स्टैंप बताते हुए कहा था कि आपके मंत्रिपरिषद में कामकाज के जो अधिकार संविधान में दिए गए थे, उसकी लगातार अनदेखी की गई। आपका मंत्रिमंडल महज रबर स्टैंप बन कर रह गया जो बिना किसी विचार-विमर्श या राय देने के आपके आदेश का पालन करता रहा। केंद्र सरकार के विभागों में कार्यरत मंत्री और अधिकारी सिर्फ दिखावे भर के लिए थे क्योंकि सारे फैसले आप, पीएमओ और बीजेपी अध्यक्ष ही लेते थे। बीजेपी अध्यक्ष मंत्रियों के काम में जिस तरह का हस्तक्षेप करते रहे हैं उससे जिस तरह के फैसले लेते हैं वह असंवैधानिक है।

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