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कल तक साथ थे तो मैं ‘पीएम मेटेरियल’ था, अब किसी के काम का नहीं हूं: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगामी बिहार विधानसभा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान उनके..

Author August 7, 2015 7:00 AM

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगामी बिहार विधानसभा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान उनके ‘डीएनए’ को लेकर की गयी टिप्पणी को वापस लेने के लिए उन्हें लिखे खुले पत्र पर राजग के नेताओं की आक्रमक टिप्पणी को अनावश्यक बताते हुए उन पर प्रहार किया।

यहां श्रीकृष्णापुरी पार्क में पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने के अवसर पर नीतीश ने कहा ‘मेरे डीएनए में खोट कहा गया है। मेरे डीएनए में स्वतंत्रता संग्राम के मूल्य है जो बिहार के लोगों का डीएनए है। वही मेरा डीएनए है, उससे अलग नहीं है।’

उन्होंने प्रधानमंत्री की टिप्पणी की ओर इशारा करते हुए कहा ‘मैंने अपने पत्र में इतना ही कहा है कि देश के सर्वोच्च पद के गरिमा के अनुरूप उनका वक्तव्य नहीं है। कृपापूर्वक अपने शब्द वापस ले लीजिये। इससे बिहार के लोगों की भावनायें आहत हुई है।’

उन्होंने कहा ‘मैंने प्रधानमंत्री से कहा है लेकिन भाजपा और एनडीए से कुछ नहीं कहा है। भाजपा और एनडीए के नेता क्या कहते हैं, उसकी मुझे परवाह नहीं है। वे मर्यादा की बात नहीं करते हैं।’

नीतीश ने राजग शासनकाल में अपने मंत्रिमंडल में रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी पर प्रहार करते हुए उनका नाम लिए बिना कहा ‘कल तक साथ थे तो मैं ‘पीएम मेटेरियल’ था, अब अलग हो गये हैं तो मैं किसी के काम का नहीं हूं। उनकी किसी बात पर मेरा ध्यान नहीं है। उनकी पृष्ठभूमि हमें ज्ञात है। हमारी पृष्ठभूमि आजादी की लडाई है। हमारे खून, दिलो दिमाग में आजादी की लडाई के मूल्य है, जो हमारे राष्ट्र नायकों ने स्थापित किये हैं, जो हमेशा मौजूद रहते हैं। उनके कोई मूल्य नहीं हैं, उनके पुरुखों ने आजादी की लडाई में हिस्सा नहीं लिया था। आजादी की लडाई के मूल्य, सहिष्णुता, सदभाव उनके स्वभाव में नहीं है।’

नीतीश ने कहा ‘हमने सिर्फ यही कहा है कि वक्तव्य प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है और इससे बिहार के लोगों की भावना आहत हुयी है।’

उन्होंने कहा ‘हमने विनम्र अनुरोध किया है कि कृपया अपने शब्द को वापस ले लें।….पत्र में संस्कार एवं विनम्रता को कायम रखी है। मुख्यमंत्री के नाते दायित्व निभाते हुये मैंने उनका स्वागत किया और मुजफ्फरपुर सभा का भाषण सुनने के बाद भी हम उन्हें विदा करने गये थे।’

नीतीश ने कहा ‘बिहार का इतिहास गौरवशाली है, जो न सिर्फ देश का बल्कि मानव सभ्यता का इतिहास है। गौरवशाली स्थान पर हमने जन्म लिया है, इसकी मिट्टी को सलाम करते हैं। हम लोगों को मार्गदर्शन करने वाले राष्ट्रनायक एवं कई नेता हुये हैं, ये हमारा परम सौभाग्य है।’

उन्होंने कहा ‘मुझे लोकनायक जयप्रकाश नारायण, छोटे साहब सत्येंद्र नारायण सिन्हा और जननायक कर्पूरी ठाकुर के चरणों में जानने और सीखने का मौका मिला है। हमारे पुरुखों ने कभी द्वेष नहीं सिखाया, उन्होंने अन्याय के खिलाफ लडना सिखाया। बिहार के खिलाफ अन्याय न हो इसके लिये हम लडते रहेंगे। हमारी आवाज को कोई बद नहीं कर सकता है।’

नीतीश ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की चर्चा करते हुए कहा ‘कलाम साहब ने बतौर राष्ट्रपति बिहार विधानमण्डल के संयुक्त अधिवेशन में कहा कि था कि बिहार के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है। बिहार का विकास करेंगे तो वह देश का विकास होगा, यही सबसे बडी देश सेवा होगी।’

इस अवसर पर नागालैंड एवं केरल के पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार ने कहा कि दिवंगत सत्येन्द्र नारायण सिन्हा की प्रतिमा के स्थापना से उनके कार्य कलाप एवं जीवनी की चर्चा होगी। उनका परिवार पूरा बिहार है।

उन्होंने प्रधानमंत्री के नीतीश के डीएनए को लेकर की गयी टिप्पणी की चर्चा करते हुये कहा कि इस मुद्दे पर नीतीश कुमार को हमारा पूरा समर्थन है। इस अवसर पर सत्येन्द्र नारायण सिन्हा की पत्नी किशोरी सिन्हा ने अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री और अपने पति की प्रतिमा स्थापना के लिये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद दिया।

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