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नीतीश सरकार ने दो साल में घटा दिया डेढ़ हजार करोड़ हेल्थ बजट, PMCH पर 5500 करोड़ खर्च का ऐलान किया तो बढ़ाया 2600 करोड़

2016-17 में बिहार का स्वास्थ्य बजट था 8,234 करोड़ था जो अगले साल यानी 2017-18 में घटकर 7,002 करोड़ हो गया। यानी सरकार ने एक साल में स्वास्थ्य बजट में 1200 करोड़ रुपये की कटौती कर दी।

Author नई दिल्ली | June 19, 2019 4:32 PM
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (Photo: PTI)

उत्तरी बिहार के मुजफ्फरपुर में स्थित सबसे बड़े अस्पताल श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में पिछले कुछ दिनों में 90 से ज्यादा बच्चों की मौत इन्सेफ्लाइटिस से हो चुकी है। बच्चों की मौत का यह आंकड़ा दिन-ब दिन बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच बीमारी की रोकथाम और उसके कारणों पर भी बहस तेज है। बहस इस बात की भी हो रही है कि राज्य की नीतीश सरकार ने इस बीमारी की रोकथाम के लिए ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की? जबकि 2014 में यह विकराल रूप धारण कर चुकी थी। आंकड़ों पर गौर करने से पता चलता है कि नीतीश सरकार ने पिछले कुछ सालों में स्वास्थ्य बजट में बड़ी कटौती की है। 2016-17 और 2017-18 के स्वास्थ्य बजट में नीतीश सरकार ने भारी कटौती की लेकिन बाद में जब 2018 में पीएमसीएच को 5500 करोड़ की लागत से दुनिया का नंबर वन अस्पताल बनाने का ऐलान किया गया तो अगले बजट यानी 2019-20 में स्वास्थ्य विभाग का बजटीय आवंटन करीब 2600 करोड़ रुपये बढ़ाकर 9622 करोड़ रुपये कर दिया गया।

पॉलिसी रिसर्च स्टडीज (पीआरएस) के मुताबिक 2016-17 में बिहार का स्वास्थ्य बजट था 8,234 करोड़ था जो अगले साल यानी 2017-18 में घटकर 7,002 करोड़ हो गया। यानी सरकार ने एक साल में स्वास्थ्य बजट में 1200 करोड़ रुपये की कटौती कर दी, जबकि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पहले से ही चरमराई हुई है। आंकड़ों के मुताबिक शहरी स्वास्थ्य पर बजट में 18 फीसदी की कटौती कर दी गई जबकि ग्रामीण स्वास्थ्य पर बजट में 23 फीसदी की कटौती की गई है। 2016-17 के मुकाबले 2017-18 में नए अस्पताल या वार्ड के निर्माण के लिए बजट में भी 10 फीसदी की कटौती की गई और मात्र 819 करोड़ रुपये आवंटित किया गया।

2018-19 की बात करें तो इस बजट में भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर कोई विशेष जोर नहीं दिया गया और इस साल 2017-18 के मुकाबले मात्र तीन फीसदी की बढ़ोत्तरी के साथ कुल बजट आवंटन 7,794 करोड़ का ही रहा। इसी बजट में एसकेएमसीएच में 150 करोड़ की लागत से कैंसर अस्पताल खोलने की योजना थी। साल 2018 के नवंबर में नीतीश सरकार ने एक फैसला लिया कि राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच को अपग्रेड कर दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल कर दिया जाएगा और वहां मौजूद 1700 बेड को बढ़ाकर 5,462 बेड कर दिया जाएगा। इसे सात साल में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया और इसका बजट बताया गया 5,540 करोड़। यानी राज्य के कुल स्वास्थ्य बजट खर्च के बराबर सिर्फ इस अस्पताल का बजट। बता दें कि 2017-18 में स्वास्थ्य बजट का कुल खर्च करीब 5551 करोड़ ही था।

इसी को ध्यान में रखते हुए नीतीश सरकार ने साल 2019-20 के बजट में स्वास्थ्य विभाग के लिए 9622 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। बता दें कि 1500 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए 1500 करोड़ और 2500 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने के लिए 2500 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। इसके अलावा साढ़े पांच हजार बेड के लिए 1500 डॉक्टर की जरूरत होगी। इसके लिए सरकार ने 11 जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने का भी एलान किया है। अगर पीएमसीएच के लिए सात सालों के लिए होने वाले खर्चे को बराबर हिस्से में बांटकर 800 करोड़ रुपये अलग कर लें तब भी बिहार का स्वास्थ्य बजट 2016-17 के मुकाबले चार साल में मात्र 600 करोड़ रुपये बढ़ाया गया है।

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