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‘माय’ समीकरण से आगे सवर्ण, दलितों को साथ ले लंबी लकीर खींचना चाह रही RJD, ट्विटर पर लालू भी ईजाद कर रहे नए-नए ‘नारे’

मालूम हो कि राजद ने पार्टी में संगठन पदों पर अति पिछड़ों और दलितों के लिए 45 फीसदी आरक्षित कर दिया है। पार्टी के एक नेता के अनुसार पार्टी की कोशिश संगठन को फिर से मजबूत करने की है।

Lalu Prasad Yadav, BJP, Jansatta, Bihar Electionलालू ने ट्विटर पर नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। लालू ने 3 जनवरी को दो हजार बीस, हटाओ नीतीश का नारा दिया। (फाइल फोटो)

बिहार में इस साल के अंत होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी है। राज्य में प्रमुख विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल अपने मुस्लिम-यादव (माय) समीकरण से आगे जाकर सवर्ण और दलितों को साथ लेकर लंबी लकीर खींचने की कोशिश में जुटी है।

इस क्रम में पार्टी की तरफ से जगदानंद सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देने से संकेत साफ मिलने लगे हैं। रघुवंश प्रसाद सिंह पहले से ही राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर हैं। रघुवंश प्रसाद  सांसद और केंद्रीय मंत्री रहने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के पक्ष के प्रमुखता से रखते रहे हैं।

झारखंड में महागठबंधन की सफलता के बाद पार्टी अपने सुप्रीमो लालू प्रसाद की गैरमौजूदगी में भी पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आ रही है। पार्टी ने जहां एक बार फिर पुराने चेहरों को तरजीह देना शुरू किया है वहीं, अपनी सियासी चाल को भी बदलती नजर आ रही है। सवर्ण नेताओं के साथ ही पार्टी पुराने दलित चेहरों को भी साधने में जुटी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राजद रमई राम, उदय नारायण चौधरी और वृषण पटेल से भी संपर्क साधने में जुटी हुई है।

मालूम हो कि राजद ने पार्टी में संगठन पदों पर अति पिछड़ों और दलितों के लिए 45 फीसदी आरक्षित कर दिया है। पार्टी के एक नेता के अनुसार राजद की कोशिश संगठन को फिर से मजबूत करने की है। ऐसे में मुस्लिम और यादव समीकरण को तवज्जो देकर अन्य समुदाय को दरकिनार नहीं किया जा सकता है।

इन सब बातों से इतर पार्टी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि पार्टी ने कभी जाति की राजनीति नहीं की है। राजद शुरू से ही सभी को साथ लेकर चलती रही है। ऐसे में पार्टी यदि अपने पुराने साथियों को फिर से एकजुट करने में लगी है तो इसमें गलत क्या है?

लालू ने छेड़ा ट्विटर पर नया वॉरः दूसरी तरफ लालू ने ट्विटर पर मुख्यमंत्री नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। लालू ने 3 जनवरी को दो हजार बीस, हटाओ नीतीश का नारा दिया। इसके बाद 5 जनवरी को लालू ने नीतीश कुमार के रंग बदलने पर तंज कसते हुए नया नारा दिया।

लालू ने अपने ट्वीट में लिखा कि एक गिरगिटिया दूसरा खिट्टपिट्टिया, कुल जोड़ मिला के शासन घटिया। लालू ने 17 दिसंबर को अपने ट्वीट में लिखा था कि नीतीश ने समाजवादी चरित्र तो पहले ही खो दिया था अब उसका नकली धर्मनिरपेक्षता का चोला भी उतर गया। आदतन विश्वासघाती नीतीश के पेट की आंत में छुपे दांत गिनने के बाद भी केवल सांप्रदायिक सांपों से देश के बहुरंगी सामाजिक ताने-बाने और संविधान को बचाने के लिए ही जहर पीकर उसे CM बनाया था।

पोस्टर वॉर में लालू प्रमुख चेहराः राजद की तरफ से जदयू के खिलाफ पोस्टर वॉर भी शुरू किया गया है। पोस्टर में नीतीश पर निशाना साधा गया है। लालू भले ही जेल में हों लेकिन राजद के पोस्टर में लालू ही प्रमुख चेहरे के रूप में नजर आ रहे हैं। राजद लालू के चेहरे से ही नीतीश पर निशाना साध रही है। राजद ने पिछले साल भी राजधानी पटना में नीतीश कुमार के लापता होने के पोस्टर लगवाए थे।

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