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बिहार: 12वीं बार यात्रा पर निकले सीएम, जानिए क्यों बिना चुनाव नीतीश कुमार को करनी पड़ रही समाज सुधार यात्रा

पिछली यात्राओं की तरह ही मुख्यमंत्री नीतीश ने पूर्वी चंपारण से इस यात्रा की शुरुआत की है। उनकी यात्रा का पहला चरण 15 जनवरी को पूरा होगा। इस दौरान वे 12 जिले को कवर करेंगे।

पश्चिम चंपारण में सामाजिक सुधार यात्रा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फोटो: ट्विटर/ NitishKumar)

“जब भी संदेह हो, यात्रा शुरू करें”। 2005 से बिहार में सत्ता की बागडोर संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह स्पष्ट रूप से हर राजनीतिक यात्रा की परिभाषित विशेषता रही है।

वर्तमान में चल रही समाज सुधार अभियान यात्रा बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की 12 वीं यात्रा है। अक्टूबर 2005 के विधानसभा चुनावों के लिए उन्होंने न्याय के साथ विकास वाले वादे के साथ न्याय यात्रा शुरू की थी, जो बाद में उनकी सरकार की टैगलाइन बन गई। नीतीश कुमार की वर्तमान राज्यव्यापी यात्रा का उद्देश्य शराब, दहेज और बाल विवाह के खिलाफ लोगों में जागरूकता पैदा करना है।

पिछली यात्राओं की तरह ही मुख्यमंत्री नीतीश ने पूर्वी चंपारण से इस यात्रा की शुरुआत की है। उनकी यात्रा का पहला चरण 15 जनवरी को पूरा होगा। इस दौरान वे 12 जिले को कवर करेंगे और पटना, गया, भागलपुर, बेगूसराय एवं पूर्णिया की यात्रा करेंगे।

लेकिन अहम सवाल यह है कि ऐसे समय में जब विधानसभा और लोकसभा चुनाव दूर हैं तो नीतीश कुमार को एक और राजनीतिक यात्रा शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी? आखिरकार उनकी 11 में से 7 राजनीतिक यात्राएं लोकसभा या विधानसभा चुनाव के करीब शुरू की गई थी।

उदाहरण के लिए नीतीश कुमार ने 2009 के लोकसभा चुनाव से तीन महीने पहले फरवरी 2009 में “विकास” यात्रा शुरू की थी। इसी तरह उन्होंने 2010 के विधानसभा चुनाव से छह महीने पहले अप्रैल 2010 में “विश्वास” यात्रा आयोजित की थी।

हालांकि सीएम नीतीश के वर्तमान राजनीतिक दौरे के पीछे कई कारण नजर आ रहे हैं। नीतीश कुमार अप्रैल 2016 से राज्य में लागू शराब निषेध कानून को सही ठहराने के राजनीतिक दबाव में हैं।

पिछले महीने गोपालगंज और पश्चिम चंपारण में हुई दो जहरीली शराब की घटनाओं ने उनकी सरकार को झकझोर कर रख दिया था। जिसके कारण विपक्ष और मीडिया ने ऐसे कानून की आवश्यकता को लेकर कड़े सवाल पूछे, जिसे ठीक से लागू नहीं किया जा सकता है। गोपालगंज में नकली देशी शराब पीने की वजह से चौदह लोगों की मौत हो गई थी और पश्चिमी चंपारण जिले में अवैध शराब के सेवन से 16 लोगों की मौत हो गई थी।

सामाजिक सुधार यात्रा के दौरान शुक्रवार को गोपालगंज पहुंचे सीएम नीतीश ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह गोपालगंज ही था जहां पहली बार 2016 में हुए जहरीली शराब के मामले में सजा सुनाई गई। जिसमें 9 लोगों को मौत की सजा दी गई और 5 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसलिए इस घटना से सबक लिया जाना चाहिए। ज्ञात हो कि 2016 की इस घटना में 18 लोगों की मौत हो गई थी।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने पिछले दिनों शराबबंदी कानून को खत्म करने की मांग की और उन्होंने कहा कि इससे राज्य को लगभग 6,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। जबकि शराब पर लगने वाला उत्पाद शुल्क राज्य को मिल सकता था।  

हालांकि बिहार सरकार में जदयू की सहयोगी भाजपा ने आधिकारिक तौर पर शराबबंदी कानून को खत्म करने की मांग नहीं की है। लेकिन कई भाजपा नेताओं ने शराब तस्कर और अवैध शराब का निर्माण करने वाले लोगों द्वारा कानून की धज्जियां उड़ाए जाने के बाद इसको लेकर बोलना शुरू कर दिया है। दरअसल बिहार पुलिस पर अत्यधिक बोझ बढ़ने की वजह से भी शराब पर ज्यादा अंकुश नहीं लग पा रहा है। 

नीतीश के सुशासन के मुद्दे को लेकर भी जदयू पर पहली बार भाजपा की ओर से हमले हो रहे हैं। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद गिरिराज सिंह ने भी कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में अपने लक्ष्य को पूरा करने में विफल रही है। पाटलिपुत्र से भाजपा सांसद राम कृपाल यादव ने भी हाल ही में संपन्न हुए संसद सत्र के दौरान नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ इसी तरह के आरोप लगाए।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि 243 विधानसभा सदस्यों वाले राज्य में 45 सीटों के साथ तीसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद जदयू बिहार सरकार की कमान संभाल रही है। जबकि जदयू की सहयोगी भाजपा के पास 74 सीटें है और मुख्य विपक्षी राजद के पास 75 सीट है।

एक अनुभवी राजनेता नीतीश कुमार को राजनीतिक पैंतरेबाजी की कला में महारत हासिल है। भाजपा ने अभी भी बिहार में अपने नेता को पेश नहीं किया है और उनके दो डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी नीतीश कुमार के नेतृत्व के लिए मुश्किल से ही कोई चुनौती पेश कर सकते हैं। अपने राजनीतिक वर्चस्व को बढ़ाने के लिए यह स्थिति नीतीश कुमार के लिए काफी अनुकूल है। इसलिए वे लोगों की नब्ज को महसूस करने, अपनी लोकप्रियता का आकलन करने और जमीनी स्तर पर अपने कैडर को सक्रिय करने के लिए फिर से मैदान में उतरे हैं।

22 दिसंबर को पूर्वी चंपारण में अपनी समाज सुधार यात्रा की शुरुआत करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि मैं किसी भी शादी समारोह में शामिल नहीं होऊंगा जिसमें मुझे लिखित रूप से यह नहीं दिया जाएगा कि इसमें कोई दहेज नहीं लिया गया या नहीं दिया गया। उन्होंने राज्य की महिलाओं से शराब का सेवन करने वालों, शराब बनाने वाले और उसको बेचने वाले के बारे में भी जानकारी देने का आह्वान किया। ऐसा करके वह 10 लाख महिला स्वयं सहायता समूहों तक पहुंचने की भी कोशिश कर रहे हैं।

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