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बिहार चुनाव 2020: डिस्कशन में उठा शिक्षा का मुद्दा, जनता ने कहा – ग्रेजुएशन की डिग्री 6 साल में मिलती है, राजद नेता का आरोप – 5 करोड़ में कुलपति बनते हैं यहां

सबसे बड़ी बात कि अभी हमारा जो जेनरेशन है फ्यूचर जेनरेशन है उनकी स्कूल द्वारा फीस ली जा रही है। लॉकडाउन पीरिएड में ऑनलाइन क्लास चलाई हैं। फिर भी ट्रांस्पोर्टेशन फीस ली जा रही है।

यहां पहले पढ़ाई एक नंबर हुआ करती थी आज की तारीख में टीचर की स्थिति ठीक नहीं है। (सांकेतिक फोटो)

बिहार चुनाव 2020 को लेकर एक टीवी चैनल पर चल रहे जिस्कशन में शिक्षा का मुद्दा उठा तो सभी अपने अपने तरीके से अपने तर्कों के साथ जवाब देने लगे। जब टीवी एंकर करणी सेना के युवा नेताओं के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा कि न समाज का उत्थान है, देखिए हर तरफ से अर्थव्यवस्था यहां खराब है। यहां पर राजनीति बस जातिवाद की, विकास की कोई राजनीति नहीं हो रही है और देखिए सबसे बड़ी बात कि अभी हमारा जो जेनरेशन है फ्यूचर जेनरेशन है उनकी स्कूल द्वारा फीस ली जा रही है। लॉकडाउन पीरिएड में ऑनलाइन क्लास चलाई हैं। फिर भी ट्रांस्पोर्टेशन फीस ली जा रही है। डवलेपमेंटल फीस ले रहे हैं सारी फीस उनसे ली जा रही है। सिर्फ आप ऑनलाइन क्लास चलाएं तो 50 फीसदी फीस उनसे ली जाए। करणी सेना फीस मीडिया के माध्यम से ये कहना चाहती है कि फीस माफी होनी चाहिए।

इसके बाद न्यूज 18 इंडिया पर राजद नेता ने कहा कि देखिए हम जहां खडे़ हैं इसे लंगट सिंह ने बनवाया। आज बिहार विश्विद्यालय में तमाम बुद्धिजिवीयों से पूछ सकते हैं कि कुलपति का पद खरीदा जा ता है। राजद नेता ने आरोप लागाया कि 2 करोड़ और 5 करोड़ रुपए में यहां लोग कुलपति बनते हैं। ये सच्चाई है पूछ लीजिए यहां जो लोग बैठे हैं उनसे, और यहां 11 कुलपति उत्तर प्रदेश से आए हैं। इस पर एंकर ने कहा कि आपकी सरकार में क्या होता था? इस पर नेता ने कहा कि मेरे सरकार मे एक भी बार यहां से बाहर का कुलपति नहीं बना था। इसके बाद नेता ने कहा कि यह एलएस कॉलेज में हो रहा तो दिनकर की सभ्यता भी जिंदा रहनी चाहिए। यहां डिबेट हो तो इश्यू पर हो तो आज की तारीख में एक भी वाइस चांसलर बिहार का नहीं होगा, और बिहार से बाहर का होगा तो वाइस चांसलर करोड़ों रुपए में बनेगा। तो बिहार में विश्विद्यालय में 40 फीसदी सीटें खाली रहेंगी।

इसके बाद जनता के बोलने का नंबर आता है तो एंकर जनता में माइक लेकर पहुंच जाते हैं।  इसके बाद एक सज्ज्न कहते हैं कि यहां जिस जगह हम खड़े हैं इसका अपना एक गौरवशाली इतिहास है। आज की स्थिति ऐसी है कि 3 साल का ग्रेजुएशन का कोर्स पूरा होने में 5 साल 6 साल लग जाते हैं। यहां पहले पढ़ाई एक नंबर हुआ करती थी आज की तारीख में टीचर की स्थिति सबसे खराब है।

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