ताज़ा खबर
 

बिहार: इलाज बिना पूर्व मंत्री की मौत! चार दिन में आई कोरोना रिपोर्ट, पैरवी से मिला बेड, नहीं मिला आईसीयू

बिहार के पूर्व मंत्री मेवालाल चौधरी ने कोरोना की वजह से दम तोड़ दिया। उनके पीए के मुताबिक हालत खराब होने पर भी अस्पताल में जगह नहीं मिली। न पहचान काम आई और न ही कोई पैरवी।

mewalal chaudhary, coronaकोरोना की वजह से हुई थी जेडीयू विधायक मेवालाल चौधरी की मौत। सोर्स- ANI

बिहार के पूर्व मंत्री मेवालाल चौधरी की कोरोना से मौत हो गई। वह अपने पीछे स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल छोड़ गए हैं। जहां एक तरफ कोरोना पर काबू पाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे, वहीं कुछ ही दिनों में सरकारी तंत्र की पोल खुल गई है। दिवंगत मेवालाल चौधरी के निजी सहायक शुभम सिंह ने जो बातें बताईं, उनसे यही लगता है कि जब बड़े-बड़े नेताओं का ये हाल है तो आम आदमी की बिसात ही क्या।

दैनिक भास्कर के मुताबिक शुभम सिंह ने बताया कि डॉ. मेवालाल चौधरी की कोरोना रिपोर्ट मिलने में ही चार दिन लग गए। कुछ लक्षण सामने आए तो 12 अप्रैल को मुंगेर में आरटी-पीसीआर का सैंपल दिया गया। चार दिन बाद 16 अप्रैल को बताया गया कि वह कोविड पॉजिटिव हैं। इससे एक दिन पहले ही उनकी परेशानी बढ़ गई थी और सांस लेने में भी तकलीफ होने लगी थी। वह पटना जाना चाहते थे।

पैरवी के बाद भी नहीं मिली अस्पताल में जगह

शुभम ने बताया कि पटना के रास्ते में उन्हें बहुत खांसी बहुत आ रही थी लेकिन सांस लेने में ज्यादा तकलीफ नहीं हुई। वह रास्ते भर अदरक चबाते रहे। इसके बाद वह पटना स्थित आवास पर गए। वहां सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो IGIMS लाया गया। उनकी कोरोना जांच तो हो गई लेकिन अस्पताल ने यह कहकर बेड देने से इनकार कर दिया कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद ही व्यवस्था की जा सकेगी। अस्पताल ने कहा कि रिपोर्ट दो दिन बाद आएगी। उनके पीए के मुताबिक पहचान और पैरवी का भी कोई असर नहीं हुआ और उन्हें निराश लौटना पड़ा।

भर्ती मिली तो नहीं मिला आईसीयू

जब डॉ. चौधरी को ज्यादा परेशानी होने लगी और खांसी नहीं रुकी तो उन्होंने कहा कि पारस हॉस्पिटल में सीने का सीटी स्कैन कराओ। अस्पताल पहुंचे तो उन्हें आईसीयू में भर्ती कराने की सलाह तो दी गई लेकिन आईसीयू में बेड नहीं मिल पाया। यहां सारे बेड भरे हुए थे। ऐसे में मेवालाल को इमर्जेंसी में रखा गया और ऑक्सीजन लगा दिया गया। वह आईसीयू का इंतजार करते रहे। रात में सांस लेने में दिक्कत बढ़ी तो उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया लेकिन रात में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

शुभम का कहना है कि अगर समय पर आरटी-पीसीआर की रिपोर्ट मिली होती या फिर उन्हें आईसीयू मिल गया होता तो पूर्व मंत्री की जान बचाई जा सकती थी। यह कहानी किसी साधारण व्यक्ति की नहीं है। अगर सामान्य लोगों पर गौर करें तो हर घंटे इस तरह कई मरीजों की मौत हो रही है। राज्य केंद्र सरकार से वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की मांग कर रहे हैं लेकिन इतनी सुविधाएं मुहैया कराने में प्रशासन की सांस फूल रही है।

राजधानी दिल्ली में हाहाकार!
पिछले कई दिनों से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्र से ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। आज दिल्ली सरकार ने हाथ खड़े करते हुए कह दिया कि अगर अगले 8 से 12 घंटे में पर्याप्त सप्लाई नहीं मिली तो हाहाकार मच जाएगा। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली के अधिकतर अस्पतालों में 8 से 12 घंटे की ही ऑक्सीजन बची हुई है।

Next Stories
1 कोरोनाः UP में लॉकडाउन से जुड़े HC के आदेश पर SC की रोक, पर 2000 से अधिक केस वाले जिलों में रहेगी ‘वीकेंड बंदी’
2 भोपालः ऑक्सीजन लेवल गया डाउन, परिजन-नर्स लेने पहुंचे सिलेंडर; लौटे तो मरीज तोड़ चुके थे दम
3 कोरोना का क़हर: रांची में 104 शवों का अंतिम संस्कार, लकड़ियों के लिए लंबा इंतज़ार, गोड्डा में पहले से अर्थियाँ तैयार
यह पढ़ा क्या?
X