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बाहुबली की पत्नी से लेकर लालू के गढ़ में आरजेडी को हराने वाला, जानें नीतीश ने किसे-किसे दी कैबिनेट में जगह

जदयू नेता अशोक चौधरी, नरेंद्र नारायण यादव, बीमा भारती, संजय झा, नीरज कुमार, रामसेवक सिंह, श्याम रजक और लक्ष्मेश्वर राय को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

नीतीश मंत्रिमंडल के नए मंत्री शपथ लेते हुए। (Photo: PTI)

बिहार में भाजपा और लोजपा के साथ सत्ता में शामिल जदयू से आठ मंत्रियों को रविवार को नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। इनमें बाहुबली की पत्नी से लेकर लालू के गढ़ में राजद को हराने वाले को जगह मिली है। पटना स्थित राजभवन में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल लालजी टंडन ने जदयू नेता अशोक चौधरी, नरेंद्र नारायण यादव, बीमा भारती, संजय झा, नीरज कुमार, रामसेवक सिंह, श्याम रजक और लक्ष्मेश्वर राय को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

रामसेवक सिंह: रामसेवक सिंह नीतीश सरकार में पहली बार मंत्री बने हैं। वे बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक बने हैं। दो बार सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक भी रह चुके हैं। कुशवाहा जाति से आने वाले रामसेवक सिंह के ऊपर अपने विधानसभा क्षेत्र के हथुआ थाना क्षेत्र में एक युवक की बेरहमी से पिटाई का आरोप लगा था, जिसमें वे जेल भी गए थे। ये जिस हथुआ विधानसभा क्षेत्र से आते हैं, वहीं राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का गांव फुलवरिया और राबड़ी देवी का मायके सेलार कला गांव भी है। इस इलाके में लालू यादव का दबदबा माना जाता है। इसके बावजूद वे लालू यादव के गढ़ में राजद को हराए हैं।

श्याम रजक: एक समय था कि श्याम रजक को लालू यादव का काफी करीबी माना जाता था। समय बदला, हालात बदले और लालू के ‘श्याम’ नीतीश के साथ चले आए। इससे पहले भी वे नीतीश सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्रालय संभाल चुके हैं। पटना से सटे फुलवारी शरीफ के विधायक वर्ष 1995 से सक्रिय राजनीति में हैं। कुछ समय पहले वे काफी बीमार थे। पटना के एक बड़े निजी अस्पताल में जब उनका इलाज चल रहा था तो कर्मचारियों की लापरवाही से उनका पीठ जल गया था। इस बाबत उन्होंने खुद फेसबुक पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी थी। जिसके बाद उनके भतीजे राकेश रंजन के बयान पर शास्त्री नगर थाने में एक प्राथमिकी दर्ज करवायी गई थी।

संजय झा: संजय झा को नीतीश कुमार का काफी करीबी माना जाता है। लोकसभा चुनाव में वे टिकट के प्रबल दावेदार बताए जा रहे थे लेकिन निराशा हाथ लगी। हालांकि, चुनाव बाद इन्हें विधान परिषद में जगह मिली और मंत्री बनाए गए। मूल रूप से मधुबनी के रहने वाले संजय झा को मिथिलांचल का बड़ा चेहरा माना जाता है। वर्ष 2014 में ये दरभंगा से चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे।

अशोक चौधरी: कांग्रेस के बिहार प्रदेश के अध्यक्ष रह चुके अशोक चौधरी महागठबंधन की सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। जब नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग हो गए तो इसके कुछ समय बाद चौधरी भी कांग्रेस का दामन छोड़ नीतीश के साथ हो लिए। अशोक चौधरी विधान परिषद के सदस्य बनें और नए मंत्रिमंडल में उन्हें जगह दी गई।

नीरज कुमार: नीरज कुमार लंबे समय से जदयू के प्रवक्ता रहे हैं। इन्हें नीतीश कुमार का करीबी और जदयू में भूमिहार जाति का एक बड़ा चेहरा माना जाता है। ये पहली बार मंत्री बने हैं। माना जा रहा है कि जदयू नेता और पूर्व मंत्री ललन सिंह के लोकसभा में जाने के बाद जो मंत्री पद की जो सीट खाली हुई, उसी जगह पर नीरज को स्थान दिया गया। ललन सिंह मुंगेर सीट से लोकसभा पहुंचे हैं और ये भी भूमिहार जाति से ही आते हैं।

बीमा भारती: नीतीश कुमार ने बीमा भारती को मंत्री बनाया है। ये पहले भी मंत्री रह चुकी हैं। सही तरीके से शपथ पत्र नहीं पढ़ पाने की वजह से काफी चर्चा में रहीं थी। ये पहली बार 2005 में पूर्णिया जिले के रूपौली से राजद के टिकट पर विधायक बनी थीं। अगली बार वे जदयू में शामिल हो गई और दो बार विधायक बनीं। मांझी मंत्रिमंडल में भी इन्हें पिछड़ावर्ग विभाग का मंत्री बनाया गया था। लोग इन्हें बाहुबली की पत्नी के रूप में भी जानते हैं। इनके पति का नाम अवधेश मंडल है, जिनका आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। पति-पत्नी के बीच मारपीट की वजह से भी ये दोनों सुर्खियों में आए थे। कुछ साल पहले इनके बेटे की मौत हो गई थी। वह ‘हत्या थी या आत्महत्या’ इसकी गुत्थी आज भी अनसुलझी है।

नरेंद्र नारायण यादव: ये मधेपुरा जिले के आलमनगर से विधायक हैं। जब नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था, तब इनका भी नाम सीएम पद की रेस में था। हालांकि, वे सीएम नहीं बन सकें। अब वे तीसरी बार मंत्री बने हैं।

लक्ष्मेश्वर राय: लक्ष्मेश्वर राय मधुबनी जिले के लौकहा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। इन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत छात्र नेता के तौर पर की थी। छात्र राजनीति करते हुए कई बार आंदोलन के समय वे जेल जा चुके हैं।

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