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चिराग पासवान और तेजस्वी यादव को काउंटर करने के लिए नीतीश ने बनाया ये प्लान, दलित युवाओं को लुभाने में जुटी जदयू

आपको बता दें कि पिछले दो महीनों में नीतीश सरकार ने दलित-महादलित वोट बैंक को लुभाने के लिए कई कार्य किये। पार्टी ने दोस्त से दुश्मन बने जीतन राम मांझी को पार्टी में दोबारा स्थान दिया है

nitish kumar, bihar, bihar election 2020‘मिशन दलित’ के जरिए नीतीश कुमार ने चिराग और तेजस्वी को घेरने का प्लान बनाया है।

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियां जोरों पर है। इस बीच चिराग पासवान और तेजस्वी यादव को काउंटर करने के लिए नीतीश कुमार ने खास प्लान बनाया है। दरअसल यह दोनों ही नेता बेरोजगारी और दलितों की स्थिति को लेकर जेडीयू पर लगातार हमले कर रहे थे। जेडीयू ने अब राज्य में ‘मिशन दलित’ कार्यक्रम आयोजित करने का प्लान बनाया है। यह कार्यक्रम पार्टी अक्टूबर के पहले सप्ताह से हर जिले मे आयोजित करेगी।

इस कार्यक्रम के तहत बीते 15 सालों में राज्य की नीतीश सरकार द्वारा दलित और महादलित समुदाय के लिए किये गये कार्यों को बुकलेट और सार्वजनिक बैठकों के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य इस समुदाय के युवा वोटरों को लुभाना है। जेडीयू के मंत्री महेश्वर हजारी ने जानकारी दी है कि ‘इस कार्यक्रम के तहत दलित-महादलित सम्मेलन का आयोजन जिला स्तर पर किया जाएगा। दलित वर्कस कॉन्फ्रेंस का आयोजन राज्य स्तर पर होगा।

बूथ लेवल पर पहले फेज का कैंपेन किया जा चुका है और अब अक्टूबर महीने के पहले हफ्ते से अगले फेज का कार्यक्रम किया जाएगा। दलित और महादलित के लिए इस सरकार ने जितना काम किया है उतना किसी भी अन्य सरकार ने नहीं किया और यह बात लोगों तक पहुंचाना बहुत जरुरी है। हम लोगों को अपने अगले 5 साल की योजनाओं के बारे में भी बताएंगे। इस कैंपेन की रणनीति तैयार करने के लिए एससी/एसटी विधायक, मंत्रियों और पूर्व विधायकों की एक बैठक उनके आवास पर पर 21 सितंबर को होगी।’

आपको बता दें कि पिछले दो महीनों में नीतीश सरकार ने दलित-महादलित वोट बैंक को लुभाने के लिए कई कार्य किये। पार्टी ने दोस्त से दुश्मन बने जीतन राम मांझी को पार्टी में दोबारा स्थान दिया है। सियासी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कदम चिराग पासवान को काउंटर करने तथा महादलित समुदाय को एक बेहतर संदेश भेजने के लिए उठाया गया है। नीतीश कुमार ने कुछ दिनों पहले ऐलान किया है कि राज्य में किसी भी एससी/एसटी व्यक्ति की हत्या हो जाती है तो उनके आश्रित को नौकरी दी जाएगी। पार्टी नेता नीतीश कुमार के इस कदम को मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं।

इसके अलावा पार्टी के दलित चेहरे श्याम रजक ने जब पार्टी छोड़ी तब जेडीयू ने राजद की विधायक प्रेमा चौधरी को अपने खेमे में शामिल करा इसकी भी काट निकालने की कोशिश की है। आपको बता दें कि बिहार की जनसंख्या में दलितों की कुल भागीदारी 16 प्रतिशत है। नीतीश कुमार कुर्मी जाति से ताल्लुक रखते हैं जिसकी जनसंख्या राज्य में 4 प्रतिशत है। इसके अलावा कोयरी जाति की जनसंख्या 6 प्रतिशत है। पार्टी का मानना रहा है कि यह 10 प्रतिशत जनसंख्या चुनाव में काफी अहम है।

जब नीतीश कुमार साल 2005 में सत्ता में आए थे तब उन्होंने पंचायत चुनाव में दलितों आरक्षण दिया था। इसके अलावा उन्होंने अलग महादलित वर्ग का भी गठन किया। इसमें कुल 22 दलित जातियों में से 21 दलित जाति को शामिल किया गया था उस वक्त पासवान जाति को महादलित की श्रेणी में जगह नहीं मिली थी। हालांकि साल 2018 में उन्होंने पासवान को भी महादलितों की श्रेणी में शामिल किया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 7 सितंबर को एक रैली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से कहा था कि मतदाताओं को खास कर युवा वोटरों को अंधेरे दिनों और पति-पत्नी (लालू-राबड़ी) सरकार के बारे में याद दिलाना जरुरी है। उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा था कि सरकार के अच्छे कामों को युवाओं तक पहुंचाएं। तेजस्वी यादव लगातार राज्य में रोजगार का मुद्दा उठा रहे हैं। तेजस्वी यादव कई बार कह चुके हैं कि नीतीश कुमार अपना कैंपेन रोजगार के मुद्दे पर नहीं चला सकते हैं। युवाओं को नौकरी देने की बात कह कर नीतीश कुमार ने तेजस्वी की इन सवालों का जवाब भी तैयार कर लिया है।

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